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"माता की स्तुति"

"माता की स्तुति" कितना शांत,सौम्य,ज्योतिर्मय स्वरूप है तुम्हारा आपको खुश करें,प्राणपण से प्रयत्न है हमारा। कहाँ तुम्हें पायें....... Read more

"सिया के राम"

"सिया के राम" गूँजता है तेजघन, सुनो जानकी-प्राण, कैसा है ये विधि का विधान?? पूरी श्रद्धा से तुम्हें बुलाते है, पर ना जाने कहाँ च... Read more

प्रेम का अहसास

जब उसने कहा "जीवन में प्यार है तो सबकुछ है, प्यार नहीं तो कुछ भी नहीं" मुझे लगा - यह उसकी अपनी अनुभूती है ,... Read more

नारी शक्ति

"नारी शक्ति " नारी....तुम शक्ति हो तुम आत्मा हो हर प्राण की नारी तुम्हारी शक्ति है नारीत्व। तुम हर रूप में जीवन को आलोकित कर... Read more

आजादी

निज स्वार्थ और श्रेष्ठता के मद में डुबे हुवे क्या तुम्हें आजादी की अनुगूँज सुनाई देती है कोई विराग नहीं कोई विच्छेद नहीं.... क्या... Read more

माँ

कहाँ से पाती हो माँ ये अपराजीत स्वभाव यह तुल्यानुराग भाव ये अविचल जीवन-दृष्टि यह प्रश़्न स्वंय से दोहराती हूँ माँ बन अब माँ समझ... Read more

विश्वास

"विश्वास" काटों की बस्ती में... फूल सजोने हम गये मिली छुपी हुई हाय-हाय दर्द की गर्दिश में। कोई पास नहीं है फिर भी.... है ... Read more

होली

"होली" आभा फागून की चारो ओर फैल रही कहीं हरी कहीं लाल रंग मन को भिगो रही रंग के फुहार से इधर-उधर उड़त है अबीर रंग कोकिला ने जब ... Read more

अभिलाषा

अभिलाषा आकाश की असीम शून्यता में क्या आकर्षण हैं छुपा वहाँ। गगन की स्वच्छंदता से लेना-देना मुझको कहाँ। ऊपर देखूँ तो सर चकराता... Read more

अंतर्मन

अत्यंत सहजता से पूछो अपने मन से अपनी कोमल और मृदुल भाव से क्यों बढ़ते हैं कदम और रूक जाते है अपनी कल्पना जनित स्वप्न लोक से ... Read more

नारी

सबकी चर्चित कथा, मैं ईश का रहस्य वरदान पर मैं भी हूँ तुम सबमें एक समान। आकाश औ पृथ्वी के बीच क्यों रहस्य बनू मैं जब अम्बर अवनी क्... Read more