Nasir Rao

Joined August 2016

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इश्क़ इतना ग़ज़ब किया जाए।।

जो भी होता है सब किया जाए,, इश्क़ इतना ग़ज़ब किया जाए।। जिंदगीभर जो कर नहीं पाए,, दिल ये कहता है अब किया जाए।। लिख दिए होट पहले... Read more

हम-सफर नहीं जिनके रास्तों से जलते है

हम-सफर नहीं जिनके रास्तों से जलते हैं इनकी अपनी राय है मशवरों से जलते हैं जब ज़बान खोलेंगे आग ही निकालेंगे इनको जानता हूँ मे ये... Read more

कोई बतलाए आख़िर क्या करूं मैं

कोई बतलाए आख़िर क्या करूं मैं छुपाऊँ क्या मैं ज़ाहिर क्या करूं मैं 'ब'बातिन हूँ मैं ग़म में चूर लेकिन बहुत खुश हूँ बज़ाहिर ... Read more

अपनी क़सम न दो मुझे लाचार मैं भी हूँ

अपनी क़सम न दो मुझे लाचार मैं भी हूँ मजबूरियों के हाथ गिरफ्तार मैं भी हूँ मैं देख ये रहा हूँ कहाँ तक हैं किमतें दुनिया समझ रही ... Read more

ना हम ञिशूल तलवारें ना ही पिस्तौल वाले हैं

ना हम ञिशूल तलवारें ना ही पिस्तौल वाले हैं अलग माहौल है अपना अलग माहौल वाले हैं ----- फक़ीरी मैं फकीराना कोई अपना ना बेगाना उलझय... Read more

मियाँ सब कुछ गवारा हो रहा है

Nasir Rao शेर Aug 19, 2016
मियाँ सब कुछ गवारा हो रहा है बहुत कम मैं गुज़ारा हो रहा है बिछडने के इशारे हो रहे हैं ताल्लुक मैं ख़सारा हो रहा है - नासिर राव Read more

हम जैसों की नींद उडा दी जाती है

पहले दिल से नक़्श मिटाए जाते हैं मेज़ से फिर तस्वीर हटा दी जाती है हम जैसों के साथ यही तो होता है हम जैसों की नींद उडा दी जाती ... Read more

किसी से कोई खतरा ही नहीं है

किसी से कोई खतरा ही नहीं है हमें जीने का चस्का ही नहीं है लड़ाई है ! ये प्यासों की लड़ाई यहाँ पानी का झगड़ा ही नहीं है उस... Read more

ज़िंदगानी बदल चुकी लाला

ज़िंदगानी बदल चुकी लाला अब कहानी बदल चुकी लाला अब यहाँ कोई भी नहीं राजा रात रानी बदल चुकी लाला मौत बरहक़' सुना हैं साँसो ... Read more

संजीदा तबियत की कहानी नहीं समझे

संजीदा तबियत की कहानी नहीं समझे आँखो में रहे फिर भी वो पानी नहीं समझे एक शेर हुआ यूँ कि कलेजे से लगा है दरया में उतर कर भी रवान... Read more

अभी हँसो न मेरी जान राव ज़िंदा है

जो घाव तुुम्ने दिया था वो घाव ज़िंदा है अभी हँसो न मेरी जान राव ज़िंदा है तुम्हारी दिल से वही खेलने की आदत है हमारा अपना वही रख... Read more

सर पे सूरज खडा है चल उठजा

सर पे सूरज खडा है चल उठजा "काम बाकी पडा है चल उठजा तुझको दुनिया फतह करनी है ये तकाज़ा बडा है चल उठजा जिस्म कहता है यार सोने ... Read more

वो दर ओ बाम क्यूँ नहीं आता,,

इक दिया आम क्यूँ नहीं आता, वो दर ओ बाम क्यूँ नहीं आता,, एक ही शख़्स क्यूँ ज़बाँ पर है, दूसरा नाम क्यूँ नहीं आता,, इश्क़ करना... Read more

पत्थरों की कहानियाँ लिख दो

पत्थरों की कहानियाँ लिख दो ख़ुश्क आँखों रवानियाँ लिख दो फ़िर वही तज़करा एे ज़िंदगानी बुढ़ी क़लमों जवानियाँ लिख दो लिख दो ता... Read more

बैठ कर ज़ख़्म ही गिना कीजे '

हालत ऐ हिज्र है तो क्या कीजे बैठ कर ज़ख़्म ही गिना कीजे ' आग तो ख़ैर क्या बुझेगी अब आप तो बस इसे हवा कीजे ' जब ज़ुबाँ है तो... Read more

खंजर की चुभन से ही मैं पहचान गया था

उस पर तो कभी दिल का कोई ज़ोर नहीं था हमसा भी ज़माने में कोई और नहीं था जिस वक़्त वो रुख्सद हुआ बारात की मानिंद एक टीस सी उठी थी को... Read more

फ़िर तेरी याद आ गयी 'नासिर'

हद से ज़ियादा वबाल कर डाला फिर खुदा ने ज़वाल कर डाला अपना इल्ज़ाम मेरे सर डाला यार तुमने कमाल कर डाला.... एक ताज़ा गुलाब चेह... Read more

चराग़ों की लवें भडकी हुईं हैं

पहाडों से गुज़रना पड रहा है मुझे चढकर उतरना पड रहा है..!! चराग़ों की लवें भडकी हुईं हैं अन्धेरों को बिखरना पड रहा है..!! उजा... Read more

मन्ज़रों के नाम होकर रह गयी

मन्ज़रों के नाम होकर रह गयी खास सुरत आम होकर रह गयी रात दुख की काटकर बैठै ही थे जिन्दगी की शाम होकर रह गयी ज़िंदगी का नाम क्... Read more

जब उजाला गली से गुज़रने लगा

जब उजाला गली से गुज़रने लगा सब अंधेरों का चेहरा उतरने लगा दौर बदला तो मैं भी बदल सा गया बे'गुनाही से अपनी मुकरने लगा शाम आयी... Read more

कभी कभी वो मिला करेगा..!!

हमारे हक़ में दुआ करेगा वो इक ना एक दिन वफा करेगा..!! बिछड गया है मगर यकीं है कभी कभी वो मिला करेगा..!! तु अपने आशिक को साथ ... Read more

आप अपनी दवा भी रखते हैं

आप अपनी दवा भी रखते हैं हम दीये हैं हवा भी रखते हैं.!! मुख्तसर लोग हैं जो आँखो में शर्म ' ग़ैरत ' हया भी रखते हैं..!! मौत क... Read more

ज़िंदा

तुम्हारे जिस्म की खुशबु तुम्हारे लम्स का जादु मेरे अहसास की चादर'' तुम्हारी याद का तकिया मैं जब भी लेके सोता हूँ भले खामोश होता... Read more

हम अपने आपकी किस्मत ख़राब लिखते हैं

कहीं अज़ाब कहीं पर सवाब लिखते हैं फरिशते रोज़ हमारा हिसाब लिखते हैं बहुत से लोग तो ऐसे भी हैं इसी युग में किताब पढ़ते नहीं हैं... Read more

मैं रोते हुएे जब अकेला रहा हूँ

कहाँ और कब कब अकेला रहा हूँ मैं हर रोज़ हर शब अकेला रहा हूँ मुझे अपने बारे में क्या मशवरा हो मैं अपने लिए कब अकेला रहा हूँ उ... Read more

हमसफर ! आफताब था उसका

"ज़ह्न तो लाजवाब था उसका दिन ही शायद ख़राब था उसका जबकि मेरा सवाल सीधा था फ़िर भी उलटा जवाब था उसका वो महज़ धूप का मुसाफिर थ... Read more

हर शब किसी चराग़ सा जलकर बडा हुआ

तन्हाईयों की गोद में पलकर बडा हुआ बचपन से अपने आप सम्भलकर बडा हुआ ग़ैरों को अपना मान के जीता रहा हूँ मैं इस राह ऐ पुलसिरात पे चलक... Read more