डॉ. रजनी अग्रवाल 'वाग्देवी रत्ना'

महमूरगंज, वाराणसी (उ. प्र.)

Joined January 2017

 अध्यापन कार्यरत, आकाशवाणी व दूरदर्शन की अप्रूव्ड स्क्रिप्ट राइटर , निर्देशिका, अभिनेत्री,कवयित्री, संपादिका समाज -सेविका।

उपलब्धियाँ- राज्य स्तर पर ओम शिव पुरी द्वारा सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार, काव्य- मंच पर “ज्ञान भास्कार” सम्मान, “काव्य -रत्न” सम्मान”, “काव्य मार्तंड” सम्मान, “पंच रत्न” सम्मान, “कोहिनूर “सम्मान, “मणि” सम्मान  “काव्य- कमल” सम्मान, “रसिक”सम्मान, “ज्ञान- चंद्रिका” सम्मान ,

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कविता

"उदास पनघट" ************ छुपा कर दर्द सीने में नदी प्यासी बहे जाती। बसा कर ख्वाब आँखों में परिंदे सी उड़े जाती। निरखते बाँह फै... Read more

कविता

"प्यासे अधर" सदियों से प्यासे अधरों पर मधु मुस्कान कहाँ से लाऊँ, मूक व्यथा की पौध लगा कर सुरभित पुष्प कहाँ से पाऊँ? पीड़ा से ... Read more

कविता

'भिखारी हूँ ! भिखारी हूँ ! ******************* भूख जब रोंदती उर को निवाला खोजता था मैं। बहुत तकलीफ़ होती थी जेब जब नोंचता था ... Read more

कविता

' कलम से ' ********* मैंने कलम हाथ में थामी नन्हें अक्षर लिखना सीखा। बना कलम को ताकत अपनी सुख-दुख उससे कहना सीखा। तन्हा स्... Read more

कविता

"प्यासा सावन" ************ दुष्कर सफ़र काट जीवन में अंगारों के पार गया, नयनों से नीर बहा मेरे क्यों ना देखूँ ख्वाब नया। सुखद... Read more

कविता

"एकाएक नयन भर आए" ******************** छू कर मलय पवन ने तन को मीठा सा अहसास दिया एकाएक नयन भर आए मैंने तुमको याद किया। पृष्ठ... Read more

कविता

"ए ,मन कहीं ले चल" **************** किया उर घोंप कर छलनी मनुज ने मजहबी खंजर, बहा कर खून की नदियाँ हँसे अब पूर्ण कर मंजर। परिंद... Read more

कविता

*आँचल में है दूध और आँखों में पानी* ********************************** सुला कर गोद में अपनी झुलाया पूत को पलना तड़प कर रो उठी... Read more

कविता

"शारदे माँ!" शारदे माँ ! पद्म आसन, श्वेतवर्णी आप हो। ज्ञान दे #चेतन बनातीं गौरवर्णी आप हो। हो # विलय उर में हमारे मातु वीणा व... Read more

कविता

🌷आशा🌷 आशाओं के स्वर्ण कलश ने बूँद एक जब छलकाई। उर में आशा का दीप जला पुलक-पुलक कर मुस्काई।। पुष्प चक्षु से तंद्रा हरके हरि... Read more

कविता

*पल* ... Read more

कविता

"परिंदे" आँखों में परिंदे पाले थे उम्मीद लगा इंसानों की मतवाले दो खग झूम उठे भूले हस्ती दीवानों की। भाल लगा कर चंदन टीका मजह... Read more

कविता

*हिंदी को सम्मान दो* संस्कृत से जन्मी हिंदी ने भाषा का संसार दिया, ... Read more

कविता

"होली का रंग फीका लागे" ********************* सोच रही हूँ कलम हाथ ले रँग दूँ सबको होली में, फाग बयार झूम कर कहती चल गरीब की खोल... Read more

कविता

'रंग छटा गोकुल में बिखरी' ********************* साँवरि सूरत मोहनि मूरत नंद लला उर चैन चुरावत। आज जिया अकुलाय रहा अति मोर शिरोमण... Read more

कविता

'उजाला रास ना आया' ****************** कहूँ किससे व्यथा अपनी यहाँ कितना सहा मैंने। दरिंदों से हुई लाचार लब को सिल लिया मैंने। ... Read more

कविता

*मैं नारी हूँ ,मैं नारी हूँ!!* ***ॆ******************* मैं शक्ति स्वरूपा नारी हूँ ना कभी किसी से हारी हूँ मैं अद्भुत इक चिंगार... Read more

कविता

अटल बिहारी बाजपेई को श्रद्धांजलि "मौन हो गया विश्व पटल" ******************** अटल, अडिग, समता संवाहक जग को राह दिखाता था। हिंद ... Read more

कविता

"बलात्कार" ********* बेटी होना पाप नहीं कुकर्म सोच कराती है मुस्कान खिली रौंदी कलियाँ दानवता हर्षाती है। खींच बाहें मुँह दबा... Read more

कविता

"बलात्कार" ********* रो रही कुदरत जमीं पर मृत अधर भी काँपते हैं, देश की बेटी लुटी है लोग चोटें नापते हैं। याद उस दुर्गंध की ... Read more

कविता

"मैं कौन हूँ" ********* कौन हूँ मैं और क्या हूँ मैं? प्रश्न का एक जवाब हूँ मैं। (1)ईश्वर की भेजी दुनिया में कोमल, बलशाली रच... Read more

कविता

"उलझन" ******* जीवन में आई बाधाएँ हमको नाच नचाती हैं, सुलझ न पाए गुत्थी कोई उलझन ये बन जाती हैं। असमंजस का भाव जगातीं, दि... Read more

"समर्पण"

"समर्पण" ******** तन समर्पित मन समर्पित क्या तुझे उपहार दूँ जन्मदिन पर आज तेरे क्या तुझे सौगात दूँ? पुष्प वेणी केश में मधुमा... Read more

कुल्हड़ की चुस्की (कविता)

"कुल्हड़ की चुस्की" **************** घाट किनारे ठाट-बाट से यारों की महफ़िल सजती थी, चाय के संग धूम धड़ाका कुल्हड़ की प्याली ज... Read more

कुल्हड़ की चुस्की

"कुल्हड़ की चुस्की" **************** घाट किनारे ठाट-बाट से यारों की महफ़िल सजती थी, चाय के संग धूम धड़ाका कुल्हड़ की प्याली ज... Read more

नारी तख़्तोताज़ पलटती

"नारी तख़्तोताज़ पलटती" ********************* अधिकारों का मोल जानकर नारी तख़्तोताज़ पलटती, धर्म, अर्थ, संसद, न्यायालय राजनीति... Read more

बेटी बचाओ

बेटी बचाओ" अधखिली कली गर्भ में कहे दो वचन माँ-पापा स्नेह से अभिसिंचित कर बगिया का फूल बनाओेगे। नयनों की ज्योति बनकर मै... Read more

बेटी बचाओ

बेटी बचाओ" अधखिली कली गर्भ में कहे, दो वचन माँ पापा, ... Read more

शारदे की आराधना

सोमवार दिनांक-19.2.2017 रचनाकार-डॉ. रजनी अग्रवाल 'वाग्देवी रत्ना' प्रदत्त समानार्थी शब्द- चेतन, विलय, मन, पापी सिंदूरी, संगिनी, ... Read more

उदास पनघट

"उदास पनघट" ************ छुपा कर दर्द सीने में नदी प्यासी बहे जाती। बसा कर ख्वाब आँखों में परिंदे सी उड़े जाती। निरखते बाँह फै... Read more

फागुन

फागुन किरीट सवैैया छंद 211×8 गोकुल में प्रभु रास रचावत गोपिन ग्वाल धमाल मचावत। होठ धरी मुरली मन भावत छीन सखी तरु शाख लुकावत। ... Read more

भिखारी हूँ! भिखारी हूँ!

'भिखारी हूँ ! भिखारी हूँ ! ******************* भूख जब रोंदती उर को निवाला खोजता था मैं। बहुत तकलीफ़ होती थी जेब जब नोंचता था ... Read more

'उजाला रास ना आया'

'उजाला रास ना आया' ****************** कहूँ किससे व्यथा अपनी यहाँ कितना सहा मैंने। दरिंदों से हुई लाचार लब को सिल लिया मैंने। ... Read more

हाय पड़ोसन(हास्य रचना)

मुक्त काव्य स हास्य-रचना विधा-16, 14 "हाय पड़ोसन" ****************** डाल पड़ोसन तिरछी नज़रें मंद-मंद मुस्काती है सुखा के... Read more

उदास पनघट

"उदास पनघट" ************ छुपा कर दर्द सीने में नदी प्यासी बहे जाती। बसा कर ख्वाब आँखों में परिंदे सी उड़े जाती। निरखते बाँह फै... Read more

भिखारी हूँ! भिखारी हूँ!

'भिखारी हूँ ! भिखारी हूँ ! ******************* भूख जब रोंदती उर को निवाला खोजता था मैं। बहुत तकलीफ़ होती थी जेब जब नोंचता था ... Read more

हिंदी को सम्मान दो

*हिंदी को सम्मान दो* संस्कृत से जन्मी हिंदी ने भाषा का संसार दिया, ... Read more

आ जाती है मुझको हिचकी :कविता

आजाती है मुझको हिचकी ***************** चीनी मिट्टी के प्यालों में मधुर छुअन अहसास नहीं है, चाय मिली जब कुल्हड़ में तो मिटी अधर ... Read more

दोस्ती (कविता)

*दोस्ती* ****** दोस्ती का नायाब तोहफ़ा खुदा ने दे दिया कुछ न देकर भी मुझो सब कुछ दे दिया, ऐ दोस्त ! नाज़ करती हूँ तेरी दोस्ती ... Read more

"उलझन" कविता

विषय--"उलझन" ************** जीवन में आई बाधाएँ हमको नाच नचाती हैं, सुलझ न पाए गुत्थी कोई उलझन ये बन जाती हैं। असमंजस का भा... Read more

*ज़िंदगी* (कविता)

"ज़िंदगी" (कविता) ******* अजब पहेली बनी ज़िंदगी उलझ गई जज़्बातों में मोती के दानों सी बिखरी फ़िसल गई हालातों में, कालचक्र सा घ... Read more

*ज़िंदगी* (कविता)

"ज़िंदगी" (कविता) ******* अजब पहेली बनी ज़िंदगी उलझ गई जज़्बातों में मोती के दानों सी बिखरी फ़िसल गई हालातों में, कालचक्र सा घ... Read more

*ज़िंदगी* (कविता)

"ज़िंदगी" (कविता) ******* अजब पहेली बनी ज़िंदगी उलझ गई जज़्बातों में मोती के दानों सी बिखरी फ़िसल गई हालातों में, कालचक्र सा घ... Read more

"खामोशी" कविता

*खामोशी* ******* संवेगों की मौन व्यथाएँ ... Read more

"जंग" कविता

विषय- "जंग" ****** मापनी-1222×4 बना कर ज़िंदगी को जंग दानवता बढ़ाते हैं सियासी चाल शतरंजी बिछा शकुनी लड़ाते हैं बदल कर गि... Read more

राख(कविता)

*राख* ****** सुला कर गोद में अपनी झुलाया पूत को पलना तड़प कर रो उठी ममता पड़ा अपमान जब सहना। बह रहे आँख से आँसू निकल घर द्वार ... Read more

कारगिल विजय दिवस कविता

"कारगिल विजय दिवस" मापनी-१२२२×४ लगा कर धूल मस्तक पर बहा कर प्रेम की धारा। ... Read more

कैसे इंसान हो कि हर बात पे हँस देते हो??

कैसे इंसान हो कि हर बात पे हँस देते हो?? ****************************** कभी खुद को भुला गैरों के लिए हँस देते हो कैसे इंसान हो कि... Read more

"सिसकती पशुता"

"सिसकती पशुता" ************ मधुर वचन से आच्छादित नर नाग सरीखे डँसते हैं मौका परस्त घात लगाएँ घर में गिरगिट पलते हैं। ताक ल... Read more

माहिया छंद

"मधुशाला" (माहिया छंद) ************ रातों को आते हो नींद चुरा मेरी मुझको तड़पाते हो। नैनों बिच तू रह दा मधुबन सा जीवन काँटे... Read more