Bhupendra Rawat

उत्तराखंड अल्मोड़ा

Joined January 2017

M.a, B.ed
शौकीन- लिखना, पढ़ना
हर्फ़ों से खेलने की आदत हो गयी है
पन्नो को जज़बातों की स्याही से रँगने की अब बगावत हो गईं है ।

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कहने को है बहुत कुछ शब्दों के बाज़ार में

कहने को है बहुत कुछ शब्दों के बाज़ार में लेकिन कुछ क्षण मौन रह तुझे देखना चाहता हूँ,मैं थक सा गया हूँ,रोशन आफताब की तपीश में तेरी... Read more

बस गयी हो मेरी रूह में तुम

बस गयी हो मेरी रूह में तुम कुछ इस तरह जिस तरह नदियों का बहता नीर समा जाता है,समुन्द्र में समुन्द्र का नीर महासागरों में ... Read more

बहुत देखे किरदार ज़िन्दगी की किताबों में

बहुत देखे किरदार ज़िन्दगी की किताबों में मग़र मुझे तुम सा कोई नजर नही आया देखा तुम्हें जितनी बार मैने अपने नजरिए से उतनी बार अलग अ... Read more

कहने को है बहुत कुछ शब्दों के बाज़ार में

कहने को है बहुत कुछ शब्दों के बाज़ार में लेकिन कुछ क्षण मौन रह तुझे देखना चाहता हूँ,मैं थक सा गया हूँ,रोशन आफताब की तपीश में तेरी... Read more

रिश्ते निभाए तूने दिल-ओ-जान से

रिश्ते निभाए तूने दिल-ओ-जान से वही छोड़ चल बसे तुझे इस जहाँ से कल तक मजबूत नींव थी जिस इमारत की नींव ही नेस्तनाबूद कर गए इस मकाँ... Read more

जिनके पांव में छाले है वो इतिहास बनाने वाले है

जिनके पांव में छाले है वो इतिहास बनाने वाले है देखकर मौन हुआ है जो वो सत्ता के रखवाले है आलीशान बंगलो में बैठ करते है चर्चा वो ... Read more

चोट खाये हुए मज़दूर घर को लौट आये मज़दूर

चोट खाये हुए मज़दूर घर को लौट आये मज़दूर चिलचिलाती धूप से कहां,कब घबराये मज़दूर रोटी की तलाश में घर बचाने की आस में थोड़ा सा घबराये... Read more

तेरे संग गुज़ारे लम्हों का सवाल है

तेरे संग गुज़ारे लम्हों का सवाल है वक़्त के गुज़र जाने का मलाल है खो गए है वो हंसी लम्हें कहीं उन्हीं पलों का आया फिर से ख्याल है ... Read more

कहां तलक ख़्वाब तेरे मुझे ले जायेंगे

कहां तलक ख़्वाब तेरे मुझे ले जायेंगे तन्हा सफर में कदम और कहां जायेंगे भटक जायेंगे मंज़िल की राह से जब भी ग़म मिटाने मयखाने की ओर ... Read more

नीली स्याह के निशां थोड़े धुंधले पड़े है

नीली स्याह के निशां थोड़े धुंधले पड़े है ज़िन्दगी का बोझ तले मजदूर शहर छोड़ चले है जारी इस शतरंज के खेल में मजदूर एक बार फिर से छल... Read more

मासूमियत से भरे नादान सवाल

माँ माँ भगवान क्या होते है? माँ थोड़ा मुस्कुराते हुए अपने बेटे को कहती है बेटा जिनकी हम पूजा करते है,लेकिन माँ वो तो पत्थर होते है। त... Read more

भूख मिटाने कुछ लोग, गांव छोड़ शहर की ओर आये थे

गांव छोड़ भूख मिटाने कुछ लोग,शहर की ओर आये थे दो वक्त की रोटी के खातिर शहरी रीति रिवाज अपनाये थे मालूम हुआ मज़दूरों को खाने कोरोना... Read more

जरा सी जेब भारी हुई लोगों के तेवर बदल गए

जरा सी जेब भारी हुई लोगों के तेवर बदल गए बदलते रिश्तों के साथ जीने के ढंग बदल गए आज इंसान इंसानियत को तलाश रहा बदलते मौसम के जैस... Read more

लोगों के रंग बदल जाते है

लोगों के रंग बदल जाते है जीने के ढंग बदल जाते है बदलते है मौसम के अंदाज़ जैसे वैसे लोगों के मन बदल जाते है सारे वादें टूट जाते ... Read more

ज़िंदा हूँ मगर लाश पड़ी है सड़क किनारे

ज़िंदा हूँ मगर लाश पड़ी है सड़क किनारे देख रहे है मंज़र सब आने जाने वाले बिलख बिलख कर रो रहे,अपने चाहने वाले फब्तियां कस रहे है आज सब... Read more

आलीशान बंगलो में बैठे मजदूर नीति के निर्माणकर्ता

कोरोना महामारी जैसी संकट की स्थिति में आलीशान बंगले में बैठकर मजदूरों की समस्याओं पर व्यख्यान करने वाले समस्त विपक्ष के नेताओ का प्र... Read more

स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात शिक्षा का स्तर

स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात शिक्षा के गिरते हुए स्तर में सुधार लाने के लिए सत्ताधीश सरकार द्वारा समय समय पर कई प्रयास किये गए । शि... Read more

विद्यालय एक पूंजीवादी संस्था

समाज के अशिक्षित वर्ग को शिक्षित करने के उद्देश्य से खोली गई समाजिक संस्थाओं का एकमात्र उद्देश्य आज अधिक से अधिक लाभ कमाने तक सीमित ... Read more

चालीस दिन के रोज़े में, तरस गया पीने वाला

चालीस दिन के रोज़े में, तरस गया पीने वाला बस एक दिन और शेष रहा कल से खुलेगी मधुशाला सरकार के निर्देशों का पालन करेगा हर कोई पीने ... Read more

तेरे नाम की एक शाम और ढल गयी

तेरे नाम की एक शाम और ढल गयी इंतेज़ार के तन्हा सफर में तू छल गयी इंतेज़ार के ज़िंदा लम्हों में अब शेष मायूसी है तेरे इंतेज़ार में ज़ि... Read more

ये गलती गिनाने का वक़्त नही है

ये गलती गिनाने का वक़्त नही है रूठ कर चले जाने का वक़्त नही है माना वक़्त थोड़ा नाराज है,मुझसे ये नाराज़गी जताने के वक़्त नही है भूप... Read more

ज़िंदा तो हूँ फ़क़त चंद सांसे बची है

ज़िंदा तो हूँ फ़क़त चंद सांसे बच रखी है तेरे नाम की छोटी सी खुशी रखी है मर जाता बेवज़ह,ज़हन में ख्याल आया मेरी चंद सांसे तेरे पास गिरब... Read more

भूल चुके है लोग रिश्ते निभाना

भूल चुके है लोग रिश्ते निभाना बात बात पर आता है,रूठ जाना होता नही सहन कुछ भी,उनसे आ गया हर बात में ताने सुनाना भूपेंद्र रावत ... Read more

हंसता हूँ,हँसाता हूँ मन सबका बहलाता हूँ

हंसता हूँ,हँसाता हूँ मन सबका बहलाता हूँ ढीला, ढाला पैजामा पहन झूम झूम कर आता हूँ हाथ पर आग गोले लेकर उछल पार कर जाता हूँ बन्द थैल... Read more

माता पिता का करो सम्मान माता पिता है हमारे भगवान

माता पिता का करो सम्मान माता पिता है हमारे भगवान अगर माता पिता न होते तो इस दुनिया में हम कैसे आ पाते माता पिता ही तो हमको ज... Read more

आसान नही तेरे बिन ज़िन्दगी

आसान नही तेरे बिन ज़िन्दगी तेरा होना हर मुश्किल आसान कर देता है नशा ही तो है, आगोश में तेरे जहां की हर परेशानी को दूर कर देता है ... Read more

शांति स्थापित करने के लिए लोग चुनते है

शांति स्थापित करने के लिए लोग चुनते है, युद्ध, और खड़ी कर देते है मशीन गिरा देते है, स्तम्भ बिछा देते है लाश,बना देते है श्मशान फ... Read more

माँ में भी उस चिड़िया के भांति नील गगन में उड़ना चाहता हूँ ।

माँ में भी उस चिड़िया के भांति नील गगन में उड़ना चाहता हूँ । दूर क्षितिज को छू आसमा का भ्रमण करना चाहता हूँ । बिना किसी भेद भाव ... Read more

मुद्दतों बाद तेरा ख्याल फिर से आया है

मुद्दतों बाद तेरा ख्याल फिर से आया है तेरी यादों ने एक लम्हा और सजाया है अब तेरी यादें ही तो बस ज़ीने का बहाना है तेरी झील सी आंख... Read more

लॉकडाउन 3.0 सोशल डिस्टेंसइंग की धज्जियां उड़ाती सरकारी नीतियां

लेख ........ कोरोना की मार झेल रहे सभी देशों ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई के लिए अपनी रणनीतिया तैयार करने के साथ ही अब उन रणनीतियों को... Read more

कोरोना की जंग तो नही लेकिन

कोरोना की जंग तो नही लेकिन भूख और जीवन के बीच दो वक्त की रोटी की जंग आज नही तो कल मार ही डालेंगी भूख की लड़ाई है जीवन से सं... Read more

शब्दों के बाज़ार में मौन रहना भला है

शब्दों के बाज़ार में मौन रहना भला है खामोश रहकर सब कुछ कहना एक कला है शब्दों को मरहमों का लेप लगाना आता है ज़िन्दगी जीने का यही अच... Read more

सफ़र ज़िन्दगी का रुक ही गया

सफ़र ज़िन्दगी का रुक ही गया मन्ज़िल का सफ़र अधूरा छूट ही गया ज़िद्द थी,जीने की और तुझे ऐ ज़िन्दगी मग़र मौत के आगे आखिर झुक ही गया भूप... Read more

क्या पता था लोगों के रंग बदल जायेंगे

क्या पता था लोगों के रंग बदल जायेंगे आस्तीन के साँप बाहर निकल कर आयेंगे झूठ ही तो सहारा था सच को छुपा लेने का मंझधार की डूबती कश्... Read more

न पूछ मुझसे मेरी ख्वाइश-ए-ज़िन्दगी

न पूछ मुझसे मेरी ख्वाइश-ए-ज़िन्दगी हर एक ख्वाइश आज मोहताज है ज़ी तो रहे है,फ़क़त तेरी खुशी के लिए जिस्त-ओ-जिस्म में कहां बची अब सांस ... Read more

बहुत खुश थे ज़िन्दगी को पाकर

बहुत खुश थे ज़िन्दगी को पाकर हंसते हंसते हर ग़म को गले लगाया था बेखबर थे जिन्दगी असलियत से तेरी अपनो के शहर में अज़नबी से दिल लगाया... Read more

किताब के पन्नो में रूठा हुआ मिला मुझे वो शख़्स

किताब के पन्नो में रूठा हुआ मिला मुझे वो शख़्स जो मुरझा गया है दफ़न किताब के पन्नो के साथ वही मोती, वही एहसास जो खटखटा रहें है,द्व... Read more

सारे दरवाज़े बन्द कर दिए वापस आने के

सारे दरवाज़े बन्द कर दिए वापस आने के रिश्ते सारे तोड़ लिए इस ज़माने से फ़क़त एक मर्ज़ ही तो था इलाज़ हो जाता क्या मिला तुम्हे रूठ कर जान... Read more

ख्वाइशें जीने कहां देती है

ख्वाइशें जीने कहां देती है गर बिछड़ना भी चाहो,तो मरने कहां देती है उम्र कट जाती है,ख्वाइशों के बोझ तले अधूरी ख्वाइशें सजा-ए-मौत सु... Read more

तुम्हारा इंतेज़ार है मुझको

तुम्हारा इंतेज़ार है मुझको तिल तिल करके मरने से प्यार है मुझको जब तक सांसे है निहार लेने दे तेरे दीदार का आज तक इंतेज़ार है मुझको ... Read more

इस तरह खुद को ज़ाया करते है

इस तरह खुद को ज़ाया करते है तड़पते है,और खुद को भिगाया करते है जीने की ये भी एक कला है,सीख लो गुज़रें लम्हों को याद कर यूं मन्द मन्द... Read more

ज़िन्दगी एक सफ़र में गुज़र जाती है

ज़िन्दगी एक सफ़र में गुज़र जाती है मन्ज़िल अंत तक अधूरी रह जाती है कोई खड़ा इंतेज़ार करता रहता है चोरी से आकर मौत गले लगाकर चले जाती है... Read more

आसमां करीब है मेरे

आसमां करीब है मेरे जुगनुओं से गुफ्तगू जारी है तुम भी आकर देखो जरा महफ़िल में, आज जुगनुओं की नही तुम्हारी बारी है। भूपेंद्र ... Read more

लोन ली हुई है ज़िन्दगी

लोन ली हुई है ज़िन्दगी अब किश्ते चुका रहा हूँ छोटी सी ज़िन्दगी है,साहब यूं ही बोझ तले गुज़ार रहा हूँ भूपेंद्र रावत 28।04।2020 Read more

मायज़ाल:ज़िन्दगी का कठोर सच

"तुम्हारी राह कब से देख रही थी।कहां रह गए थे ?आज तुमने आने में देर कर दी।तुम्हें मालूम नही घर पर भी कोई है जो तुम्हारा इंतज़ार करता ... Read more

दिल जीतने का कोई उपहार दो न

दिल जीतने का कोई उपहार दो न छूटी वाला फिर से कोई इतवार दो न कल तक हर पहर ख्यालों में क़रीब था फिर से क़रीब आ वही प्यार दो न दर... Read more

पुरानी कोई कहानी न पूछो

पुरानी कोई कहानी न पूछो उनकी दी हुई निशानी न पूछो आज भी तन्हा भटका है मुसाफ़िर तन्हा सफर की ज़िंदगानी न पूछो भूपेंद्र रावत 24।0... Read more

पता है डूब कर मर ही जाना है

पता है डूब कर मर ही जाना है फिर भी उस सफ़र पर जा रहा हूँ मैं जिस राह से तोड़ आया रिश्ता पुराना कदमों के निशान को खोजता जा रहा हूँ... Read more

फासलों से दूरी है मेरी

फासलों से दूरी है मेरी आज भी मोहब्बत अधूरी है मेरी खफ़ा तू जब से है वफ़ाओं से दूरी है मेरी भूपेंद्र रावत 25।04।2020 Read more

फुर्सत के लम्हे गुज़र जाया करते थे

फुर्सत के लम्हे गुज़र जाया करते थे आज उन्ही लम्हों को काटना दुश्वार हो रहा है तेरे संग गुज़ारे थे जो लम्हें हंसते हंसते आज उन्हीं ल... Read more