Dr. Reetesh Kumar Khare डॉ रीतेश कुमार खरे

बरुआसागर जिला झांसी उत्तर प्रदेश

Joined November 2018

मेरा जन्म जिला झांसी उत्तर प्रदेश में बुंदेलखंड के स्वर्ग कहे जाने वाले बरुआसागर नामक नगर में हुआ मेरी प्रारंभिक शिक्षा डी सी बेसिक प्राथमिक पाठशाला एवं माध्यमिक शिक्षा पंडित राम सहाय शर्मा इंटर कॉलेज बरुआसागर में हुई इसके बाद मैंने बिपिन बिहारी महाविद्यालय झांसी से बीएससी, एमएससी तथा पीएचडी की उपाधि प्राप्त की एवं बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी परिसर से खाद्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विषय में एमएससी एवं बी एड परीक्षा उत्तीर्ण की बाद में मैंने नेट एवं स्लेट जैसी परीक्षाओं को उत्तीर्ण किया|
एक लंबे संघर्ष के बाद सन 2006 में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा राजकीय इंटर कॉलेज में प्रवक्ता जीव विज्ञान के पद पर मेरा चयन हुआ यहां पर राजकीय इंटर कॉलेज चरखारी एवं झांसी में लगभग 10 वर्ष तक सेवा की तत्पश्चात सन 2016 में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा मुझे उच्च शिक्षा हेतु चयनित किया गया यहां पर मेरी प्रथम नियुक्ति राजकीय महाविद्यालय पनवाड़ी में हुई और फिर मेरा स्थानांतरण राजकीय महाविद्यालय ललितपुर में किया गया वर्तमान में मैं इसी महाविद्यालय में कार्यरत हूं
जहां तक लेखन कार्य का प्रश्न है तो मुझे कविता लिखने का बचपन से ही शौक रहा है साक्षरता निकेतन लखनऊ से मैंने अपने मित्र सुधीर कुमार मिश्र निश्चल जी के साथ कई लेखन
कार्यशालाओं में प्रतिभाग किया है मेरी कुछ पुस्तकें भी प्रकाशित हो चुकी है तथा कुछ पुरस्कार भी प्राप्त हुए हैं

Copy link to share

जीतेगा विज्ञान हमारा

आज विश्व में अंधकार है छिपे शत्रु का तेज वार है घायल है मानवता सारी भयाक्रांत दिखते नर नारी मजबूरी है घर पर रहना सामाज... Read more

ऐसे हार नहीं मानेंगे

हार जीत तो लगी रही है सदियों पहले से इस जग में फूलों के संग कांटे भी हैं जीवन पथ की हर एक डग में हंस कर आगे बढ़ जाएंगे ऐसे हार... Read more

लॉकडाउन को चलो भुनाएं

जो संकट हम पर आया है वह भी एक अवसर लाया है आओ इसका लाभ उठाएं लॉकडाउन को चलो भुनाएं दिनचर्या हम करें नियंत्रित सूक्ष्म योग... Read more

मन की संवेदना

**मन की संवेदना** मन की संवेदना छिपाकर जीना सीख गया मैं हंसना सीख गया मैं गम को पीना सीख गया मैं इस दुनिया में श्रेष्ठ भा... Read more

क्यों न पेड़ लगाते हो?

तेज धूप है हवा गरम बहा पसीना निकला दम धूल भरी आंधी में घिर कर रोते हो चिल्लाते हो क्यों ना पेड़ लगाते हो? चौमासा दस दिन ... Read more

रोकें बाल मजूरी

बच्चे सीधे सच्चे होते पल में हंसते पल में रोते फूलों सा हरदम मुस्काते तारों सा घर को चमकाते इनकी शिक्षा बहुत जरूरी आओ रोके... Read more

उड़न खटोला गांव में आया

आसमान से धीरे-धीरे धूल उड़ाता नीचे आया देखा सबने शोर मचाया उड़न खटोला गांव में आया || उड़न खटोले से जो उतरे खादी के कपड़... Read more

मां गंगा

युगों युगों से इस धरती पर अपना प्यार लुटाती गंगा || अमृत जैसे जल को देकर तन मन शुद्ध बनाती गंगा || उपजाऊ मैदान बनाकर सो... Read more