Rekha Rani

Joined September 2016

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नारी -शक्ति

हे नारी क्षुद्र नदियाँ नहीं हो तुम,, तुम हो अथाह,,अगाध जलनिधि नयन-वारि की,,, कभी चिरनिद्रा सी शाँत,गंभीर,, ज्वार-भाटे नित उ... Read more

शिकायतें

ख़फ़गी से भरी नहीं लगतीं शिकायतें उनकी, तंज करती सी नहीं लगतीं शिकायतें उनकी, शहद सी मिठास दावतों का इल्तिजाई लहजा, आदाब में झुकी स... Read more

घर

जला कर ग़ैरों के घर ख़ुश होते थे बहुत ही, बिजली ने जलाया घर तो जानाकि घर क्या है Read more

रब की रहमत

रंग औ नूर जो,बरसा है रब के दर से, रंग औ नूर वो,न मिला दुनिया के घर से, बराबर बराबर ,बाँट सब में वही रेखा , कोई नहीं कहीं,रब की रह... Read more

जीत

इक लंबा अरसा बीत गया, यादों का बादल रीत गया, बाजी थी उनको पाने की, रेखा रक़ीब ही जीत गया। Read more