रवीन्द्र सिंह यादव

नई दिल्ली / इटावा (उत्तर प्रदेश )

Joined January 2017

हिन्दी कविता, कहानी,आलेख आदि लेखन 1988 से ज़ारी. आकाशवाणी ग्वालियर से 1992 से 2003 के बीच कविताओं, कहानियों एवं वार्ताओं का नियमित प्रसारण. नवभारत टाइम्स . कॉम पर ‘बूंद और समंदर’ अपना ब्लॉग. ब्लॉगर . कॉम पर
‘हिन्दी-आभा*भारत’ (http://www.hindi-abhabharat.com),

हमाराआकाश(https://hamaraakash.blogspot.com),

https://ravindrasinghyadav.wordpress.com ब्लॉग पर सक्रिय.

मेरे शब्द-स्वर (YouTube.com)

Books:
1. प्रिज़्म से निकले रंग (काव्य संग्रह- 2018 )
2. पंखुड़िया (24 लेखक एवं 24 कहानियाँ – 2018)
3. प्यारी बेटियाँ ( साहित्यपीडिया द्वारा प्रकाशित सामूहिक काव्य संग्रह -2018)

Awards:
साहित्यपीडिया काव्य सम्मान 2018

Copy link to share

माँ

माँ सृष्टि स्पंदन अनुभूति सप्त स्वर में गूँजता संगीत वट वृक्ष की छाँव। माँ आँसू ममता सम्वेदना गोद में ल... Read more

मी टू सैलाब ( वर्ण पिरामिड )

ये मी टू ले आया रज़ामंदी दोगलापन बीमार ज़ेहन मंज़र-ए-आम पे ! वो मर्द मासूम कैसे होगा छीनता हक़ कुचलता रूह ... Read more

पश्चाताप

एक दिन बातों-बातों में फूल और तितली झगड़ पड़े तमाशबीन भाँपने लगे माजरा खड़े-खड़े कोमल कुसुम की नैसर्गिक सुषमा में समाया ... Read more

मेहमान को जूते में परोसी मिठाई.....

समाचार आया है- "इज़राइली राजकीय भोज में जापानी प्रधानमंत्री को जूते में परोसी मिठाई!" ग़ज़ब है जूते को टेबल पर सजाने की ढिठाई... Read more

मूर्ति

सोचता हूँ गढ़ दूँ मैं भी अपनी मिट्टी की मूर्ति, ताकि होती रहे मेरे अहंकारी-सुख की क्षतिपूर्ति। मिट्टी-पानी का अनुपात ... Read more

होली की कथा

हमारी पौराणिक कथाऐं कहती हैं होली की कथा निष्ठुर , एक थे भक्त प्रह्लाद पिता जिनका हिरण्यकशिपु असुर। थी उनकी बुआ ह... Read more

शायद देखा नहीं उसने

चराग़-ए-आरज़ू जलाये रखना, उम्मीद आँधियों में बनाये रखना। अब क्या डरना हालात की तल्ख़ियों से, आ गया हमको... Read more

यादें

यादों का ये कैसा जाना-अनजाना सफ़र है, भरी फूल-ओ-ख़ार से आरज़ू की रहगुज़र है। रहनुमा हो जाता कोई, मिल जाते हैं हम-सफ़र, ... Read more

करवा चौथ

कार्तिक-कृष्णपक्ष चौथ का चाँद देखती हैं सुहागिनें आटा छलनी से.... उर्ध्व-क्षैतिज तारों के जाल से दिखता चाँद सुनाता है दो... Read more

अपनी अस्मिता क़ुर्बान करनी चाहिए थी ?

कुलपति साहब तो क्या उस छात्रा को संस्थान की अस्मिता के लिए अपनी अस्मिता क़ुर्बान करनी चाहिए थी ? बीएचयू के मुखिया को ऐसी ... Read more

खाता नम्बर

ग़ौर से देखो गुलशन में बयाबान का साया है , ज़ाहिर-सी बात है आज फ़ज़ा ने जताया है। इक दिन मदहोश हवाऐं कानों ... Read more

सरकारी बंद लिफ़ाफ़ा

एक एनजीओ की याचिका पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने भारत सरकार को आदेश दिया केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने कल 105... Read more

छम्मकछल्लो

ठाणे की एक अदालत का सराहनीय फ़ैसला आया है, महिला को "छम्मकछल्लो " कहना जुर्म ठहराया है। शब्द ,इशारे या किसी गतिविधि से महिला का... Read more

जिओ और जीने दो

ख़ुद जिओ अपने जियें, और काल-कवलित हो जायें। कितना नाज़ां / स्वार्थी और वहशी है तू , तेरे रिश्ते रिश्... Read more

भारत की बेटी और प्रधानमंत्री

भारत की एक त्रस्त बेटी ने मई 2002 में आख़िरी उम्मीद के साथ पितातुल्य देश के रहबर / प्रधानमंत्री को गुमनाम ... Read more

इकहत्तरवां स्वाधीनता-दिवस

अँग्रेज़ी हुक़ूमत के ग़ुलाम थे हम 15 अगस्त 1947 से पूर्व अपनी नागरिकता ब्रिटिश-इंडियन लिखते थे हम आज़ादी से पूर्व। ... Read more

बारिश फिर आ गयी

बारिश फिर आ गयी उनींदे सपनों को हलके -हलके छींटों ने जगा दिया ठंडी नम हवाओं ने खोलकर झरोखे धीरे से कुछ कानों में... Read more

ऐ हवा चल पहुँचा दे मेरी आवाज़ वहाँ

ताजमहल को देखते आगरा क़िले में क़ैद शाहजहां ने शायद ये भी सोचा होगा......... ( मुग़ल बादशाह औरंगज़ेब अपनी क्रूरता के... Read more

सिर्फ़ एक दिन नारी का सम्मान, शेष दिन ........ ?

8 मार्च अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मही अर्थात धरती , जिसे हिला कर रख दे वह है महिला। 8 मार्च संयुक्त राष्ट्र संघ ... Read more

ये कहाँ से आ गयी बहार है

ये कहाँ से आ गयी बहार है, बंद तो मेरी गली का द्वार है। ख़्वाहिशें टकरा के चूर हो गयीं, हसरतों का दर्द अभी उधार है। नफ़रतों... Read more

धीरे - धीरे ज़ख़्म सारे

धीरे - धीरे ज़ख़्म सारे अब भरने को आ गए , एक बेचारा दाग़ -ए -दिल है जिसको ग़म ही भा गए।... Read more

वागीश्वरी जयंती

जय हो वीणावादिनी जय हो ज्ञानदायिनी विद्या ,बुद्धि ,ज्ञान की देवी करो मेधा प्रखर वाग्देवी। माघ मास शुक... Read more

दोपहर बनकर अक्सर न आया करो

दोपहर बनकर अक्सर न आया करो। सुबह-शाम भी कभी बन जाया करो।। चिलचिलाती धूप में तपना है ज़रूरी। क... Read more

नेताजी सुभाष चंद्र बोस

(23 जनवरी जन्मदिन पर स्मरण ) एक सव्यसाची फिर आया 48 वर्ष सुभाष बनकर जिया जीवट की नई कसौटी स्थापित ... Read more

मैं वर्तमान की बेटी हूँ

बीसवीं सदी में, प्रेमचंद की निर्मला थी बेटी, इक्कीसवीं सदी में, नयना / गुड़िया या निर्भया, बन चुकी है बेटी। कुछ ... Read more

मैं वर्तमान की बेटी हूँ

बीसवीं सदी में, प्रेमचंद की निर्मला थी बेटी, इक्कीसवीं सदी में, नयना / गुड़िया या निर्भया, बन चुकी है ब... Read more