ऋषभ पाण्डेय

अमेठी

Joined December 2018

लिखने और पढ़ने की तृष्णा में कहीं दूर दराज़ की साहित्यिक यात्रा करते हुए खो सा जाता हूँ….फिर निराला के ‘मैं कवि हूँ पाया है प्रकाश’ की तर्ज पर खुद को अपने वैयक्तिक दर्पण में देखता हूं और समष्टि में विगलित हो जाता हूँ।

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मृगतृष्णा

जिंदगी की अड़चनों से शूलसिंचित धड़कनों से मुझसे तुमको मिला न पाई उन अपरिमित अनबनों से वेदना के करुण स्वर का भार लेकर क्या करूँ। ब... Read more