rekha rani

Joined January 2017

मैं रेखा रानी एक शिक्षिका हूँ। मै उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ1 मे अपने ब्लॉक में मंत्री भी हूँ। मेरे दो प्यारे फूल (बच्चे) ,एक बाग़वान् अर्थात मेरे पति जो प्रतिपल मेरे साथ रहते हैं। मेरा शौक कविताये ,भजन,लेखन ,गायन, और प्रत्येक गतिविधि मे मुख्य भूमिका निभाना। मेरी उक्ति है कौन सो काज कठिन जगमाहि जो नही होत रेखा तुम पाही। आर्थात जो ठाना वो करना है। गृ हस्थ मे कविताएं न प्रकाशित कर पाईं

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ख़तम न हो इंतजार -

हर पल हर घड़ी इंतजार रहे ,,ता उम्र यह बरकरार रहे। काश दुःख की घड़ियां बीत जाएं ,खुशी के इंतज़ार में। जुदाई महसूस न हो मिलन के इन्त... Read more

२५ वीं वर्षगांठ गृहस्थ जीवन की

rekha rani गीत May 22, 2019
साथ रहेंगे सात जन्म तक ,वादा रहा यह अपना,। बांधी तुम संग प्रीत की डोरी,याद आ रहा वह सपना। याद है सारे स्वर्णिम पल ... Read more

दोस्ती अंधेरों से कर चुकी हूं मै -

लोग तोड़ देते हैं दम , मात्र एक शब्द कहने भर से। छोड़ देते हैं साथ क़दम, मात्र एक ठोकर लगने भर से। आहें... Read more

मिलन नव वर्ष

💐💐💐💐💐💐💐🌹🌹🌹❣❣❣❣❣ भोर हुई तो कलैंडर की तिथि बदल गई।😄😄😄😄😄😄😄😄😄😄 देखते -देखते खूबसूरत सांझ बीते कल में ढल गई। 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 क्या तुमने ... Read more

साक्षरता

नफ़रत ,गुरवत और अशिक्षा शत्रु हैं इंसान के।💐💐💐 चलो आज सब दीप जलाएं प्रेम और सद्ज्ञान के।💐💐💐💐 बिन शिक्षा जीवन अंधियारा, ज्ञान दी... Read more

खुशियों के इंतजार में

rekha rani गीत May 13, 2018
खुशियों के इंतजार में खुशियां चली गयीं। चंद लम्हों की तलाश में, उम्र ही चली गयी। बचपन में सोचती रही, जल्दी बड़ी बनूं, पैसे कमाऊं ... Read more

मां

rekha rani गीत May 13, 2018
बहुत याद आती है ए मां तुम्हारी। भले दूर हूं पर हूं धड़कन तुम्हारी। बहुत पढ चुकी हूं मगर कम पढ़ी हूं। अवर्णनीय है मां महिमा तुम्हा... Read more

चाँद की रजाई

आज यह बादल क्यों फट गया गरीब की रजाई की तरह। या फिर किसी पांव में फटी बिबाई की तरह। इस फटी रजाई में तन छुपाता है शशि। इस में ही म... Read more

23 वीं वर्षगांठ

rekha rani गीत May 19, 2017
दीपक बाति बनकर हम तुम घर -मन्दिर को प्रकाशित करेंगे। तुम दीपक में प्रेम का घृत बन,बाति बन मैँ समर्पण करेंगे। जब तक स्नेह का घृत ह... Read more

गृहस्थ मंदिर की पुजारिन

आँ खों की उदासी न दिखा किसी को क्योंकि यह कमजोरी को बयां करती है। तेरी आँ खों की चमक में कामयाबी झलकती है । माना मैंने कि बचपन ख... Read more

मां

rekha rani गीत May 14, 2017
प्रथम वन्दना मां है ,मां की आरती उतारें। मां के चरणों में रहकर हम अपना जन्म गुजारें। मां देती है मीठी लोरी हमको रोज सुलाने को। मी... Read more

शहीद का सिर

शत्रु ने बर्बरता से सैनिक का सिर जब काट लिया। कटे हुए सिर ने फौरन शत्रु का षड्यंत्र भांप लिया। शेष शरीर से बोला सिर यह मेरे भरोसे ... Read more

हर लम्हा खास है

मेरे दोस्त ज़िंदगी का हर लम्हा खास है। तू हर पल इस तरह जी बस यही पल तेरे पास है। बीता कल तो सिर्फ़ तुझको दर्द देकर जाएगा। सिसकियाँ ... Read more

ख्वाइशें

इसका उत्तर मेरे अंदाज़ मे ख्वाहिशें अपनी सभी साथ पूरी कर ए दिल , क्या खबर तुझको कभी ऐसा मौका मिले न मिले। अगला लम्हा कैसा गुज़रे क... Read more

हमसफ़र

बचा जिंदगी का जो भी सफर है इसे साथ मिलकर तय करना पड़ेगा। मेरे देव राहों मे थके जो कदम तो तुम्हे पहले मुझको पकड़ना पड़ेगा। तुम्हारी खु... Read more

मगरूर बादल

बादलों का नृप है अम्बर,डरता रहता बादल अक्सर। किन्तु कभी वह पवन के सहारे,बिना पूछे नभ से बिना ही बिचारे। यूहीं मौज मस्ती में आँचल प... Read more

आवारा बादल

कहाँ उड़ चले, कहाँ उड़ चले, आवारा बादल कहाँ उड़ चले। लगता है बादल हुए आज पागल , उन्हें न खबर वे कहाँ उड़ चले। पुरवा हवा है यही जानती... Read more

मेरा स्थानांतरण

मन मे लागी है लगन फिर खिलाना है चमन। मन तू होना न उदास मन कल तो न कभी होगा तेरा अपना । बिता कल तू दे भुला जैसे मीठा सपना। मधु स्व... Read more

बसंत पञ्चमी

नू तन वस्त्र धरा ने धारे सज गईं सभी दिशाएं धुंधली दिशाएं ओझल हुई अब विकसा रवि मुस्काए। आज प्रफुल्लित हो सारे मिलकर बसंत मनाएं। ... Read more

लिंकन के पत्र का काव्यरूपांतरण

सब जन जग मे न्यायी नहीं हैं और नही सब सच्चे होते। किन्तु उसे है यह सिखलाना मार्ग सत्य का है दिखलाना। दुष्टों क प्रतिरोध की ख़ातिर ... Read more

महा पर्व मतदान

rekha rani गीत Jan 18, 2017
मेरा देश बन रहा तू काम कर रहा है। चल काम छोड़ सारे मतदान करले प्यारे। मेरा देश बन रहा है तू काम कर रहा है। मतदान है जरूरी समझा ... Read more

जब बेटियां हमारी हमें छोड़ जाती हैं (विदाई).

rekha rani गीत Jan 14, 2017
नम हो जाती हैं ऑखें भर आती हैं जब बेटियां हमारी हमे छोड़ जाती हैं बचपन में बेटी को जी भर दुलराते हैं बाहों में झुलाते हैं कांधे... Read more