डॉ. रजनी अग्रवाल 'वाग्देवी रत्ना'

महमूरगंज, वाराणसी (उ. प्र.)

Joined January 2017

 अध्यापन कार्यरत, आकाशवाणी व दूरदर्शन की अप्रूव्ड स्क्रिप्ट राइटर , निर्देशिका, अभिनेत्री,कवयित्री, संपादिका समाज -सेविका।

उपलब्धियाँ- राज्य स्तर पर ओम शिव पुरी द्वारा सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार, काव्य- मंच पर “ज्ञान भास्कार” सम्मान, “काव्य -रत्न” सम्मान”, “काव्य मार्तंड” सम्मान, “पंच रत्न” सम्मान, “कोहिनूर “सम्मान, “मणि” सम्मान  “काव्य- कमल” सम्मान, “रसिक”सम्मान, “ज्ञान- चंद्रिका” सम्मान ,

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मुक्तक

[2/7, 12:14] rajniagrawal60: हवा ने जिस्म की खुशबू भरा संदेश पहुँचाया। अधर पर इश्क का चुंबन लिए पैगाम जब आया। शबनमी प्रीत की सौगात... Read more

मुक्तक

मुक्तक त्रय "जश्न-ए-आज़ादी" (1) जश्न आज़ादी मनाएँ नेह वंदन भारती! देश के प्रहरी सजाएँ भाल चंदन भारती! गूँज शहनाई भरें उन्मा... Read more

मुक्तक

आशिकों का क्या ज़माना आ गया। दर्द सहकर मुस्कुराना आ गया। दे भरोसा प्यार में सौदा किया- प्यार किश्तों में चुकाना आ गया। डॉ. रजन... Read more

मुक्तक

प्रीत अधरों पर सजा मुस्कान बनना चाहिए। हसरतों के ख्वाब सा मेहमान बनना चाहिए। भूल कर मतभेद मजहब के जियो सब प्यार से- नेक कर्मों की... Read more

मुक्तक

मुक्तक (1) मिला पतझड़ विरासत में हमें क्यों यार से ए दिल? मिलीं बेड़ी हिफ़ाज़त में हमें क्यों यार से ए दिल? गँवाकर दीप नैनों क... Read more

मुक्तक

मुक्तक (1) आशिकों का क्या ज़माना आ गया। दर्द सहकर मुस्कुराना आ गया। दे भरोसा प्यार में सौदा किया- प्यार किश्तों में चुकाना आ ... Read more

मुक्तक

"तिरंगे की कसम" ************** #तिरंगे की कसम खाकर महकती छोड़ आया मैं। पहन #राखी हथेली में चहकती छोड़ आया मैं। लगा #सिंदूर माथे ... Read more

मुक्तक

मुक्तक इश्क में इश्क ने हम पर रुआब रक्खा है। हरेक सवाल का हमने जवाब रक्खा है। जुबाँ ख़ामोश है लब मुस्कुरा रहे अपने- ढहाए जुल्म... Read more

मुक्तक

'बेवफाई' गैर के साथ चले राह कई भूल गए। आशिकी को न समझ पाए कभी भूल गए। है अजब इश्क जुदाई न सही जाए सनम- जो हमें याद रहे आज वही ... Read more

मुक्तक

मुक्तक इश्क में इश्क ने हम पर रुआब रक्खा है। हरेक सवाल का हमने जवाब रक्खा है। जुबाँ ख़ामोश है लब मुस्कुरा रहे अपने- ढहाए जुल्म... Read more

मुक्तक

दीपावली मुक्तक नेह की बाती जले सद्भभाव की हो धारणा। जगमगाते दीप में उत्सर्ग की हो भावना। दीप माटी के जला रौशन करें हर द्वार को-... Read more

मुक्तक

चला जाऊँ अगर तन्हा नहीं कोई गिला होगा। तुम्हारे रूँठ जाने का नहीं फिर सिलसिला होगा। हज़ारों महफ़िलें होंगी मगर मुझसा नहीं होगा- व... Read more

मुक्तक

मुक्तक जूझके हालात से कर हादसों का सामना। वज्र सा पाषाण बन कर बादलों का सामना। बुझदिलों की जीत होती है नहीं संसार में- तू बढ़... Read more

मुक्तक

भरी गागर बुराई की छलकना भी ज़रूरी है। नज़र से दूर होने पर तड़पना भी ज़रूरी है। गरजते जो ज़माने में बरसते वो नहीं भू पर- खरी-खोटी ... Read more

मुक्तक

वक्त में ताक़त बहुत ख़ुद ही बदलना सीखले। छोड़कर आलस्य तू ख़ुद ही सँभलना सीखले। रेत के मानिंद मुठ्ठी में रुका है वक्त कब- कर्म कर ... Read more

मुक्तक

मुक्तक गुलामी गैर की करना मुहब्बत हो नहीं सकती। ख़ुशामद यार की करना ख़िलाफ़त हो नहीं सकती। भरम में डाल दूजे को सज़ा ख़ुद को ही ... Read more

मुक्तक

मुक्तक झुका ये शाख-ए-गुल चंदा' गज़ब की प्रीत बरसाए। ज़मीं पे ख़ुशनुमा मौसम फ़िज़ा में गीत भरमाए। छिटकती चाँदनी करती बहारों को य... Read more

मुक्तक

मुक्तक अजब मालिक की दुनिया है यहाँ किरदार बिकते हैं। कहीं सत्ता कहीं ईमान औ व्यापार बिकते हैं। पड़ी हैं बेचनी सांसें कभी खुशिय... Read more

मुक्तक

मुक्तक बसाकर स्वार्थ निज उर में नहीं रिश्ते भुला देना। न मन में बैर विष सा घोल अपनों को रुला देना। मनुज जीवन बड़े सौभाग्य से मि... Read more

मुक्तक

छलकता जाम नयनों से पिलाने चाँदनी आई। समा आगोश में चंदा सितारे माँग भर लाई। मचलता झूमता मौसम खिलाता रूप यौवन का- लुटा कर जिस्म की ... Read more

मुक्तक

मुक्तक सितारे आसमाँ से जब जमीं पर टूट के बिखरे। बहारों ने किया सज़दा जवाँ फूलों से सब उभरे। मची हलचल हवाओं में शरारत झूमके बरस... Read more

मुक्तक

मुक्तक "ताबीज़" लिए ताबीज़ सी तासीर उर में प्यार भरती हूँ। ग़मों को खींच लोगों के अधर मुस्कान बनती हूँ। लगा विषधर गले अपने उन्... Read more

मुक्तक

_________मुक्तक त्रयी-------- नफ़रतें आबाद कर ज़ालिम बनाती रोटियाँ। भूख से तड़पा यहाँ चोरी करातीं रोटियाँ। धर्म का ले नाम रोट... Read more

मुक्तक

छा गई पनघट उदासी गीत बिन सूना जहाँ। घाट आतप से तपे हैं प्रीत बिन सूना जहाँ। कृषक अंबर को तके खलिहान सूखे रो रहे- सरित सागर खार बन... Read more

करवाचौथ (त्रिपदीय मुक्तक)

"करवाचौथ" (त्रिपदीय मुक्तक) "करवाचौथ" सजन की प्रीत का त्योहार करवाचौथ आया है। उतर कर आसमाँ से चाँद ने मुझको सजाया है। पहन कं... Read more

मुक्तक

मुक्तक चिलमन हटी निगाह तलबगार से मिली। कंटक भरी गुलाब कली प्यार से खिली। सच कह दूँ जनाब मान जाएँगे- दर्दे ज़िगर कटार वफ़ा नाम ... Read more

मुक्तक

मुक्तक ख्वाब में आकर हमारे यूँ सताना छोड़ दो। हम तुम्हारे हैं सनम तुम आजमाना छोड़ दो। दर्द देकर ज़ख्म पर मलहम लगाना सीख लो- क... Read more

मुक्तक

मुक्तक सजा कर प्रीत के सपने लिए तस्वीर बैठे हैं। इबादत में सनम तुझको बना तकदीर बैठे हैं। छलावा कर रही दुनिया यहाँ जज़्बात झूठे है... Read more

मुक्तक

मुक्तक पिलाता रोज़ है साकी नज़र का नाम होता है। नहीं मजहब शराबी जात का बस जाम होता है। निगाहें फेर कर जब भी दिखाई बेरुखी उसने भु... Read more

कई रातों को जागा मैं (मुक्तक)

"कईरातों को जागा मैं" सजाकर याद की महफ़िल कई रातों को जागा मैं। भरा आगोश में तकिया बहाए अश्क जागा मैं। हुई खामोश तन्हाई सुनाकर ... Read more

मुक्तक

मुक्तक सुनाते हाले दिल हमको कभी यूँ ग़म नहीं सहते। मनाते रूँठते हमसे ज़माने से नहीं कहते। मिलेगा क्या भला हमको वफ़ा की आरजू से ... Read more

विरह वेदना (मुक्तक)

विरह वेदना ******** बनी मैं दीप की बाती सनम दिन रात जलती हूँ। बहाकर प्रीत नयनों से तुम्हारी राह तकती हूँ। दिखा कर स्वप्न आँखों क... Read more

मित्रता (मुक्तक)

"मित्रता" बनी ये मित्रता हमराज़ दिल की शान होती है। यही सुख दुख भरोसे की सही पहचान होती है। सदा हँस कर निभाना साथ नफ़रत को मिटा... Read more

मुक्तक

मुक्तक ***** जहाँ इंसान बिकता है वहाँ किसका ठिकाना है। फ़रेबी बात उल्फ़त में यहाँ करता ज़माना है। समझ कर कीमती मुझको लगादीं बो... Read more

*पायलिया* मुक्तक

*पायलिया* ******* बरसती बारिशों में आग पायलिया लगाती है। दिलों में कोकिला सी राग भर सरगम सुनाती है। बनी ये रेशमी धड़कन ज़माने को... Read more

"इंसानियत" मुक्तक

इंसानियत ****** पहन कर बैर का जामा बढ़ाते हसरतें क्यों हो? पढ़ा कर पाठ मज़हब का उठाते ज़हमतें क्यों हो? रहीमा राम बन जाए मुहब्ब... Read more

"मधुशाला" मुक्तक

"मधुशाला" मुक्तक ********* छुआ दे आज अधरों से अधर का जाम मतवाला। बुझे ना प्यास महफ़िल में लगे फ़ीकी सरस बाला। भिगो कर जिस्म नू... Read more

"इंसानियत" मुक्तक

"इंसानियत" ******** बहा कर प्रीत का सागर, सरस सम भाव उपजाएँ। बनें हम नेक फ़ितरत से, चलो इंसान बन जाएँ। मिटा कर नफ़रती दौलत मुहब... Read more

*समंदर* मुक्तक

समंदर (मुक्तक) कभी खाली नहीं रहता समंदर आँख का ए दिल। ग़मों की तैरती कश्ती कभी रूँठा हुआ साहिल। उठा तूफान भीतर है निगल खामोश तन... Read more

ईद मुबारक(मुक्तक)

ईद मुबारक !!! मुबारक ईद हो तुमको तुम्हारी दीद बन जाऊँ। बनी मुस्कान अधरों की तुम्हारी प्रीत बन जाऊँ। भुला रंज़ों ग़मों को प्यार ... Read more

मुक्तक

मुक्तक (१)अधरों पर मुस्कान खिली जब आँगन देखी फुलवारी। उन्मादित नयना हर्षाए द्वार हँसी जब किलकारी।। (२)ढह गए प्यार के सपने ब... Read more

मुक्तक

मुक्तक (१)"मुहब्बत" दिखा जो चाँद नूरानी तिरे दीदार को तरसा। सजाकर ख़्वाब आँखों में तसव्वुर यार को तरसा। मुहब्बत ने किया घायल हु... Read more

मुहब्बत

"मुहब्बत" दिखा जो चाँद नूरानी तिरे दीदार को तरसा। सजाकर ख़्वाब आँखों में तसव्वुर यार को तरसा। मुहब्बत ने किया घायल हुआ दिल आज पत्... Read more

"आतप"

"आतप" आँचल शूल दिखाय कहे इस तप्त धरा पर नेह लुटाओ। प्रीत बनो सुख बाँह पसारत द्वेष भुला निज ठौर बिठाओ। कंटक सा नित रूप धरो नहि कोम... Read more

"बेवफ़ाई"

"बेवफ़ाई" मुहब्बत में नज़र फ़िसली, दिले नादान ना माना। बसाया रूप आँखों में लुटाया प्यार दीवाना । ... Read more