वाणिज्य कर विभाग उत्तर प्रदेश में लगभग 32 वर्षों से कुछ अधिक समय तक सेवारत होने के उपरांत ज्वाईन्ट कमिश्नर वाणिज्य कर के पद से सेवानिवृत्त ,जीवन के इस पड़ाव तक तमाम चढ़ाव उतार से गुजरने के बाद प्राप्त हुई सुखद दुखद अनुभूतियों एवं सच्चाइयों को कविताओं के माध्यम से लोगों तक संप्रेषित करना, साझा करना,पहुंचना …झझकोरना….एक सोच, दृष्टि, सृजन, मनन , पढ़ना, समझना, जानना… गरीब-गुरबा .. गांव-शहर …देश प्रेम … प्यार- पैगाम…आस्था-व्यवस्था.. सत-असत… सत्ता -सिंहासन.. और ऐसा ही बहुत कछ…। यही सब कुछ बहुत अन्दर तक हृदय को स्पर्श करता रहता है और ‘कुछ न कुछ ‘ लिखने को प्रेरित भी करता रहता है । मेरी रचनाओं के लिए “विश्व हिन्दी रचनाकार मंच” द्वारा मुझे “श्रेष्ठ रचनाकार सम्मान”, “हिन्दी सागर सम्मान”, “प्रतिभाशाली रचनाकार सम्मान” एवं “अटल साहित्य गौरव सम्मान”से सम्मानित किया गया है !

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दुश्मन जो देश के है घुटनों के बल चलें

सेना के इस शौर्य का हम तो नमन करें धूल, वीरों के पैर की मस्तकों पे हम धरें ये निकले जिधर से भी पृथ्वी वहां हिलें दुश्मन जो ... Read more

तू मेरा मारुति नंदन है...

अभिनंदन तेरा अभिनंदन, तू मेरा यशोदा नंदन है । बार-बार तुमको वंदन, तू मेरा मारूति नंदन है । जला दिया सोने की लंका, मचा... Read more

कुछ हो गए उदास हैं

/////////कुछ हो गए उदास हैं //////// ***************************** इस देश की जनता इस लिए महान है सारे सितम सहे नहीं खुलती जुब... Read more

/////लोकतंत्र/////

हमने बनाया लोकतंत्र इतना महान है प्रज्ञा जहां न पा सकी अपना स्थान है बगुले भी चल रहें तो हंसों की चाल है ये लोकतंत्र का बड़... Read more

वो संख्या में चंद हैं

की पते की बात तब कहने का ढंग है बांट दी खुशियां तभी होली का रंग है जब आएं मस्तियां तो मौसम बसंत है पड़ती फुहारों में अठखेलि... Read more

सड़क का संघर्ष अब संसद में दिखा

सड़क का संघर्ष संसद में दिखा बेबसी संसद की ये अच्छी लगी सवालों में घिरा औचित्य इसका ये सोचने को विवश करने लगी *** काग... Read more

अटल एक युगदृष्टा

/////////अटल एक युगदृष्टा///////// *********************** तीखा व्यंग सरल भाषा में वो कहते सब सम्मोहित हो जाते ऐसे वक्ता थ... Read more

क्षणिकाएं: नेता

////नेता//// ********* (1) मेरा ही तो मुझको देता करता कुछ अहसान नहीं क्यों नेता की निष्ठाओं पर उठता कोई ... Read more

"मां" जो तुम में हैं ...

मैं भर झोलियां मां की यादों को लाया हूं कुछ यहां से लाया कुछ वहां से लाया हूं ढेर नादानियां कर के उस को सताया हूं न जाने बा... Read more

ये आदमी सड़क पर...

जोड़ा घटाया और खड़ा कर दिया फिर से ये झूठ का किला ढह गया क्या होना था और ये क्या हो गया ये आदमी सड़क पर क्यों मर गया ***... Read more

वो मुस्कराता ही नहीं ...

उसको तो जमीं मुझे आसमान भाता नहीं क्यों इन दूरियों को कोई समझ पाता नहीं *** मेरी छत पे अब कभी भी चांद आता नहीं वो भी भयभ... Read more

वो राजनीति हो गई

प्रेम करूं जिससे वो आरक्षण सी मचल गई साथ रही कभी मेरे कभी विपक्ष के संग गई *** वो रोती और बिलखती हिरनी सी उछल गई होकर फ़... Read more

उसकी आंखों में

मेरी हाथों की रेखा में जो-जो लिखा था मुझे उसकी आंखों में वो सारा दिखा था उसकी आंखों में पूरा एक मेला लगा था उसके अ... Read more

बादल भी क्या पागल हुए

शिकवा शिकायत ‌इन बादलों से रही कहीं बरस के कहीं गरज के चले गए हुए कहीं-कहीं वो रिमझिम रिमझिम कहीं-कहीं तो बूंद-बूंद को तरस ... Read more

हर कोई मुझमें

हर कोई मुझमें कुछ न कुछ ढ़ूढ़ता ही रहा सकून इतना कहां से पाया पूछता ही रहा *** तुमसे हर बात में हमेशा मैं हार जाता रहा ज... Read more

मैं क्या-क्या भूलूं

मैं क्या -क्या भूलूं क्या-क्या याद करूं किस-किस से क्या-क्या फरियाद करुं *** उन्नति उत्कृष्ठों पे मीठा सा संवाद करूं या ... Read more

वो किधर से गए?

वो इधर से आए व उधर से गए ढ़ूढ़ते रह गए वो किधर से गए ? आए बनाने और बिगड़ कर गए साथ अपने दो-चार लेकर गए *** उनके जाते ... Read more

सुबह-शाम

सुबह -शाम कभी-कभी तुम्हारे चेहरे को पढ़ लेता हूं भाव भंगिमाओं में तुमको ढ़ूढ़ने का प्रयास कर लेता हूं और अन्ततः... Read more

हो गए तुम सत्ता

सिलसिला वर्षों से पुराना रहा कहानी की तरह मैं कहता रहा तुम तूफ़ानों की तरह तो आए पेड़ों सा झुकता मैं टूटता रहा *** कु... Read more

वो सियासत के हो गए

अब मेरे आंसू भी तो मुझसे बेवफा हो गए हैं जिस पे मैं फिदा था उसी पर फिदा हो गए हैं *** मेरी बगावत के सुर अचानक से बदल गए हैं... Read more

मेरी इस बस्ती के सभी घर

है थका मजबूर जिनका पथ सुगम दूर हो कुछ पल तो साथ उनके भी बिताया करो *** माना तुम हिमालय से भी ऊंचे शिखर हो समन्दर की गहराइय... Read more

आंख से ही इशारा करो

जब तुम्हारी गली से सुबह -शाम निकलूं मुझे एक बार नजरें उठाकर निहारा करो *** तुम्हारे बोलने पर पहरा पर पहरा लगा है बोलकर न... Read more

कभी-कभी

कभी -कभी तुम्हारा चेहरा भी पढ़ लेता हूं तुम्हारे अंदर के भाव सागर सा बहे नदी सा मैं भी मिल लेता हूं और मैं भी त... Read more

जय-जय भारत हो

दिल से कहो एक बार यह देश मुबारक हो हम सब भारतवासी है जय-जय भारत हो *** आचार विचार सही रखे न हानिकारक हो तुम सदा बनो संयम... Read more

चूड़ियां सिन्दूर पिता हैं

मेरी अम्मा की चूड़ियां सिन्दूर पिता हैं उनके सोच में रहते हर दस्तूर पिता हैं अम्मा का रोना-धोना व वजूद पिता हैं उनकी हर बात... Read more

सुबह-सुबह

सुबह-सुबह किसी अजनबी से मैं मिल लेता हूं कभी-कभी उसका भी चेहरा पढ़ लेता हूं उसके चेहरे पर चांदनी सी फैली हुई ... Read more

कभी-कभी

कभी-कभी तुम्हारा चेहरा भी पढ़ लेता हूं मन को ऐसा लगा कि आसमान छू लेता हूं एक पल ही सही मैं भी तो पहाड़ हो ले... Read more

जहां में हर किसी को

रहता मेरा खजाना भरा जिसे खर्च करता कहां ज़हां में हर किसी को सारा इतना मिलता कहां *** चाहत पे शक था उसे इधर-उधर भटकाता रहा ... Read more

उच्चतम हो गए हो

मेरे जीवन में जब से तो तुम आ गए हो रिक्त आकाश घने बादल सा छा गए हो बरस सावन की फुहारों सा तुम गए हो हृदय के अन्दर हरियाली स... Read more

मैं तो प्रकृति हूं

पहिचानिए मुझको सभी मैं तो प्रकृति हूं मैं ही सबका जीवन और सबकी मृत्यु हूं राग द्वेष मोह माया सभी से मैं उन्मुक्त हूं इस अनन... Read more

उम्मीदें ही काफी रही

अपेक्षाएं नहीं किसी से कुछ भी पाने के लिए उम्मीदें ही काफी रही उमर बीत जाने के लिए *** वो तो आए सुबह-सुबह केवल बताने के लिए... Read more

मैं तो प्रकृति हूं

मैं सब में हूं सबकी हूं सबको समर्पित हूं प्रभु की अनमोल सौगात मैं तो प्रकृति हूं *** अकूत अनगिनत वरदानों से अलंकृत हूं म... Read more

न दुआएं असर करती दिखी

न दुआएं असर करती दिखी अब बुजुर्गों की न चाहत रही तो किसी को पुराने तजुर्बों की ** नहीं रहीं जरुरत छाया फलों से लदें पेड़ों की... Read more

न थकी हूं मैं नदी हूं

मैं इस शहर की इकलौती नदी हूं न साल दो साल एक पूरी सदी हूं चेहरों पर थिरकती रहती हंसी हूं शहर की तो सबसे बड़ी खुशी हूं **... Read more

कविता: तुम्हें तो याद करता

तुम्हें तो याद करता अपना ईश मानकर है जिसने रखा मेरी यादों को संभालकर जब थक गया था बियाबानों में भागकर लौटाया सही राहों पे म... Read more

मां की यादों को लाया हूं

झोला भर कर मां की यादों को लाया हूं तोहफा अनमोल दिल से इन्हें लगाया हूं उन्हें अनजाने में शैतानियां से सताया हूं नादानियों ... Read more

जब जब लिखता तेरा नाम

पुंज प्रकाश हृदय में भरता जब जब लिखता तेरा नाम रोम रोम पुलकित हो जाता चित पाता है अबिरल विराम *** है नाच उठा मन मयूर ... Read more

न दुआएं असर करती दिखी

न दुआएं असर करती दिखी अब बुजुर्गों की न चाहत रही तो किसी को पुराने तजुर्बों की ** नहीं रहीं जरुरत छाया फलों से लदें पेड़ों की... Read more

मेरे शहर की सड़क

मेरी शहर की सड़क को क्या हो गया जिसे देखो वही इस पर फिदा हो गया है हरजाई सा इसका स्वाभाव हो गया जिसको भी अच्छी लगी संग सो ग... Read more

मां के आंचल को ओढ़ना

सीखा तुम्हीं से दूसरों के सुखों को सहेजना अपने हिस्से में केवल दुःख दर्दों को बांटना तुम्हें सहज था मेरी हर जरूरत को जानना ... Read more