Kapil khandelwal

Joined December 2016

यूं न खो जाओ भीड़ में इस कदर ..
की यार ढूढ़ते रहे तुम्हे दर-बदर…..

कवि कपिल खंडेलवाल ” कपिल”
कोटा – राजस्थान

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***** ०००० मुक्तक ०००० *****

1. हिंदी से ही शान, हिंदी से ही मान, हिंदी से हमारी, दुनिया में पहचान| 2. बचपन खेल खेल में बीता, जवानी मौ... Read more

00000 पतंग 00000

मेँ भी एक पतंग बन जाऊ छू लूँ आसमान की ऊँचाईयो को उनमुक्त हो रंग - बिरंगी तितलियों की तरह लहराऊँ मैं भी लहर-लहर खु... Read more