Rajpal Singh Gulia

झज्जर

Joined December 2016

हरियाणा शिक्षा विभाग में अध्यापक

Books:
दोहा संग्रह ” उठने लगे सवाल “

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दोहे

लेकर धजा विकास की , उड़ा गगन में यान ! भूखे प्यासे ताकते , उसको सीना तान !! मिले शाम को शेर से , वन के सभी सियार ! किए ... Read more

कुण्डलियाँ

1. जन्नत जिनका खाब है , हूरें जिनकी चाह , खाकर धर्म अफ़ीम वो , चलते टेढ़ी राह . चलते टेढ़ी राह , खाब हो पूरा कै... Read more

ग़ज़ल

एक साथी मिला आज विश्वास का , लौट आया समय हर्ष उल्लास का . हाथ पीले हुए थे सुता के तभी , सेठ ने जब लिया खेत जयदास का . ... Read more

भूखा बंदर

भूखा बंदर ::::::::::::::: छ्त से उतरा बंदर भूखा . खाना था बस रूखा सूखा . बंदर जी का दिल ल... Read more

कुण्डलियाँ

पैसे बिन संसार में , हुआ नहीं कुछ काम . मोल लिया है बैर भी , देकर उनको दाम . देकर उनको दाम , बनाया दुश्मन जानी . नहीं किसी क... Read more

दाेहे

हिम्मत जुटा वजीर ने ,खरी कही जब बात ! राजा की शमशीर ने ,बतला दी औकात !! जिस दिन खुलकर धर्म पर , उसने दी तकरीर ! उस दिन से अखब... Read more