Rita Singh

Joined September 2016

नाम – डॉ रीता
जन्मतिथि – 20 जुलाई
शिक्षा- पी एच डी (राजनीति विज्ञान)
आवासीय पता – एफ -11 , फेज़ – 6 , आया नगर , नई दिल्ली- 110047

आत्मकथ्य – इस भौतिकवादी युग में मानवीय मूल्यों को सनातन बनाए रखने की कल्पना ही कलम द्वारा कुछ शब्दों की रचना को प्रेरित करती है , वही शब्द रचना मेरी कविता है ।

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माँ तो बस माँ होती है

माँ तो बस माँ होती है , सारा घर जब सो जाता है मीठे सपनों में खो जाता है देख सभी को खुश होती है हो निश्चिन्त तब ही सोती है माँ त... Read more

माँ तो बस माँ होती है

माँ तो बस माँ होती है , सारा घर जब सो जाता है मीठे सपनों में खो जाता है देख सभी को खुश होती है हो निश्चिन्त तब ही सोती है माँ त... Read more

अब मुरारि शंख बजा दो

Rita Singh गीत Sep 29, 2018
धरा बनी यह रणभूमि है घर घर में संग्राम छिड़े अब मुरारि शंख बजा दो जन जन हैं अविराम लड़े । द्वंद्व मचा बंधु बंधु में करते वे ... Read more

माँ तो बस माँ होती है

माँ तो बस माँ होती है , सारा घर जब सो जाता है मीठे सपनों में खो जाता है देख सभी को खुश होती है हो निश्चिन्त तब ही सोती है माँ त... Read more

प्रकृति में सूर्य तत्व की महत्ता और पर्यावरण संरक्षण

Rita Singh लेख Jan 14, 2018
मकर संक्रांति पर विशेष - प्रकृति में सूर्य तत्व की महत्ता और पर्यावरण संरक्षण -------------------------------------... Read more

शूल/काँटा

बने तुम भी पहचान चमन की चुभन नहीं शान हो गुलशन की । कोमल कितना साथ तुम्हारा तुम बिन अधूरी महक सुमन की । तुम तपस्वी बड़े ही अ... Read more

बदरा तुम क्यों शीत काल में

बदरा क्यों तुम शीत काल में अंबर के घर आये हो । कैसी कामना पूरी करने बिन बुलाये ही छाये हो । शरद गुलाबी को देखकर मंद मंद मुस्का... Read more

कुहासा

भानु तेरी रश्मि के सँग आँख मिचौली करे कुहासा नभ जल थल सब राहों में विलंब सदा करे कुहासा शीत काल में डेरा डाले है मनमर्जी करे कुहास... Read more

नीर वेदना से बहता है

गीत ------ नीर वेदना से बहता है नीरस में भी रस मिलता है ।। जीवन सतत सरस बहता यह भले दूरियॉ हों प्रियवर से विरहा मन कविता कह... Read more

प्रद्युम्न हम बहुत शर्मिंदा हैं

प्रद्युम्न हम बहुत शर्मिंदा हैं तेरे कातिल क्यों जिंदा हैं ? माँ का आँचल कह रहा तड़पकर क्यों मिला लाल को मौत का फंदा है ? स्कू... Read more

है ख्वाहिश मेरी

तेरे संग वक्त बिताना है ख्वाहिश मेरी तुझे हर सुख दुख सुनाना है ख्वाहिश मेरी । तुझे ख़्वाबों में सताना है ख़्वाहिश मेरी । तुझे द... Read more

दो एकम दो : बाल कविता

दो दो एकम दो , दो दूनी चार आओ करें धरा से प्यार दो तिया छः , दो चौक आठ याद करो सब अपना पाठ दो पंजे दस , दो छंग बारह स्कूल स... Read more

दिवस अंक -14 अगस्त

दिवस अंक - 14 अगस्त आओ शोक मनाएँ हम भारत वासी अगस्त मास की सबसे अशुभ तिथि पर क्योंकि यह वर्ष गाँठ है भारत की अखंडता को खंड... Read more

हरा भरा संसार वनों का

हरा भरा संसार वनों का सुंदर सा घर बार वनों का घना घना परिवार वनों का महका सा दरबार वनों का सावन है त्योहार वनों का बसंत है श... Read more

तमन्ना है वो सलामत रहें सदा ही

कहते हैं वो तुम याद करते नहीं हो पर हमने तो उन्हें कभी भुलाया नहीं है । वो बसे हैं हर कोने में दिल के हमारे पर उन्हें कभी हमने ... Read more

मोहन तुम थे एक मुसाफिर

Rita Singh गीत Jul 31, 2017
मोहन तुम थे एक मुसाफिर हमको कभी नहीं ज्ञान हुआ , इक दिन तुमको जाना होगा इसका तनिक नहीं भान हुआ । नँदबाबा ने गोद खिलाया मैया स... Read more

सपने भी साकार हुए हैं

करते जो श्रंगार श्रम का उनके दिन त्योहार हुए हैं अपने ही सत्कर्मों से सब सपने भी साकार हुए हैं । बसती लगन हिय में जिनके उनके ... Read more

शैल शिखर से निकली सरिता

शैल शिखर से निकली सरिता स्वयं ही मार्ग बनाती है , कभी न थकती , कभी न रुकती नित आगे बढ़ती जाती है । पाषाणों के संग खेलती लहर... Read more

महक तुम्हारी हमें साँवरे ....

Rita Singh गीत Jul 16, 2017
नित सुबह आती है , नित शाम आती है याद तुम्हारी हमें साँवरे दिन रात आती है । हर सहर भाती है , हर पहर भाती है महक तुम्हारी हमें स... Read more

झरने

कर संघर्ष पाषाणों से मधुर संगीत सुनाते झरने कल - कल कल - कल गीत सुनाते आगे बढ़ते जाते झरने । कभी न रुकते कभी न थकते हिम्मत है... Read more

मोहन समझो मन की पीर

Rita Singh गीत Jun 26, 2017
मोहन समझो मन की पीर तुम बिन कैसे धरु मैं धीर । दिन रैना दर्श की तृष्णा किस विध तृप्ति हो बिन नीर । मोहन समझो. .... विरह वेदना... Read more

गगन भवन में घन हैं छाए

गगन भवन में घन हैं छाए शीतल पवन संग लहराए । तपती धरती के आँचल में हरा भरा संदेशा लाए । तरुवर बाग बाग मुस्काए खेत क्यारी धान ... Read more

मेघा क्यों बृजगाँव में आए

मेघा क्यों बृजगाँव में आए मेघा क्यों बृजगाँव में आए नहीं तनिक तुम हमको भाए उलट पैर अभी जाओ पुरी को जहाँ राज मोहन मन छाए । ... Read more

तुम बिन सूना है मधुवन

तुम बिन सूना वृंदावन है तुम बिन सूना है मधुवन तुम बिन सूना बृजगाँव है तुम बिन सूना नंदन वन । तुम बिन सूने ताल तलैया तुम बिन ... Read more

आओ धरा अपनी सजाएँ

वृक्ष लगाएँ और बढ़ाएँ आओ धरा अपनी सजाएँ । हरी चुनरिया इसे उढ़ाएँ हरा भरा श्रंगार कराएँ । आओ धरा अपनी सजाएँ । रोपित कर भूल न जाए... Read more

जीवन में नारी शिक्षा का महत्व

जीवन में नारी शिक्षा का महत्व इतिहास इस बात का साक्षी है कि मानव सभ्यता का विकास शिक्षा के द्वारा ही संभव हुआ है । कहा गया है कि... Read more

नहीं सरल राजत्व निभाना

नहीं सरल राजत्व निभाना राजा तुम्हें समझना होगा , राजतिलक होतेे ही तुमको राजधर्म को जीना होगा । इक यज्ञ सा राजा का जीवन जो प्र... Read more

आओ रोपें इक तरुवर हम

आओ रोपें इक तरुवर हम अपनी प्यारी तनुजा के नाम सींचें उसको नित प्रेम से आएगा वह सबके काम । प्रेम जल से सिंचित तरुवर बेटी सम पर... Read more

राजन हमें बताओ तुम !

राजन हमें बताओ तुम ! कितने सैनिक अभिमन्यु सम बलिदान हमें करने होंगे ? कितनी माँओं के आँचल ऐ शासन ! सूने हमें सहने होंगे ? कब... Read more

गुलमोहर तुम हो शहजादे

गुलमोहर तुम हो शहजादे तुमको मेरी राधे राधे , तप्त हवाओं संग खेलते बने बड़े ही सीधे सादे । मस्तक सोहें पुष्प अति सुँदर रँग है... Read more

भगवन तूने माँ को बनाया

भगवन तूने माँ को बनाया कैसा कृपा धन बिखराया , तेरा कैसे करूँ शुक्रिया ऐसा ममता जल बरसाया । बन निर्मात्री संस्कारों की उसने घर... Read more

एक सात्विक रिश्ता : सच्ची मित्रता

निःस्वार्थ , निर्विकार , निष्पक्ष , निष्पाप भावों से युक्त होता है सच्चा मित्र । एक सच्चा मित्र जीवन का सबसे अनमोल उपहार है । उसकी ... Read more

मैया की ममता

Rita Singh गीत Apr 30, 2017
मैया तेरा नटखट लाला -- किशन द्वारिकाधीश बना कल तक जिसने मटकी फोडी आज वही जगदीश बना ।। कैसा माखन दिया , यशोदा! राजबुद्धि उस... Read more

सूरज काका

सुबह सवेरे सूरज काका नित मुस्काते तुम आते हो अपनी सोने की किरणों को संग सदा ही ले आते हो । घड़ी भर भी विलंब न करते नियत समय प... Read more

अमलतास तरु एक मनोहर

ग्रीष्म ताप पर प्रतिस्पर्धा में जीत सदा ही वो पाता है पीत वसन में सँवर सँवर कर जो लहर लहर मुस्काता है । तप्त हवा के संस्पर्शो... Read more

ममता बेटी बिना न पूरी

************* ममता बेटी बिना न पूरी । मॉ की रहती आस अधूरी।।१!! बेटी ही घर का गहना है। बिन बेटी ऑगन सूना है।।२!! उत्सव बेट... Read more

बैसाख मास सँग अपने

बैसाख मास सँग अपने कनक उपहार लाया है , हुआ कण कण है प्रफुल्लित जन मन सब हरषाया है । चमके खेत स्वर्ण - आभ से कृषक हृदय मुस्का... Read more

जल बिन सूना है संसार

जल जीवन का है आधार जल जग का करता उद्धार । जल सृष्टि का एक उपहार जल से भू पर बनी बहार । जल औषध का एक प्रकार करता रोगों का सं... Read more

माला के जंगल:

कुछ तपस्वी से लगते हैं शांत भाव से तप करते हैं हरे भरे तरोताजा से प्रफुल्लित मन से खड़े हुए हैं । कुछ बुझे बुझे मुरझाये से हैं... Read more

आया बसंत सखी आया बसंत

आया बसंत सखी आया बसंत चहुँदिशि खुशियाँ लाया अनंत महक रहे हैं सभी दिग दिगंत झूमा अवनी का अंग प्रत्यंग आया बसंत सखी आया बसंत... Read more

सजी धरा है सजा गगन है

सजी धरा है सजा गगन है सज गया सृष्टि का कण कण है रँग बिरंगे पुष्पों की स्मित से मुस्काने लगा जन गण मन है । नवल धवल बने तरु पात ... Read more

वे बलिदानी मसताने थे

राजगुरु सुखदेव भगत सिंह आजादी के दीवाने थे , हँसते हँसते गए फँदे पर वे बलिदानी मसताने थे । इंकलाब का नारा देकर वो नयी चेतन... Read more

संकट और खुशहाली

प्रभु ! संकट के समय ' मुझे बचा लो ' तुमसे ऐसी गुहार नहीं करूँगी , मुझे पता है कि तुमने अदृश्य रूप में मुझे संकटों से उबरने की... Read more

फाग माह का हैं उपहार

नव पल्लव सज्जित तरुवर फाग माह का हैं उपहार , कोमल कोपल महक डाल पर करती सुरभित पवन बयार । मानो वृक्ष वर बन सँवरकर सेहरे की लड़... Read more

नमामि गंगे

जय जय गंगे , जय जय गंगे । नमामि गंगे , नमामि गंगे ।। पाप नाशिनी , जग तारिणी सुख कारिणी , दुख हारिणी हर हर गंगे हर्ष वाहिनी । ... Read more

पथिक वही जो बढ़ता जाता

पथिक वही जो बढ़ता जाता अवरोधों से कब घबराता , ऊँची-नीची सब राहों पर बिना रुके वो चलता जाता । पाषाणों से जब टकराता असंभव को सं... Read more

क्षत्राणी की गौरव गाथा

क्षत् से रक्षा करती है जो वह क्षत्राणी कहलाती है क्षत्राणी की गौरव गाथा ग्रंथों में गायी जाती है । पौराणिक युग से ही उसने ... Read more

ये प्रातः तुम्हें सजानी है

ओ भारत की भावी नारी ! बहुत सो चुकी अब तो जागो , ये प्रातः तुम्हें सजानी है । मत बोझ बनो तुम परिवारों पर सिर्फ भार बनो मत ... Read more

आया फागुन मास

रसिया के रंग में जब खेले गोरी फाग । समझो ए संग सहेली आया फागुन मास । आया फागुन मास देख कलियाँ भी हर्षायीं । फूलों के सँग सजी ... Read more

जीवन

जीवन सरस सलिल सा बहता जीवन अवरोधों संग बढ़ता जीवन निशा दिवस है गतिमय जीवन हँसते गाते चलता जीवन । दुख के पल भी सहता जी... Read more