Rekha Drolia

Kolkata

Joined September 2020

दिल से दिलों तक पहुँचने हेतु
बाँध रही हूँ स्नेह शब्दों के सेतु।

मैं एक गृहिणी हूँ जिसने पचपन साल की उम्र में कविता लिखना आरम्भ किया है।शब्दों में खोकर ख़ुद को ढूँढ रही हूँ। अपनी पहचान बना रही हूँ।

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ख़्वाहिशें

ख़्वाहिशें ख़्वाहिशें बड़ी अजीब होती है हुज़ूर बेपरवाह, ज़िद्दी,हठ से भरपूर रोज़ चली आती है,कैसा फ़ितूर नामुमकिन उतरना इनका... Read more

कानन

कानन (वन,जंगल ) जंगल वन उपवन कानन धरा सुसज्जित इन आभूषण लिपटे धरती से ज्यूँ भीगी लट धारण धरणी को हरियला पट जीव जन्त... Read more

मन रे..तू धीरज धर!

मन रे .. तू धीरज धर! क्षण, प्रति़क्षण एक आस बेताब अरमानों की प्यास सब कुछ तो है पास फिर निरंतर किसकी तलाश मन रे .. तू धी... Read more

वदन

शब्दों के बाण,साध के तान जो छूट गए, न लौट पाएंगे तीर कब लौटी कमान बोल बिछाते निज बिसात कटु मृदु वदन की चाल संभलकर करना चयन ... Read more

मैं..

मैं.. मैं सही तुम ग़लत ज़िंदगी हार गए इस होड़ में फ़क़त मैं बेहतर तू कम कब टूटेगा तेरा ये भ्रम मैं बड़ा तुम छोटे सोच के य... Read more

चल पड़े ..

आज की मेरी रचना समर्पित है उन प्रवासी मज़दूरों को जिनकी ज़िंदगी करोना और लाक्डाउन के बीच पिस गयी। उनकी हृदय द्रवित पीड़ा और व्यथा को... Read more

मेरी कविता ...

मेरी कविता.. यूँ ही नहीं लिख दिए शब्द दो चार मेरी कविता नहीं शब्दों का व्यापार शब्दों को भावनाओं में है घोला पंक्तियों मे... Read more

मैं औरत हूँ

मैं औरत हूँ रेशम सी मुलायम कभी मोह के धागों में लिपटी मख़मल सी नरम कभी लजायी बाहों में सिमटी पानी सी सरल कभी जिधर कहो बह ... Read more

हिंदी दिवस

#हिंदी दिवस १.हिंद की भाषा हिंदी हिंद का अभिमान हिंदी हिंद का गर्व हिंदी हिंद का सम्मान हिंदी हिंद का दिल हिंदी हिंद की... Read more

सुंदरता

सुंदरता तुम बहुत सुंदर हो क्या यही मेरी पहचान इसमें मेरा क्या योगदान क्यों नहीं दिखती तुम्हें मेरी अस्तित्व की लड़ाई क... Read more