डॉ. रजनी अग्रवाल 'वाग्देवी रत्ना'

महमूरगंज, वाराणसी (उ. प्र.)

Joined January 2017

 अध्यापन कार्यरत, आकाशवाणी व दूरदर्शन की अप्रूव्ड स्क्रिप्ट राइटर , निर्देशिका, अभिनेत्री,कवयित्री, संपादिका समाज -सेविका।

उपलब्धियाँ- राज्य स्तर पर ओम शिव पुरी द्वारा सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार, काव्य- मंच पर “ज्ञान भास्कार” सम्मान, “काव्य -रत्न” सम्मान”, “काव्य मार्तंड” सम्मान, “पंच रत्न” सम्मान, “कोहिनूर “सम्मान, “मणि” सम्मान  “काव्य- कमल” सम्मान, “रसिक”सम्मान, “ज्ञान- चंद्रिका” सम्मान ,

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कविता

विषय - मकरन्द छंद विधान~ [ नगण यगण नगण यगण नगण नगण नगण नगण गुरु गुरु] (111122,111122,11111111,111122) 26 वर्ण,4 चरण,यति 6,6,8,6,... Read more

कविता

विषय - मकरन्द छंद विधान~ [ नगण यगण नगण यगण नगण नगण नगण नगण गुरु गुरु] (111122,111122,11111111,111122) 26 वर्ण,4 चरण,यति 6,6,8,6,... Read more

कविता

सिसकते वृक्ष बना मानव धरा दानव सिसक हर वृक्ष कहता है, घुटन जीने नहीं देती भयावित वृक्ष रहता है। हरित आभा धरा को दे किया श्रृं... Read more

मुक्तक

अँधेरे रास क्या आते उदासी सह नहीं पाया। तुम्हारे बिन गुज़ारीं रात तन्हा रहह नहीं पाया। मिला धोखा मुहब्बत में नहीं उम्मीद थी जिसकी-... Read more

कविता

प्राजक्ता का ललित सुमन बिखर रही है रजत चाँदनी छिटकाती यौवन मतवाला, प्राजक्ता के ललित सुमन का खिला यामिनी गात निराला। कोमल, ... Read more

कविता

"मैं कौन हूँ" ********* कौन हूँ मैं और क्या हूँ मैं? प्रश्न का एक जवाब हूँ मैं। (1)ईश्वर की भेजी दुनिया में कोमल, बलशाली रच... Read more

विरहवेदना

'चित चोर' (मत्तगयंद सवैया छंद) ************************* ... Read more

कविता

नाम-डॉ. रजनी अग्रवाल 'वाग्देवी रत्ना' पता-डी. 63/12 बी क.,पंचशील कॉलोनी, निअर विराट विला अपार्टमेंट, हरि सरदार की गली, महमूरगं... Read more

कविता

*कलुषित स्पर्श* रो रही कुदरत ज़मीं पर मृत अधर भी काँपते हैं, देश की बेटी लुटी है लोग चोटें नापते हैं। लूट तन बाहें घसीटीं चीं... Read more

कविता

*कलुषित स्पर्श* रो रही कुदरत ज़मीं पर मृत अधर भी काँपते हैं, देश की बेटी लुटी है लोग चोटें नापते हैं। लूट तन बाँहें घसीटीं ची... Read more

कविता

"नूतन वर्ष" ********* सभी ये साल नूतन हैं सभी यादें पुरानी हैं, गुज़र जाएँ यहाँ जो पल कहें अपनी कहानी हैं। सितम हर रोज़ झेले ह... Read more

कविता

"सलामे इश्क अठरा साल" सभी ये साल सोलह हैं,सभी यादें पुरानी हैं। गुज़र जाएँ यहाँ जो पल,कहें अपनी कहानी हैं। सितम हर रोज़ झेले है... Read more

"माँ"

"माँ" ------ बारिश की बूदों में माँ तू, प्रेम सरस बरसाती है। तेज धूप के आतप में तू ,छाँव बनी दुलराती है। तुझसे मेरा जीवन है... Read more

कविता

"माँ" ----- बारिश की बूदों में माँ तू, प्रेम सरस बरसाती है। तेज धूप के आतप में तू ,छाँव बनी दुलराती है। तुझसे मेरा जीवन है ... Read more

कविता

*बूढ़ा बरगद* ------------------- बूढ़ा बरगद ठूँठ बना अब याद करे बीता कल अपना, कहाँ खो गई भोर सुहानी बेबस मन अब देखे सपना। ... Read more

कविता

मुक्त काव्य समारोह - 240 दिन - गुरुवार दिनांक -२८/१२/२०१७ अध्यक्ष - आदरणीय श्री शिवानंद सहयोगी जी संचालक- आदरणीय श्री धीरज श्... Read more

कविता

"कौन मनाएगा दीवाली?" घर -आँगन लक्ष्मी बिन सूना, नहीं तेल, दीया, बाती। रौशन दुनिया लड़ियों से है, जगमग ज्योति नहीं भाती। मा... Read more

कविता

'दानी सुमन' ********* फूल खिलके यहाँ मुस्कुराने लगे। गीत मधुमास के गुनगुनाने लगे।। प्रीत चूनर पहन चाँदनी तन सजी। ओस मुक्... Read more

कविता

*यादें* आज फटे गत्ते की उस डायरी में पीछे छूटी यादों का एक पुलंदा मिला ... Read more

कविता

जन्मदिवस तन समर्पित मन समर्पित क्या तुझे उपहार दूँ जन्मदिन पर आज तेरे क्या तुझे सौगात दूँ? पुष्प वेणी केश में मधुमास बनकर जा ... Read more

कविता

*मैं नारी हूँ ,मैं नारी हूँ!!* ********************** मैं शक्ति स्वरूपा नारी हूँ जीवन में कभी न हारी हूँ मैं अद्भुत इक चिंगारी... Read more

कविता

"पर्यावरण बचाओ" **************** मानव दानव बने धरा पर #वृक्ष समूचे काट रहे हैं बेघर पंछी घर को तरसें #जंगल सारे पाट रहे हैं। #नी... Read more

कविता

"दोस्ती" दोस्ती दिलों में महकता अनमोल एक रिश्ता है मेरी दोस्त मन में बसा प्यारा सा फरिश्ता है। सुख में लुटाती प्यार जो नि... Read more

कविता

'रंग छटा गोकुल में बिखरी' ********************* साँवरि सूरत मोहनि मूरत नंद लला उर चैन चुरावत। आज जिया अकुलाय रहा अति मोर शिरोमण... Read more

कविता

बाल सखा चित चोर लियो तुम ढोल, मृदंग रहे मदमाए चंदन भाल लगा इठलावत श्वेत वसन तन खूब सुहाए। मोहनि मूरत सांवरि सूरत चंद्र सलौना रूप ल... Read more

कविता

मधुशाला” (माहिया छंद) ************ रातों को आते हो नींद चुरा मेरी मुझको तड़पाते हो। नैनों बिच तू रह दा मधुबन सा जीवन काँटे ... Read more

कविता

*किताब* -------------- आज किताबें व्यथा सुनातीं कैसा ये कलयुग आया है? मोबाइल हाथों में देकर पुस्तक का मान घटाया है। ज्ञान स्... Read more

कविता

*दीवारें* विश्वासी ईंटों से निर्मित थी अटल दीवारों की हसरत, लेप स्वार्थ का लगा दिया व्यापी जिसके भीतर नफ़रत। भाई-भाई के बी... Read more

कविता

*दीवारें* विश्वासी ईंटों से निर्मित थी अटल दीवारों की हसरत, लेप स्वार्थ का लगा दिया व्यापी जिसके भीतर नफ़रत। भाई-भाई के बी... Read more

कविता

*आँसू* नयनों के सागर मध्य रहा ये मुक्तक सीप समाहित सा, निष्ठुर जग मोल लगा न सका रह गया ठगा उत्साहित सा। विकल व्यथाएँ जलते उ... Read more

कविता

*दीवारें* विश्वासी ईंटों से निर्मित मजबूत दीवारों की हसरत, लेप स्वार्थ का लगा दिया व्यापी भीतर जिसके नफ़रत। भाई-भाई के बीच... Read more

आँसू

*आँसू* नयनों के सागर मध्य रहा ये मुक्तक सीप समाहित सा, निष्ठुर जग मोल लगा न सका रह गया ठगा उत्साहित सा। विकल व्यथाएँ जलते उ... Read more

कविता

"किन्नर" ****** किसे सुनाऊँ मौन व्यथा मैं कौन जगत में है अपना, जन्म लिया किन्नर का जब से लगता है जीवन सपना। मातृ कोख से जन्म... Read more

कविता

"वैश्या का क्यों नाम दिया?" ********************* वैश्या का अंतर्मन कहता तू पाकीज़ा बन मिसाल, देह रौंदते हैवानों से कर ले आज ल... Read more

कविता

"हे केशव नव अवतार धरो" घात लगाए बैठे दानव मानवता क्यों भूल गए? रक्त रंजित धरा पर हँसते देकर हमको शूल गए। संबंध भुला शकुनी म... Read more

कविता

"किसकी पराजय?" चली उम्मीद की आँधी जना जब पुत्र माता ने बजी शहनाइयाँ घर में दिया कुलदीप दाता ने। सजा अरमान की डोली झुलाया लाल को प... Read more

कविता

"शोषित धरा" ********** इंद्रधनुष से रंग चुराकर सुंदर रचना बाकी है दूर प्रदूषण जग से करके भू का सजना बाकी है। बंजर भू के कोमल उ... Read more

कविता

🌷मैं और मेरी माँ🌷 बारिश की बूदों में माँ तू, मेघ सरस बन जाती है। तेज धूप के आतप में तू ,आँचल ढ़क दुलराती है। तन्हाई में बनी ख... Read more

कविता

“देशभक्त की अभिलाषा” ***************** निष्ठुर मन की बुझी बाती सा, मैं क्यों जीवन मौन धरूँ? जी चाहे मैं रजत रेत सा हस्त पकड़... Read more

कविता

' कलम से ' ********* मैंने कलम हाथ में थामी नन्हें अक्षर लिखना सीखा। बना कलम को ताकत अपनी सुख-दुख उससे कहना सीखा। तन्हा स्... Read more

कविता

*खामोशी* ******* संवेगों की मौन व्यथाएँ ... Read more

कविता

“प्रकृति बचाओ” रक्त अश्रु बहा प्रकृति करे ये रुदन नहीं ध्वस्त करो मेरा कोमल बदन वृक्ष पवन जल तुमसे छिन जाएँगे प्रदूषित धरा पर जन... Read more

कविता

*🌷रिश्ते🌷* ************* प्रीत बरसती थी रिश्तों में अंगारे क्यों धधक रहे हैं ? बोए हमने फूल यहाँ थे काँटे फिर क्यों उपज रहे ह... Read more

कविता

विरह गीत (मत्तगयंद छंद, 7भगण +दो गुरु) ******************** ... Read more

कविता

"कशमकश" ********** ये कशमकश ये मुश्किलें भी हमको नाच नचाती हैं, सुलझ न पाए गुत्थी कोई उलझन ये बन जाती हैं। असमंजस का भाव ज... Read more

कविता

सफ़र ****** दुष्कर सफ़र काट जीवन में अंगारों के पार गया, नयनों से नीर बहा मेरे क्यों ना देखूँ ख्वाब नया। सुखद सलौना प्रेम ... Read more

कविता

"घूँट-घूँट ज़िंदगी" ************** बेबस, आहत ताने सह कर औरत घुट-घुट कर मरती है, नव रूप धरे इस जीवन में आँचल में काँटे भरती है।... Read more

कविता

"उदास पनघट" ************ छुपा कर दर्द सीने में नदी प्यासी बहे जाती। बसा कर ख्वाब आँखों में परिंदे सी उड़े जाती। निरखते बाँह फै... Read more

कविता

"प्यासे अधर" सदियों से प्यासे अधरों पर मधु मुस्कान कहाँ से लाऊँ, मूक व्यथा की पौध लगा कर सुरभित पुष्प कहाँ से पाऊँ? पीड़ा से ... Read more

कविता

'भिखारी हूँ ! भिखारी हूँ ! ******************* भूख जब रोंदती उर को निवाला खोजता था मैं। बहुत तकलीफ़ होती थी जेब जब नोंचता था ... Read more