Ritesh Singh Rahi

Ballia

Joined November 2018

मंजिल की तलब नही मुझे, अपनी धुन का राही हूँ।
अश्रु की स्याही,दर्द की गवाही,कलम का सिपाही हूं।।

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माँ माँ जपते जा "राही" जब तक चलता श्वास

माँ शब्द सबसे छोटा पर वो गुणों की खान जिसकेे सम्मुख फिके सारे वेद पुराण माँ भक्ति को तरसे स्वयं सभी भगवान चारो ओर देख ले "राही" क... Read more