डॉ. रजनी अग्रवाल 'वाग्देवी रत्ना'

महमूरगंज, वाराणसी (उ. प्र.)

Joined January 2017

 अध्यापन कार्यरत, आकाशवाणी व दूरदर्शन की अप्रूव्ड स्क्रिप्ट राइटर , निर्देशिका, अभिनेत्री,कवयित्री, संपादिका समाज -सेविका।

उपलब्धियाँ- राज्य स्तर पर ओम शिव पुरी द्वारा सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार, काव्य- मंच पर “ज्ञान भास्कार” सम्मान, “काव्य -रत्न” सम्मान”, “काव्य मार्तंड” सम्मान, “पंच रत्न” सम्मान, “कोहिनूर “सम्मान, “मणि” सम्मान  “काव्य- कमल” सम्मान, “रसिक”सम्मान, “ज्ञान- चंद्रिका” सम्मान ,

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ग़ज़ल

"रस्म-उल्फ़त" रूँठना भी है अदा उनको मनाना चाहिए। फ़ासलों को दूर कर नज़दीक आना चाहिए। मानकर अधिकार अपना की शिकायत आपसे माफ़ क... Read more

ग़ज़ल

"लाज़मी है" ज़िंदगी बोझिल हुई है गुनगुनाना लाज़मी है। रिस रहे रिश्ते यहाँ मरहम बनाना लाज़मी है। गेसुओं से अब झरे शबनम नहीं रु... Read more

ग़ज़ल

'शायरी अपनी जगह' आशिकी अपनी जगह है बेकशी अपनी जगह। मुफ़लिसी अपनी जगह है बेबसी अपनी जगह। था मुकम्मल प्यार उनका बेवफ़ाई कर गए ... Read more

ग़ज़ल

"सुनाता हाले दिल अपना" सुनाता हाले दिल अपना मगर सबसे छुपाना था। तुझे मालूम है ए दिल बड़ा दिलकश फ़साना था। छिड़ी है बात उल्फ़... Read more

ग़ज़ल

"लिखूँ ए दिल बता क्या मैं" लिखूँ ए दिल बता क्या मैं बड़ा दिलकश फ़साना था। नहीं मैं भूलता उसको वही मेरा खज़ाना था। बहुत खुशिया... Read more

ग़ज़ल

'नसीहत' अजब नादान उल्फ़त ने गढ़ी अपनी कहानी है। लिखा हर हर्फ़ आँसू से ग़ज़ल ही तरजुमानी है। अभी हर ज़ख्म गहरा है यहाँ ख़ूने त... Read more

ग़ज़ल

*आप हमें भूल गए* गैर के साथ गए मेरी कमी भूल गए। जो हमें याद रहे आज वही भूल गए। घूमते आप फिरे रोज़ नई महफ़िल में दी सज़ा आपन... Read more

ग़ज़ल

212 212 212 212 "देखते-देखते जल रहा है मकाँ देखते-देखते। मिट गया आशियाँ देखते-देखते। फ़ासले हो गए दूर हम से गए हो गया ... Read more

ग़ज़ल

"दिलकश यौवन" 1222 1222 1222 1222 नज़ाकत शोखियों ने रूप यौवन का सँवारा है। तुम्हारी सादगी के हुस्न ने चंदा नकारा है। खिली मुस... Read more

ग़ज़ल

212 1222 212 1222 "भूल नहीं पाते हैं" दर्द को छुपा जग से होंठ मुस्कुराते हैं। बेवफ़ा सनम हमको नींद में सताते हैं। याद जब क... Read more

ग़ज़ल

1222 1222 1222 1222 काफ़िया- आर रदीफ़- हो जाना बहुत महँगा पड़ा मुुझको सनम से प्यार हो जाना। मुहब्बत में खुला व्यापार -औ-अख़बार... Read more

ग़ज़ल

"दास्ताने इश्क" इश्क नासूर बन कर उभर जायेगा। दर्दे-ग़म आँसुओं में उतर जायेगा। दास्ताँ हाले दिल की कभी तो सुनो दर्द उठ-उठ के ... Read more

ग़ज़ल

1222 1222 1222 1222 काफ़िया- आर रदीफ़- हो जाना बहुत महँगा पड़ा मुुझको सनम से प्यार हो जाना। मुहब्बत में खुला व्यापार -औ-अख़बार... Read more

ग़ज़ल

"दास्ताने इश्क" वक्त नासूर बन कर ठहर जायेगा। दर्दे-ग़म आँसुओं में उतर जायेगा। दास्ताँ हाले दिल की कभी तो सुनो दर्द उठ-उठ क... Read more

ग़ज़ल

ग़ज़ल काफ़िया-आर रदीफ़-बिकते हैं अजब मालिक की दुनिया है यहाँ किरदार बिकते हैं। कहीं सत्ता कहीं ईमान औ व्यापार बिकते हैं। ... Read more

ग़जल

"आप गली भूल गए" --------------------------- गैर के साथ चले राह कई भूल गए। जो हमें याद रहे आज वही भूल गए। आपकी याद उदासी बनी ... Read more

ग़ज़ल

"आज़मा कर देखना" याद में मेरी कभी ख़ुद को भुलाकर देखना। ख़्वाब आँखों ने बुने उनको चुराकर देखना। गीत होठों के सभी क्यों आज बेग... Read more

ग़ज़ल

*ज़माने बीत जाते हैं* कभी उल्फ़त निभाने में ज़माने बीत जाते हैं। कभी मिलने मिलाने में ज़माने बीत जाते हैं। कभी वो दर्द देते ह... Read more

ग़ज़ल

"तुम्हारे बिन" तुम्हारी याद के साए सताते हैं चले आओ हमें जीने नहीं देते रुलाते हैं चले आओ। तुम्हारे गेसुओं में पा पनाह हर शाम... Read more

ग़ज़ल

"तुम्हारे बिन" तुम्हारी याद के साए सताते हैं चले आओ हमें जीने नहीं देते रुलाते हैं चले आओ। तुम्हारे गेसुओं में पा पनाह हर शाम... Read more

ग़ज़ल

ग़ज़ल बहर २१२२ १२१२ २२ काफ़िया- आ रदीफ़- देना ख्वाब आए नहीं जगा देना। बुझ गया तो दिया जला देना। रात आकर मुझे सताती है नीं... Read more

ग़ज़ल

ग़ज़ल बहर २१२२ १२१२ २२ काफ़िया- आ रदीफ़- देना ख्वाब आए नहीं जगा देना। बुझ गया तो दिया जला देना। रात आकर मुझे सताती है नीं... Read more

ग़ज़ल

“कहाँ इंकार करता हूँ” बहर- १२२२ १२२२ १२२२ १२२२ रदीफ़ करता हूँ काफ़िया- आर सुनाके हाल दिल का आपसे इकरार करती हूँ। मुहब्बत है अजी... Read more

ग़ज़ल

ग़ज़ल “अनबुझी प्यास” बह्र 1222×4 काफ़िया-आ रदीफ़- जाओ छलकते जाम बन कर आप नयनों से पिला जाओ। महकते ख़्वाब बन कर आप नींदों में ... Read more

ग़ज़ल

मापनी-2122 2122 2122 212 काफ़िया-"अरने" रदीफ़-"आ गया" रंग खुशियों के तेरे दामन में भरने आ गया। नफ़रतों को पर्व होली दूर करने आ... Read more

ग़ज़ल

बेरुखी” रदीफ़–बैठे हैं काफ़िया-आके दिखाते बेरुखी चिलमन गिराके बैठे हैं । मिजाज़े बादलों सा रुख बनाके बैठे हैं। नज़र में शोकि... Read more

ग़ज़ल

"प्रीत के रंग" प्रीत नैनों में बसा चाहत लुटाके देखना बन हिना सूनी हथेली को रचाके देखना। जानते हो पीर हरके कुछ सुकूँ मिल जाएगा... Read more

ग़ज़ल

122 122 122 122 *जवाँ हसरतें ------------------ झुकी है नज़र कुछ सँभलने तो दो। ज़रा देर हमको ठहरने तो दो। अभी प्यार से मन... Read more

ग़ज़ल

काफ़िया-आस रदीफ़-बाक़ी है बह्र-1222 1222 1222 1222 *मिलन की प्यास बाकी है* --------------------------------- तरसता प्यार को ... Read more

ग़ज़ल

काफ़िया- अर रदीफ़- जाऊँ मैं बह्र-122 122 122 12/22 *वफ़ा की महक* उतर प्रीत दरिया उबर जाऊँ मैं। वफ़ा की महक से सँवर जाऊँ मै... Read more

ग़ज़ल

ग़ज़ल काफ़िया-आम रदीफ़ -कर बैठा तर्ज़-ग़रीब जान के हमको न..... *मुहब्बत के नाम* जो करना था मुझे वो आज काम कर बैठा। मैं ख़... Read more

ग़ज़ल

"कितना रुलाओगे" *************** खड़ी तन्हा किनारे सोचती कैसे भुलाओगे। करूँ फ़रियाद आ जाओ हमें तुम छल न पाओगे। अनबुझे प्रश्न ... Read more

ग़ज़ल

आशिक़ी रोग उल्फ़त का लगा हमको जगाया रातभर। जाम चितवन का चख़ा हमको सताया रातभर। प्रीत की तहरीर नज़रों से बयाँ की आपने वार सीन... Read more

कविता

“पिता” आँगन की फुलवारी हरदम लहू दे सींचते हैं जो, दु:ख हरते पोषण करते सबल सशक्त पिता हैं वो। प्रसव समय दे मातु सहारा परिवार ... Read more

ग़ज़ल

काफ़िया-आना रदीफ़-हो गया वज़्न-2122 2122 2122 212 *हमसफ़र* हमसफ़र का साथ जीने का ठिकाना हो गया। बाँट लीं तन्हाइयाँ ये दिल दिव... Read more

ग़ज़ल

काफ़िया-आन रदीफ़-ए जाने ज़िगर 2122 2122 2122 212 मान से ज़्यादा मिला सम्मान ए जाने ज़िगर। हो गए पूरे सभी अरमान ए जाने ज़िगर। ... Read more

ग़ज़ल

काफ़िया-आर रदीफ़-बिकते हैं अजब मालिक की दुनिया है यहाँ किरदार बिकते हैं। कहीं सत्ता कहीं ईमान औ व्यापार बिकते हैं। पड़ी हैं ... Read more

कविता

*किताब* -------------- आज किताबें व्यथा सुनातीं कैसा ये कलयुग आया है? मोबाइल हाथों में देकर पुस्तक का मान घटाया है। ज्ञान स्... Read more

ग़ज़ल

"मुहब्बत" ********* रोज़ आते रहे ख़्यालों में। गुल महकते रहे किताबों में। मुस्कुराने का' दौर आया है गीत छेड़ा गया बहारों मे... Read more

ग़ज़ल

काफ़िया-अता रदीफ़- कह रहा अपनी कहानी 2122 2122 2122 212 मंज़िलों को मैं भटकता कह रहा अपनी कहानी। रंज़ोग़म से मैं गुज़रता कह रह... Read more

ग़ज़ल

काफ़िया-अता रदीफ़-रहा 2122 2122 2122 212 दर्द आँखों से मेरी नासूर बन रिसता रहा। याद में तकिया भिगो हर ज़ख्म को सहता रहा। रौ... Read more

ग़ज़ल

काफ़िया-अत रदीफ़-रहे वज़्न-2122 2122 2122 212 मुफ़लिसी पे ए ख़ुदा तेरी सदा रहमत रहे। भूख से मरते जनों के मुल्क़ में बरकत रहे। ... Read more

ग़ज़ल

गोपालदास नीरज को समर्पित ग़ज़ल- काफ़िया-ईत रदीफ़-लिख दूँगी वज़्न-1222 1222 1222 1222 तुम्हारी याद में नीरज नया एक गीत लिख दूँग... Read more

ग़ज़ल

'मुहब्बत' काफ़िया-ओं रदीफ़-से वज़्न- 1222 1222 1222 1222 किया क़ातिल निगाहों ने मिलीं जब ये निगाहों से। मुहब्बत हो गई हमक... Read more

ग़ज़ल

काफ़िया -आ रदीफ़-लगा 2122 2122 212 "बेबसी" ******* छिन गईं खुशियाँ चमन लूटा लगा। आसमाँ भू पर गिरा ऐसा लगा। नफ़रतों के ब... Read more

ग़ज़ल

काफ़िया-ई रदीफ़-नहीं आती 2122 1212 22 आँख रोती नमी नहीं आती। बेवफ़ा है खुशी नहीं आती। रौंद के ज़िस्म को मसल डाला होठ पे अब... Read more

ग़ज़ल

काफ़िया-ई रदीफ़-नहीं आती 2122 1212 22 आँख रोती नमी नहीं आती। बेवफ़ा है खुशी नहीं आती। रौंद के ज़िस्म को मसल डाला होठ पे अब... Read more

ग़ज़ल

2122 2122 212 आशिकों का क्या ज़माना आ गया। दर्द सहकर मुस्कुराना आ गया। वस्ल की उम्मीद में दूरी बढ़ी सेज काँटों की बिछाना आ ग... Read more

ग़ज़ल

'रातभर' ख़्वाब आँखों को दिखा हमको जगाया रातभर। नूर चितवन का दिखा हमको सताया रातभर। ज़ुल्फ़ से रुख ढ़ाँक कर क्यों आपने पर्दा क... Read more

ग़ज़ल

'क्या यही प्यार है' काफ़िया-गी रदीफ़-देखो वज़्न-1222 1222 1222 1222 लुटाते प्यार ख़्वाबों में सनम की दिल्लगी देखो। समंदर अश... Read more