ravi bhujang

Joined January 2017

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रात अमावस भरी, पूर्णिमा हो गई।

देखकर इन नयन,रूप,श्रृंगार को, रात अमावस भरी, पूर्णिमा हो गई। पास हो तुम मेरे, दूर भी हो मगर, मैं धरा, और तुम आसमां हो गई। - - ... Read more

वानर

ये लगातार घूमती पृथ्वी। लगातार मरते दिन और लगातार क़त्ल होती रातें। जो, अभी हूँ मैं, तो खलता मेरा होना, मेरे बाद मेरा होना,... Read more

थोड़ा इश्क़

तुम समय काटने के लिए, इश्क़ का सहारा लेते हो! ग़ालिब की ग़ज़ले सुनकर बड़े हुएं, और अब ग़ालिब से बड़ा होना चाहते हो! तुम... Read more