ईश्वर दयाल जायसवाल

टांडा - अंबेडकर नगर ( उ.प्र. }

Joined June 2018

लेखक /कवि/व्यंग्यकार

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☆~ जीवन की अनुभूति ~☆

जब मैं सोचता हूँ ! केवल अपने लिए , परिवार के लिए , तब ! हर कर्म करता हूं , जीवन भर पिसता हूँ , फिर भी नही मिलता मन को तृप्त... Read more

{ प्रेरक प्रसंग } ★ स्वास्वाभिमान ★

बात अंग्रेजों के समय की है । एकबार एक स्कूल का मुआयना करने के लिए एक अंग्रेज आफिसर महोदय आए हुए थे । स्कूल के निरीक्षण के दौरान अंग्... Read more

* ऐसा क्यों है ? *

राराष्ट्रीय पर्वो गणतंत्र दिवस , स्वतंत्रता दिवस , महात्मा गांधी जंयती के अवसर पर सार्वजनिक प्रतिष्ठानो के बंद को लेकर मेरा मन एक सव... Read more

÷ आत्मनिर्भरता ÷

सर्द रात में वह ' फटेहाल भिखारी ' चादर के नाम पर टाट को लपेटे हुए एक फुटपाथ पर करवटें बदल रहा... Read more

@> नेताजी का आदर्श <@

हमारे नेता जी का आदर्श , कंकड़ - पत्थर सब हजम , फिर भी भूख न हो कम । Read more

~~¤ नारी का सच ¤~~

प्राचीन युग में- नारी ' पूज्या ' थी , मध्य युग में- ' भोग्या ' बन गई , अब आधुनिक युग में ? घर के आंगन से निकलकर , अखबार के ... Read more

▲▼▲▶ बंदर बांट ◀▲▼▲

बाढ़ नदी में आती है , आफत जनता पर आती है , राहत कोष प्रशासन को मिलता है , बाढ़ पीड़ितों के नाम पर 'अनुदान ' सरकारी कर्मचरियों मे... Read more

★ अनुत्तरित -प्रश्न ★

बात हमारे आपके बीते हुए दिनों की है । हिन्दुओं में छुआछूत की भावना बड़ी प्रबल थी । प्रत्येक ऊँची जाति अपने से नीची जाति के लोगों के ... Read more

** स्वतंत्रता **

स्वतंत्रता ! देश को मिला , देश के नेता और प्रशासक को मिला , सबसे अधिक अपराधियों - अराजकत्तवों को मिला , और जनता को- मंहगा... Read more

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नेताजी ! चुनाव के दौरान दे रहे थे भाषण , अंत में जनता से कहा - में देता हूँ आश्वासन , विजयी होने पर इस इलाके से ल... Read more

★ " घड़ियाली- शुभ चिंतक " ★

नही ! नही !! तुम मेरे शुभचिंतक नही हो सकते ! ÷ ÷ ÷ ÷ ÷ ÷ ÷ ÷ ÷ ÷ ÷ ÷ ÷ ÷ ÷ ÷ ÷ ÷ ÷ तुम ऐसे परजीवी कीड़े हो जो समाज का ख... Read more

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नगर के प्रतिष्ठित सेठ बाबू अरूण लाल जी दूरस्थ रिश्तेदार के यहां जा रहे थे । यात्रा के दौरान एक शहर में जलपान करने की इच्छा से ड्राइव... Read more

♥♡▶ प्रिय पथिक ◀♡♥

जीवन पथ के प्रिय पथिक तुम भूल न जाना मेरी राहें , तुम्हे आलिंगन में लेने को आतुर हैं ये मेरी बाहें । पथरीले जी... Read more

♥♡▶ प्रिय पथिक ◀♡♥

जीवन पथ के प्रिय पथिक तुम भूल न जाना मेरी राहें , तुम्हे आलिंगन में लेने को आतुर हैं ये मेरी बाहें । पथरीले जी... Read more

{ व्यंग्य }★☆अखिल भारतीय सर्वहारा कवि संगठन ☆

हमारे मुल्क महान में अदना चपरासी से लेकर नौकरशाह तक , मजदूर से लेकर उद्योगपति तक, छात्र से लेकर शिक्षाविद तक, जाति... Read more

卐== समर्पण ==卐

निखरी , खिली- खिली धूप , स्वच्छ आकाश में कलरव करती - चहचहातीं चिड़ियों का मधुर गीत , संगीत , खेतों में खिले दूर ... Read more

[ व्यंग्य ] ☆ >> मूड <<☆

ऊँह ! एक निश्वास छोड़ा और कलम तथा पैड को रखकर चारपाई पर लेट गया । सोचा था कि अखबारी चौखट में अपना भी कुछ सिक्का जम जाय पर मूड के रोग... Read more

卐☆ लेखक ☆卐

लेखक ! समाज का दंश जीवन की विसंगतियां मन की अंतस में पैठी पीड़ाओं को उकेरता है - लेखनी से , परंतु ! आलोचना - समालोचना, सुख... Read more

==☆ तुम नया इतिहास रचो ☆==

तुम नया इतिहास रचो ! ' राम ' नहीं बन सकते तुम ' केवट ' तो बन सकते हो , ' कृष्ण ' नहीं बन सकते तुम ... Read more

=☆ अशांत जिन्दगी ☆=

जिन्दगी और सावन की घटा ! इनका भरोसा क्या ? स्वच्छ आकाश को , चमकते सूरज को , ये घटाएं कब घेर लेंगी , कौन जान सका है ? वारिस की ... Read more

★☆ जीवन बोध ☆★

जीवन के इस कठिन डगर पर वे ही चल पाते हैं , दीपक की तरह खुद जलते हैं औरों को प्रकाश दे जाते हैं , कहने को नन्हा दीपक ल... Read more

••••••••• ☆ रे मन ☆•••••••••

रे मन! ! तू निराश न हों । सुख-दुख के फूलों को चुनकर गले का हार बना लो , रे मन ! तू निराश न हों । अंकुर की तरह माटी मे दब... Read more

☆☆☆ यथार्थ ☆☆☆

जीवन का मूल्य ! अर्थहीन वाक्य की तरह इस सदी की कोरी कल्पना है जिसे हम यथार्थ समझते हैं । आधुनिक सभ्यता के नग्न परिवेश में ... Read more

[ व्यंग्य ] >>> मूड <<<

ऊॅह ! एक निश्वास छोड़ा और कलम तथा पैड को रखकर चाचारपाई पर लेट गया। Read more

**********☆☆मेरा शहर ☆☆**********

मेरा शहर ! इक्कीसवीं सदी में श्मशान बन गया है । शहर की पाश कालोनियों में रहने वाले अब इंसान न... Read more