हिन्दी एवं छत्तीसगढ़ी भाषा में भारतीय छंद विधा का कवि

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ममता

ममता ममता होत है, नर पशु खग में एक । खग के बच्चे कह रहे, मातु हमारी नेक । मातु हमारी नेक, रोज दाना है लाती । अपने पंख पसार, मधुर ... Read more

दोहे-

जाति जाति के अंग से, एक कहाये देह । काम करे सब साथ में, देह जगाये नेह । हाथ पैर का शत्रु हो, पीठ पेट में बैर । काया कैसे देश की, ... Read more