Rishikant Rao Shikhare

Akbarpur, Ambedkar Nagar

Joined March 2017

चुराकर दिल मेरा वो बेखबर से बैठे हैं;मिलाते नहीं नज़र हमसे अब शर्मा कर बैठे हैं;देख कर हमको छुपा लेते हैं मुँह आँचल में अपना;
अब घबरा रहे हैं कि वो क्या कर बैठे हैं

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घर आ जाना।

गजल 221 1222 221 1222 जब दर्द सताये तुम्हें तो घर आ जाना। आवाज लगाये तुम्हें तो घर आ जाना। आबाद रहेगा तुम्हारा इ... Read more

तन है सबका मिट्टी

तन है सबका मिट्टी। सृष्टि के निर्माण से खेल रहा आदमी। अब कहां पाएगा हरा मैदान आदमी। धूप ही धूप मिलेगी हर जगह, छाँव कहाँ? कच्... Read more

नज्म

जाज़िब तर्जुमान। पहली गली में आखरी मकान किसका है? खुशबूदार हवाओं में फरमान किसका है? बे-अन्दाज़ा लुभाती है मोतीचूर के लड्डू... Read more

चौकीदार

गम़्माज़ चौकीदार। खिल-खिलाती जिंदगानी लिखूं। बहते हुए दरिया का पानी लिखूं। एहतियातन याद न रखूं एहसासअपने, एहतियाज होतो पूरी... Read more

एक लब्ज 'मां'

एक लब्ज 'माँ' जब भी "मां" मुझे बुलाती है, फिजायें दौड़ी चली आती है। नर्म शाखों की शबनमी बूँद छू लूँ, माँ उंगली पकड़ चलना सिखात... Read more

भोर

भोर (कविता) भोर कितनी प्यासी है, जो हर सुबह मिलने के लिए बेचैन सी आ जाती है। साथ ही साथ मे लाती है, आलसपन को दूर करने का लेप।... Read more

शादी का माहौल

रुनझुन की शादी । कुछ ऐसी मेरी शादी थी। जब व्याह हमारा तय हुआ, पास में बिल्कुल जाना था। आंखों के सामने व्याह चाहती थी, बस वो ए... Read more

ग़जल

ताजा गजल 212 212 212 212 चल रही हैं हवा आपके शहर में, उठ रहा है धुँआ आपके शहर में। छू गई है हया शबनमी बूंद को... Read more

रूमानी ग़जल

रूमानी ग़ज़ल 212 212 212 212 हर तरफ हर जगह आप ही आप हैं। दूर भी आप हैं, पास भी आप हैं। झल-झलाती हुई शर्म खाती हुई,... Read more

आईना देखूं।

तुमको देखूं तो मैं आईना देखूं, चेहरा आँखों मे मैं अपना देखूं। सारी खुशियाँ तुम्हारे कब्जे में, हर घड़ी चेहरा मैं हस्ता देखूं। ... Read more

ग़जल

ग़ज़ल फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन आइना क्या देखकर शरमा रहा है। यूँ मिली जब आंख तो घबरा रहा है। बंद पलकों से कहो ना दर्द क... Read more

हाइकु

जीवन में पहली बार हाइकु लिख रहा हूं। 1. बारिश आई मौसम है सुहाना बच्चे खेलेंगे। 2. हर तरफ मेंढक की आवाज सुनाई देंगे। ... Read more

गीत

हिन्दी गीत आज की शाम कुछ ऐसा करदूं, कि मैं सबको याद आऊं। बीती बातें भूल गये जो, मैं फिर सबको याद दिलाऊं। वो क्यों जा रहा मे... Read more

हाइकु

हाइकु गीत सांवरियाँ रे! ओ मेरे सांवरियाँ! सांवरियाँ रे! सवारियाँ रे! नैना हैं कजरारे, देखूं भरके। जागी है रात, मि... Read more

ग़जल

ग़जल 212 212 212 12 आज की शाम वो क्यों मिला नही। है मुझे कोई शिकवा गिला नही। आह कैसे भरूँ देख के ... Read more

ग़जल

ग़जल फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन आप हमसे यूँ अदावत अब न करना। रूठना लेकिन बगावत अब न करना। दोस्त मिलते हैं बड़े ही मुश्कि... Read more

ग़जल

विषय- मित्र/दोस्त विधा- ग़जल (शिकवा नहीं किसी से किसी से गिला नही) मफ़ऊल फ़ाइलात मुफ़ाईलु फ़ाइलुन कुछ धूप सा खिलो तुम मौसम बह... Read more

ग़ज़ल (जन्मदिन स्पेशल)

कोई है होठों तक, बे-पर्दों में आया। रातें भी पहचानें, जो ख्वाबों में आया। बेला सा महके हैं, सारा तन-मन उसका, धीरे-धीरे च... Read more

महकती गजल / गीत

रात के दहलीज पर इंतजार किसका है, सच-सच बता तुम्हारे दिल मे प्यार किसका है। आज बदली – बदली सी लागे तू, खिली गुलाब पंखुड़ी लागे तू... Read more

शाम-ए-गजल

शाम-ए-गजल रात के ख्वाब में करूँ बसर तन्हा, अब मैं जाऊँ तो जाऊँ किधर तन्हा । छोटी-छोटी सी उंगलियां उसकी, बुनते हैं ख्वाब एक... Read more

नन्ही सी चिड़ियाँ

चीखी थी, चिल्लाई थी, उस दिन वह बहुत घबराई थी। जिस दिन घर ध्वस्त हुआ था, तिनका-तिनका बिखरा पड़ा था। बड़ी मेहनत करके घर अपना सजाई थी... Read more

मां

माँ मुझे तेरा प्यार चाहिए। किसी को राम, किसी को रहमान चाहिए, किसी को अल्लाह, किसी को भगवान चाहिए। माँ, मुझे बस तेरा प्यार चाहिए... Read more

मेरा गांव

मेरा यार मेरा हमसफर हो गया, पाँव रखा तो डगर हो गया। कहां मिलती है मुफ्त की तालीमें, मेरा गांव अब शहरदार हो गया। अब पहले जैसी ब... Read more

छुट्टी की अर्जी

साहब , आज आपसे बात कुछ कहानी है, मेरी पत्नी का जन्मदिन है इसलिए छुट्टी जल्दी करनी है। फूल - पताके ले जाने है, थाली में दीप सजाने... Read more

वीर रस

चीते की चाल हो, सिंह की दहाड़ हो। रहो तुम साथ मेरे जैसे नाव की पतवार हो। बुलंद हो हौसला लक्ष्य हमारा साफ हो। उम्मीद की किर... Read more

परिण्य- सूत्र

खत्म हुआ इंतजार सारा इक घड़ी आने वाली है, उन हथेलियों पे मेहंदी सजने वाली है। महक फैला रहे है जो गुलाब अपनी खुशबू से, न तोड़ो उन... Read more

बसंत का महीना।

गेंदों की इक टोली बागों में खेल रही थी, सरसों के आँचल हर मन को टटोल रही थी। कुछ हरे कुछ पीले रंगो को समेट रही थी वो नन्हें गुलाब... Read more

गजल

बेवफा जो हम है अगर, बेवफा भी हो तुम, फिर भी मेरे प्यार का इक सिला हो तुम | सूरज कि रौशनी से भी ज्यादा जगमग हो, चंदा कि चांदनी से ... Read more

Romiyo

ना पूछ मेरे सब्र की इंतेहा कहाँ तक हैं, तू सितम कर ले, तेरी हसरत जहाँ तक हैं, वफ़ा की उम्मीद, जिन्हें होगी उन्हें होगी, हमें तो द... Read more

समय का सदुपयोग करो।

एक सेकेण्ड जो मौत से बचा हो। एक मिनट जिनकी ट्रेन छूट गयी हो। एक घंटे जो किसी का इंतज़ार किया हो। एक दिन जो पीड़ा के मारे दर्द से कर... Read more

होली के रंग।

उन गुलाबी चाँद के चेहरे पे थोड़ी रंग लगा देते, आइ्ये घनी गर्दीसो के बीच बाते कुछ सजा लेते। बस एक चाह हमारी भी थी उन दिनों तक, जो त... Read more