Rekha Mohan

Joined August 2019

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उन्वान – # बंदिश #

पापा मेरे जीवन का तेरे जीवन से मेल नहीं तुम स्वतन्त्र स्वछन्द जीते मेल- जोल सही. ठण्डी हवा सादगी भरा जीवन सदा ही जिया आज हर पल बं... Read more

विषय.... बाल कथा

"ईमानदारी का इनाम" रोहन के सात वर्षीय बेटा अगम दूसरी कक्षा मैं अव्वल आया और रोहन तनख्वाह मिली तो बेटे को कहा, “अगम, तुम बाज़ार चलो... Read more

लघुकथा ‘कल की आहट’

दीपक अपने दादाजी के साथ सलाना नतीज़ा लेने स्कूल गया| स्कूल में बच्चे अपना रिजल्ट कार्ड ले और नई किताबें कापियाँ ले बहुत खुश हो रहे थे... Read more

विधा-मुक्त छंद रचना.

साजन करवा चौथ आया है सोच खुशियां हजार लाया है अब हर सुहागन ने चांद से साजन थोडा सा रूप चुराया है जोड़ी मेरी तेरी कभी टूटे ना तुम और म... Read more

कविता –"जय जवान-जय किसान"

आज़ जन्मदिवस दो महानुभावो का करते नमन देश को प्रगति ओर बढ़ाया खिला सुंदर चमन. शास्त्री जी ने नारा जय जवान-जय किसान दिया कृषकों और ज... Read more

कविता –बापू गांधी

सुनते स्वतंत्रता संग्राम में बापू गांधी मुख्य नाम दिया हमें सबकुछ किया अंग्रेज़ मुक्त भारत धाम. जिसकी आत्मा थी महान,जपते सदा राम का... Read more

अम्बे भजन [गीत ]

आ माँ आ आये नवरात्रा तुम्हारे एक झलक को माँ यहाँ तरसते सारे. तेरे पायल की छम सुनके सारे आये गणपति आये रिदिः-सिदिः संग लाये. ... Read more

गज़ल

वज़्न--2122 1212 22(112) हक सुनाया असल दुहाई है सब भुला कर नज़र चुराई है| आस होकर मिली कही राहत बोझ में ले बसर भुलाई है | पढ़ सवक... Read more

श्राद्ध पर दोहे.

साथ छोड़ गए जग में, फिर श्राद्ध करें याद पितरोंका तर्पण से नर, ले सुख मन संवाद. खीर खाना फल पसंद, जमाया सभी प्यार कागा भी देखा करा... Read more

गज़ल

हिन्दी भी रियायत ले आदत सी जरूरत हो हिंदी से मुहब्बत हो हिंदी की इबादत हो. ले संगत महारत की शोहरत सी दावत हो हिन्दी में लिखावट की... Read more

लघुकथा -विश्वाश और समपर्ण

बच्चों !’आप ठीक से बैठो बिल्कुल सीधी नजर और पूरा ध्यान मेरी आवाज़ और अपनी सोच पर हो’, कहती हरलीन कक्षा मे कहानी पढा रही थी | आज अध्या... Read more

शिक्षक और शिक्षार्थी

शिक्षक और शिक्षार्थी दीपक की तरह जलना होता गुरु ज्ञान की लों फैलाने को न स्वार्थ न द्बेष न भय बस ले परवाह चलना होता. उसे चाहिए,... Read more

प्रार्थना

सुवह का समय गणेश प्रभु का ध्यान धरों मंगलकारी सदा परोपकारी हरते पीड़ा भारी। प्रभु तो गौरा सुत भोले के लाल है दुःख हारी अपनी महिमा ... Read more

कविता –बढई,कारीगर

बढई भी सृजनकर्ता सामान बनाता है कारीगरी में अपने नव स्वप्न लाता है. हाथों में हुनर धर्ता पूर्वजों का पेशा है अनुभवी उत्थान में रं... Read more

लघुकथा –ओस से कतरे

वनवारी बाबु रात भर गर्मी मौसम में घुटनों के दर्द और खाँसी की वजह ठीक से सो भी नही पाये थे|सुवह सामने पार्क में खेलते बच्चों की आवाज़ ... Read more

गज़ल

वज़्न-- 212 212 212 उम्र कटी गम पहर देखते काश मेरा सफ़र देखते. बैठी कहीं मुस्कुरा सोचती बात पाया सा ठहर देखते. याद हिचकी सुबह स... Read more

गज़ल

गज़ल मुमकिन नहीं जवाब हर एक सवाल का गम जिंदगी ना कर अगर ये हल नहीं होते. मायूस न हो ग़र मिले नाकामियां कभी ऎसा हे कि सब खा़ब्ब ... Read more

लघुकथा -अंतर्मन

लघुकथा -अंतर्मन मंत्रीजी विकास के घर मुशायरा था| सभी नामवर कवियों और शायरों के बारे में मंत्रीजी को बताया गया, क्योंकि मंत्रीजी कव... Read more