Rashmi Saxena

Joined February 2018

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सफ़ीना

गिरफ़्त से ज़िन्दगी की किधर जाएगा ले कर सफ़ीना भवँर में उतर जाएगा क़ैद में जिनकी सूरज, हो उनको ख़बर चराग़ है तो कु... Read more

तुम्हारी जादूगरी

हमने पत्थरों में बो दिए हरियाली के बीज सींचे नमक के पानी से तैयार किये बादलों के जंगल ताकि बुझाई जा सके धरती की प्यास त... Read more

फन्दा

कुछ ख़ास फ़र्क नही पड़ा तुम्हारे चले जाने से पेड़ों पर लगे छोटे आम अब थोड़े बड़े होकर पीले होने की तैयारी में हैं नन्ही चिड़िया आक... Read more

जगत की माएँ

बुनती ही रहती हैं जगत की माएँ दुआएँ अपने बच्चों के लिए दिन रात युगों युगों से उसी गति से बुनती आ रही हैं तोड़ कर फेंक ... Read more

ख़ामोशियाँ

बड़ी लंबी जुबान की होती है ये ख़ामोशियाँ शब्दों की बैसाखियों के बिना ही बहुत दूर तक चली जाती हैं कच्ची पक्की अंजान पगडंड... Read more

बहुत कुछ पार कर जाते हैं

बहुत कुछ पार कर जाते हैं हम उम्र के लंबे पड़ाव वक़्त की पिघलती कतारें ईर्ष्या, क्रोध,द्वेष के घने, स्याह जंगल संवेदनाओ... Read more

सृजन

उभरती है मानस पटल पर जब भी कोई कविता मानों अभी अभी पी ली हो कोई सरिता बहा कर ले जाती है ख़्यालों को अपनी चंचल तरंगों के साथ... Read more

मेरी कविता

कुछ ख़ामोश सी रहने लगी है आजकल मेरी कविता चाहती तो है बात करना जाकर बगीचे में लदे गुंचों की डालियों से, पर सुन लेती है जब ... Read more

कागज़ के फूल

नाम व व्यवसाय के साथ "समाज सेवक" की नेमप्लेट से सुशोभित घर के बाहर की दीवार कागज़ के फूलों से सजा फूलदान, अभिमान से सिर ऊ... Read more

इतना सब कुछ

मुठ्ठी भर ठंडी हवा का झोंका भर दी थी जिसने मेरे तन मन में असीम शीतलता और जीने की नई उमंग अपार ऊर्जा से भरी भोर की पहली सुर्ख ... Read more

हादसे

कालखंड के संविधान से मुक्त नियति की परिधि से घिरे देश,धर्म,जाति राजा रंक की सीमा से परे लौकिक,अलौकिक कानूनों से मुक्त... Read more

अभागिन

विधवा हुई है तू तोड़ दे सब सब चूड़ियाँ दादी ने साफ़ कह दिया था पोंछ दे सिंदूर,माथे की बिंदिया बता रहीं थीं माँ, बुआ और पड़ोस की... Read more

इंतज़ार

इश्क़ तुझे भी है कोई अहसास तो जताया होता तू न आता न सही कोई ख़त तो आया होता ख़्वाहिशें चाँद सूरज की दिल ने की ही न थी टूटा ही सिता... Read more

रिश्ते

रिश्तों के तानेबाने में, जीवन का है हर तार बुना कुछ रिश्तों में हम जीते हैं, कुछ रिश्ते हममें जी जाते हैं। कहीं ममता का स्पर्... Read more

समानता

नारी हूँ तो नारी की पहचान चाहिए उड़ सकूँ बेफिक्र वो आसमान चाहिए बेटी बेटों में फर्क नहीं फिर जन्म पे उनके क्यों शर्माते हो बेटो... Read more

स्त्री

अप्सरा,गणिकाएँ, गायिकाएँ, नर्तकी, रहीं देह का बस अवदान, गजगामिनी,हिरनी,सुकुमारी,चंद्रमुखी, गढ़ लिए सौंदर्य प्रतिमान, मातृ, ,प... Read more

सत्य

वो मेरे अंदर पड़ा पड़ा कहीं कुलबुला रहा है बाहर आने की कशमकश में पूरा दम लगा रहा है थोड़ा सा भी सुराख़ न मिलने पर पड़ा पड़ा अंद... Read more

नदी के दो किनारों सा रिश्ता

अपने अश्क़ों को,लबों पर सजाने लगे हैं हम, दाग़ उन पर न लगे कोई,मुस्कराने लगे हैं हम, वो रुसवा न हो जाये, मेरे नाम से जमाने में ख़त... Read more

मैं तुम और ये अनन्त व्योम

मैं तुम और हमारे बीच फैला ये अनन्त व्योम मैं जानती हूँ पसंद है तुम्हें ये हल्का नीला सा आसमान जिसमें बीच बीच सफेद बादलों... Read more

मेरा स्त्रीत्व

नहीं ये डर नहीं है मुझे कि तुम परास्त कर दोगे मुझे मेरी सारी शक्तियों के साथ, मेरी अस्मिता के तार तार करके जमा लोगे मुझ पर ... Read more