jyoti rani

kanpur

Joined January 2017

I am a govt. servant.

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स्वयं पर एक दृष्टि

मानव का स्वभाव है कि उसका ध्यान सदा अन्य व्यक्तियों पर ही केंद्रित रहता है उनके पास कितना धन है क्या सुविधायें है उनका कैसा बाह्य रू... Read more

यह वही नारी है

निडर और स्वावलंबी बनकर अपनी छवि निखारी है असहाय और अबला नहीं शक्तिपुंज वह नारी है अपनी शक्ति से वह अब तलक अनजान थी सब कुछ सहकर भी ... Read more

मौसम की व्यथा

रे मौसम क्यों करते हो हम पर इतने सितम अभी चंद महीनों पहले ही तो तुम थे कितने गरम तुम्हारी प्रचंड अग्नि की वर्षा को सह न पाते थे ह... Read more

अनमोल जीवन

तोड़ कर गुलाब किसी के बाग़ का अपना गुलशन महकाया तो क्या किया बुझा कर चिराग किसी के घर का अपना महल जगमगाया तो क्या किया लूट के दौलत ... Read more

मन के जीते जीत

मन में उत्साह हो कुछ करने की चाह हो कौन रोक सकता है चाहे काँटों भरी राह हो मन में उमंग हो उठती तरंग हो खुश रह सकता है चाहे कोई ... Read more

बसेरा

मुझे यहाँ पर नौकरी ज्वाइन किये हुए अभी छ: महीने बीते थे,| मेरे ऑफिस में करीब १५-२० महिलाये काम करती थीं उनमें से एक थीं सुजाता जी ज... Read more

जीवन दान

रोज की तरह मैं आज भी अपने क्लीनिक में समय पर पहुँच गयी थी | क्लीनिक के बाहर सुबह मेरे पहुँचने से पहले ही रोज की तरह कई महिला मरीज मे... Read more

ट्रैफिक सेंस

मार्ग पर जब दो सवारों का संतुलन खो जाता है तभी एक गंभीर आकस्मिक दुर्घटना का जन्म हो जाता है असहनीय पीड़ा सहकर कभी कोई बच जाता है ... Read more

संघर्षों से लड़कर जीतती आयीं हैं बेटियां

जन्म से पहले, जन्म के बाद, जीवन पर्यंत संघर्षों से लडती ही तो आयीं हैं बेटियां जिस देश में मातृशक्ति की होती है पूजा उसी देश म... Read more