मैंने हिंदी को अपनी माँ की वजह से अपनाया,वह हिंदी अध्यापिका थीं।हिंदी साहित्य के प्रति उनकी रुचि ने मुझे प्रेरणा दी।मैंने लगभग सभी विश्व के और भारत के मूर्धन्य साहित्यकारों को पढ़ा और अचानक ही एक दिन भाव उमड़े और कच्ची उम्र की कविता निकली।वह सिलसिला आज तक अनवरत चल रहा है।कुछ समय के लिये थोड़ा धीमा हुआ पर रुका नहीं।अब सक्रिय हूँ ,नियमित रुप से लिख रहा हूँ।जब तक मन में भाव नहीं उमड़ते और मथे नहीं जाते तब तक मैं उन्हें शब्द नहीं दे पाता।
लेखन :- राजेश”ललित”शर्मा
रचनाधर्म:-पाँचजन्य में प्रकाशित “लाशों के ढेर पर”।”माटी की महक” काव्य संग्रह में प्रकाशित।

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महफ़िल

महफ़िल ----------———- ये वक़्त की महफ़िल है जनाब सब आयेंगे मिलने वाले तुम भी आना घर पर ही रख आना अपना अभिमान अ... Read more

आज के शेर

आज के शेर —————————- ख़ूब मलिये, ज़ख़्मों पे नमक, दर्द की इन्तहा क्या है!! हम जानते हैं। ———————- अपना पता बदलि... Read more

तलाश अभी जारी है

सोलहवीं लोकसभा के चुनाव आ गये। नेता अपने घर से निकल कर मंचो पर सजने लगे हैं।उनकी इन बातों से उपजी यह कविता:- ----------------------... Read more

आ गये राजे महाराजे

चुनावी सरगर्मी मे अपनी राह बनाती कविता -------------------------------------------------------------- आज के राजे-महाराजे ----... Read more

शब्द

' ----------------------------- शब्दों मत रुको कुछ कहो निरर्थक सा मत पड़े रहो शिला सी अल्हड़ नदी सा बहो वक्त के अनुसार बदलो ... Read more

गजल

"ग ज़ ल" ————————- घाव पर चोट बनाये रखिये; बेअसर न हो,दर्द बनाये रखिये। दुश्मन हो,दोस्ती,बनाये रखिये; कम हैं अभी नश्तर चुभा... Read more

नवागंतुक एवं परंपराऐ

लेख:- ----------------------------------------- "नवागंतुक एवं परंपरायें" --------------------------- कु... Read more

'नव प्रभात'--------"उठो सूरज-उगो सूरज"

'उठो सूरज-उगो सूरज" ------------------------------ चलो उठो सूर्य नव वर्ष आया सब प्रतीक्षारत हैं नव प्रभात पर सर्द सुबह पर गर्... Read more

क्षणिकायें

क्षणिकायें अक्सर लिखता हूं:लिखने की प्रेरणा मगर कवि बंधुओं और पाठकवृंद से मिलती है।आज की क्षणिका प्रस्तुत है ----------------------... Read more

'अविश्वास'

शक करना वो भी बेवजह ।पति-पत्नी, समाज में एक दूसरे से ;हर जगह शक का घेरा है।चार अशआ'र कुछ कह रहे हैं:- -----------------------------... Read more

इज्जत बचाती एक लड़की

आजके समय बेटियां कहीं भी सुरक्षित नहीं है,इस संदर्भ में अपने विचार इस कविता के माध्यम से कहने का प्रयास किया है। -----------------... Read more

मां तपस्विनी

--------------------------------------------- 'मां तपस्विनी' ----------------------------------------------- है कहा... Read more

मां तपस्विनी

यह कविता मां के अथक परिश्रम और निस्वार्थ भाव से सेवा करते हुए परिवार को एकजुट रखने का प्रयास करते हुए कठिन तपस्या करती है पर बदले मे... Read more

मां तपस्विनी

यह कविता मां के अथक परिश्रम और निस्वार्थ भाव से सेवा करते हुए परिवार को एकजुट रखने का प्रयास करते हुए कठिन तपस्या करती है पर बदले मे... Read more

सीले रिश्ते,कौन सिलेगा?

सीले रिश्ते कौन सिलेगा ? सुई जोड़ेगी,पर हर जोड़ पर चुभेगी। धागा उभरेगा ! रिश्ता फटा ही रहेगा, भीतर ही भीतर जुड़ा नज़र आयेगा, सि... Read more

'याद भी;नीरज भी'

"यादें भी ;'नीरज' भी" ----------------------------------- "कारवाँ गुज़र गया ग़ुबार देखते रहे-----" ये गीत हमें सिनेमा हाल तक खींच ... Read more

आई बरखा

आई बरखा --------------------- चैत पर चढ़ बैठा जेठ जेठ पर चढ़ बैठा आषाढ़ पुरवा बैठी बाट निहार सीने पर चढ़ सावन बैठा जैसे सबसे ... Read more

"जी तो रहा हूँ "

"जी तो रहा हूँ " ---------------- जी तो रहा हूँ मगर ऐ ज़िंदगी तुझसे कटा कटा सा हूँ ध्यान से पढ़ना ज़रा ये खबर अख़बार फटा फ... Read more

बवाना की आग

"बवाना की आग" ------------------------ बवाना की आग सब जल गया बची सिर्फ राख ही राख कुछ बेक़सूर लाशें कुछ लाचार सिसकियाँ दमघो... Read more

'बसंत आ गया'

शरद ऋतु में गर्मी की आहट अर्थात बसंत आने का संकेत।कुछ संकेत प्रकृति भी देती है।इसी से निकली'बसंत आ गया' -------------------------- ... Read more

अरे,ग़रीबी !

सदियों से ग़रीबी और अमीरी के बीच खाई पाटने की कोशिश की जा रही है पर इसमें सफलता नहीं मिल पाई।ग़रीब और ग़रीबी हाथ में हाथ थामे अब तक ... Read more

"तद्भव"

कापी,पेस्ट,क्लिक के ज़माने में मौलिकता कहीं खोती जा रही है।आपकी रचना कोई चुरा कर आपके सामने प्रस्तुत करता है तो लगता है पढ़ी हुई/सुन... Read more

"धुँध "

प्रदूषण के चलते आज पृथ्वी के अस्तित्व पर ख़तरा मँडरा रहा है।हवा का स्तर इतना ख़तरनाक हो गया है कि साँस लेना मतलब ज़हर लेना है और हम ... Read more

"मजमा"

चुनाव नज़दीक आते ही नेता "मजमा" लगाना शुरु कर देते हैं। विभिन्न वायदे फेंकते हैं,आश्वासन उछालते हैं;जो नेता लोगों को आकर्षित करता है... Read more

लफ़्ज़ो में न दफ्नाओ

दो क्षणिकायें अलग अलग संदर्भों में प्रस्तुत हैं आशा है पसंद आयेंगी। ------------------ लफ़्ज़ों में न दफ्नाओ --------------- लफ़... Read more

लफ़्ज़ो में न दफ्नाओ

दो क्षणिकायें अलग अलग संदर्भों में प्रस्तुत हैं आशा है पसंद आयेंगी। ------------------ लफ़्ज़ों में न दफ्नाओ --------------- लफ़... Read more

बरस पड़ी आँखें

"बरस पड़ी आँखें" "क्षणिका" ------------------- कल बादल भी नहीं थे तन्हा भी नहीं था सब थे आस पास मन भी नहीं था उदास ! ... Read more

"मन की खिड़की"

यह कोई कविता नहीं;मन से निकली आनायास एक आवाज़ है जो मन से निकलता गया;ढलता गया ;मैंने कविता मान लिया ;आप मानोगे तो ठीक नहीं तो यूँ ही... Read more

सारोकार:-"शिक्षक दिवस"---प्राचीन शिक्षा

सारोकार:---------"शिक्षक दिवस" ------------------------- "प्राचीन शिक्षा पद्धति-गुरुकुल"---भाग-(१) ------------------------------... Read more

दो रचनायें प्रकाशनार्थ

दो रचनायें पाठकों के सम्मुख हैं।प्रतिक्रिया चाहूँगा। ----------------- "रुँधे गले से" ----------------- रुँधे गले से मत बोल क... Read more

सारोकार:- "पत्रकारिता--गिरता स्तर"

"पत्रकारिता--गिरता स्तर" -------------------- पत्रकारिता की शुरुआत भारत में उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम चरण में हुई थी।उन दिनों प्र... Read more

अपने अपने कृष्ण

जब भी हम संकट में होते हैं तो हम माँ और भगवान को याद करते हैं।यदि उस घड़ी कोई सहायतार्थी मिल जाये तो वह सारथी कृष्ण जैसा लगता है। -... Read more

मुस्कुराती रहो मोनालिसा

तेज़ी से बदलती हुई दुनिया में घटनाओं के प्रति हम उदासीन होते जा रहे हैं जैसे हमारे घर में लगी टी वी के उपर मोनालिसा की तस्वीर:- ---... Read more

मरती धरती

वैज्ञानिकों के बार बार चेतावनी देने के पश्चात् भी पर्यावरण में सुधार होने की बजाय हानि ही हो रही है ,जिससे धरती पर जीवन को ख़तरा हो ... Read more

मन खट्टा

"मन खट्टा" ----------------- मन खट्टा हो गया चल यार कैसी बात करता है मन कभी मीठा हुआ कभी सुना क्या? नहीं न यूँ ही जमी रहेगी ... Read more

अकेलापन भी साथी

अकेलापन भी साथी ----------------------- आज अकेलेपन को ही बना लेते हैं साथी फिर चलते हैं तन्हाईयों में फिर देखते हैं क्या कह... Read more

इंतज़ार मत करना

"इंतज़ार मत करना" ------------------------- इंतज़ार मत करना अब मेरा थक गये हैं पाँव मुश्किल है चलना मोड़ अभी भी बहुत हैं ज़... Read more

"दम लगा के हई शा"

"दम लगा के हई शा" -------------------- दम लगा के हईशा हिम्मत न हार थक मत अब चल उठ जा चल उठ मत घुट घुट घुट कर मर जाएगा ... Read more

"जले हाथ"

"जले हाथ" --------------- डालोगे ग़र हाथ पराई आग में हाथ फिर अपने ही जला करते है कितना लगाओ तुम गले दुश्मन को अपने भी यह... Read more

उलझे धागे

"उलझे धागे"मन की उलझन को धागों की उधेड़बुन की तरह सुलझाने का प्रयास कर रही है।कैसे आप पढ़ कर प्रतिक्रिया दें। ---------------------... Read more

थका थका दिन

अकेलेपन से व्यथित मन कोई साथी ढूँढ रहा है।पर जब उसे अपने आप से बात करने की फ़ुर्सत नहीं तो कोई दूसरा क्यों करे:- ------------------... Read more

क्षणिका

"क्षणिका" ------------------- पहले भी अजमाया था अब भी अाज़मा ले वैसे का वैसा हूँ जैसा पहले था अब भी वैसा हूँ क्या करूँ आ... Read more

प्रयोग करो:फेंक दो

कभी कभी यूँ लगता है कि कुछ लोग आप के साथ आप को निजी स्वार्थ के लिये इस्तेमाल करते है और फिर भूल जाते हैं जैसे कोई पान कार्य चूस ले य... Read more

"बहेलिया"

अभी उतर प्रदेश में एक बेटी के साथ छेड़खानी की घटना में जो कुछ सरेराह हुआ उसने अंत:कर्ण झझकोर दिया।उसी घटना का परिणाम;- ------------... Read more

"मन का चोर"

"मन का चोर" दो भागों में रची कविता है जिसमें एक बाहरी चोर और दूसरी कविता में चोर भीतर का ही है पर एक बात जो दोनों में है वह यह कि डर... Read more

"सच की गुंजाईश "

आजकल सच को भी अपनी "सत्यता" की गवाही तलाशनी पड़ती है।सत्य के अवसर तलाशती कविता:- --------------------- "सच की गुंजाईश" -------... Read more

ग़ज़ल

"ग ज़ ल" ------------------------- घाव पर चोट बनाये रखिये; बेअसर न हो,दर्द बनाये रखिये। दुश्मन हो,दोस्ती,बनाये रखिये; कम है... Read more

"लघु कविता"

"लघु कविता" ------------------- नये घाव की क्या है जल्दी पुराना तो भरने दो अभी उमर है जो भी बाकी मिल जायेगा नसीब में घा... Read more

"हमदर्द"

कभी कभी होता है हम किसी भी जानने वाले से हम अपना दु:ख दर्द बाँटना चाहते हैं कोई हमदर्द बनाना चाहते हैं। -----------------"हमदर्द... Read more

"झूठ"

" झूठ" कलयुग का महत्वपूर्ण तत्व है।सत्य कितना संभाल कर रखना पड़ता है।देखें कैसा लगता है यह "झूठ" आप को; ---------------------------... Read more