Rajesh Kumar Kaurav

गाडरवारा

Joined January 2017

उच्च श्रेणी शिक्षक के पद पर कार्यरत,गणित विषय में स्नातकोत्तर, शास उ मा वि बारहा बड़ा, जिला नरसिंहपुर म प्र । विद्यार्थी काल से ही गीत, कविता, कहानी,लेख आदि लिखने का शौक, विभिन्न क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय समाचार पत्रों में रचनाएं प्रकाशित।

Books:
निरंक

Awards:
स्थानीय, जिला स्तरीय,साहित्यसंगम, प्रतिलिपि, जनभाषा हिन्दी आदि मंच से

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राधेकृष्ण (कविता)

कविता राधेकृष्ण का जाप करें, एक नाम दो रूप हैं। राधा भी तो कृष्ण रूप कृष्ण ही राधा रूप हैं। कृष्ण बिन राधा आधी राधा बिन कृष्... Read more

बुद्धिजीवी

बुद्धिजीवी अफसोस है आधुनिक युग में बुद्धिजीवी लोग चाँद मंगल की सोचते हैं। लाखों करोड़ों का खर्च सालों साल से करते फिर भी अस... Read more

बुद्धिजीवी

बुद्धिजीवी अफसोस है आधुनिक युग में बुद्धिजीवी लोग चाँद मंगल की सोचते हैं। लाखों करोड़ों का खर्च सालों साल से करते फिर भी अस... Read more

चेतावनी(मनहरण घनाक्षरी)

पुलवामा जैसी चाल आंतक का रचा जाल पुलिस का देख हाल गर्व होना चाहिए। कश्मीर की देखभाल पुलिस रही सम्हाल चहुँओर खुशहाल तारीफ तो च... Read more

ड़ीजीलेप(व्यंग्य कविता)

मोबाइल मत देना छोटे बच्चों के हाथ। कल तक कहते थे विशेषज्ञ दिनरात। आँखों को हानिकारक बिगाड़े मानसिक स्वास्थ्य। छिना छपटी में पिट... Read more

गृहे गृहे यज्ञ (चौपाई छंद)

चौपाई छंद मृत्युल़ोक पर संकट आया*देश देश कोरोना छाया। देव दनुज धर मानव रूपा*निज कृत कर्म करहिं ज्यों भूपा। रूप रंग पहचान न होई*धर... Read more

श्रद्धाँजलि

*श्रद्धाँजलि* जलियांवाला बाग दिवस, याद हमें दिलाता है। वीर शहीदो के चरणों शीश स्वयं झुक जाता है। गुलामी के अत्याचारों की याद... Read more

रक्षा करो

रक्षा करो(वर्ण पिरामिड़) हे वीर लंगूर हनुमान पवनपुत्र केसरी नंदन रोग फैला है भारी । श्री राम सेवक बजरंगी सुनो पुकार जग ... Read more

रक्षा करो

रक्षा करो (वर्ण पिरामिड) हे वीर लंगूर हनुमान पवनपुत्र केसरी नंदन रोग फैला है भारी । श्री राम सेवक बजरंगी सुनो पुकार ... Read more

लड़ना होगा

ताटक छंद तैयार सभी भारत वासी,लड़ाई बहुत होना है। अपनी सुरक्षा करते रहें ,कोरोना को धोना है। सुनो पहले धर्मांधता से, बाहर भी आना ... Read more

श्रीराम संदेश

संदेश यही श्रीराम दिया धर्म एक ही मानवता। सब राष्ट्र मिल एक होगें एक विश्व की राष्ट्रयिता। भूल कर मतभेद आपसी सीखेंगे बंधुत्व... Read more

आर्त पुकार

*मनहरण घनाक्षरी* अब आओ भगवान पुकार रहा इंसान कोरोना से परेशान तू ही एक सहारा। निकल रही है जान भूले सब पहचान दूर करे रोगी ... Read more

कोरोना पहचान

कुण्डलिया छंद 01 सुनो वायरस अब नया,कोरोना हे जान । फैल गया संसार में,ड़रता हर इंसान। ड़रता हर इंसान, ट्रंप अब करे नमस्ते। नहीं मि... Read more

शिवभाव

*शिवभाव* *मनहरण घनाक्षरी* आत्म रूप शिव जान अर्थ होता है कल्याण शरीर नंदी समान शिव वाहन जानिए। पवित्रता रख ध्यान आचरण ... Read more

गणतंत्र दिवस

*गणतंत्र दिवस* गणतंत्र दिवस है खुशियों भरा जश्न है। गुलामी की खबर है आजादी का असर है। अपना संविधान है बहुमत प्रधान है। धर... Read more

भीष्म पितामह

*भीष्म पितामह* गंगा पुत्र भीष्म खास रच गये इतिहास। पिता सुख धर्म मान प्रतिज्ञा संकल्प है। ब्रह्मचार्य पालन का सत्ता सुख मानव... Read more

संस्कृति अनमोल

सावधान क्यों मना रहें जश्न कलेंडर भर ही तो बदला है। ईस्वी सन् हो गया अब बीस हिंदुस्तानी साल न बदला है। भूल गये नवबर्ष हमारा हम ... Read more

नैतिकता

है कहाँ समझ आधुनिक संसार अब भूल गए हम नैतिकता का पाठ। ये नग्न फैशन वेशभूषा मर्यादा हीन बोलचाल आज बड़प्पन के ठाठ। लो ज... Read more

जीत कहाँ(कविता)

अदालत का फैसला इतिहास बन गया। वर्षों पुराना विवाद सुलझ गया श्रीमान।। चार सौ साल से ज्यादा समय तक सताया। बहुत हुए शहीद होते रह... Read more

दीप जलाये (गीत)

दीप जलाये (गीत) घर आंगन दीपक से जगमग, मन मंदिर से अज्ञान भगाये। बुद्धि विवेक उल्लास भर के, आओ घर घर दीप जलाये। लक्ष्मी पूजन हो... Read more

ॐ नमः शिवाय

ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय। भज ले मन शिव न कोई सहाय। शिव रहस्य को जो जन जाने। शिव भक्त उसको जग माने। शिव परिवार की देख विषमता, जीन... Read more

संविधान शर्मसार हुआ (कविता)

संविधान शर्मसार हुआ ****************** संसद में शपथ देखकर, संविधान शर्मसार हुआ। किसी ने बोला जय श्री राम , कुछ अल्ला से मांगी... Read more

वर्ण पिरामिड (मैं कौन हूं?)

मैं पूछ रहा हूं स्वयं से अपना राज मिल रहा साथ जीवन में सबका। ये नहीं संयोग मैं कौन हूं अनजान सा पाकर बंधन भूला पहचान। ... Read more

होली का रंग-बहनों के संग (कविता)

*होली का रंग बहनों के संग* ******************** भाई को चिंतित देख, होलिका वेदी चढ़ी। ऐसा सच्चा प्रेम स्नेह , बह... Read more

श्रीमद्भगवद्गीता ?

अद्भुत ग्रंथ है श्रीमद्भगवद्गीता। प्रभू की अमृतवाणी है गीता। प्रिय सखा की सलाह है गीता। ऋषियों की सिद्धि है गीता। गुरु का उपदे... Read more

भाव, शब्द

भाव शब्द शब्द पुष्प है भाव मूल है, बिन मूल के शब्द शूल है। भाव की है अभिव्यक्ति, बिन भाव शब्द निर्मूल है। परमात्मा की भाव शक्ति... Read more

भाव, शब्द

भाव शब्द शब्द पुष्प है भाव मूल है, बिन मूल के शब्द शूल है। भाव की है अभिव्यक्ति, बिन भाव शब्द निर्मूल है। परमात्मा की भाव शक्ति... Read more

पारसमणी मंत्र है मां

मेरी तेरी सबकी मां, विविध रूप पर एक है मां। अभिव्यक्ति की प्रथम किरण, सृष्टि की आधार है मां। सुबह ‌है ऊषा शाम की संध्या, चढ़त द... Read more

पारसमणी मंत्र है मां

"मां" मेरी तेरी सबकी मां, विविध रूप पर एक है मां। अभिव्यक्ति की प्रथम किरण, सृष्टि की आधार है मां। सुबह ‌है ऊषा शाम की संध्या, ... Read more

अटूट बंधन (वर्ण पिरामिड कविता)

अटूट बंधन (वर्ण पिरामिड कविता) क्यों रही सदा से भारत में दाम्पत्य जोड़ी सफल जीने में गौरवमयी पद्धति। थी सारी दुनिया अनजान... Read more

मतदान (कविता)

मतदान प्रजातंत्र में पर्व बड़ा यह, मतदान राष्ट्र की पूजा है। ऊच नीच व जाति भेद का, स्थान नहीं कोई दूजा है। सबको अवसर सबकी इच्छा... Read more

अटल अटल (कविता)

बिषम परिस्थितियों से टकराना, जीवन जिसका लक्ष्य रहा था। कभी न हारा कभी न टूटा, संघर्ष भरा जिसका जीवन था। हिंद देश के स्वाभिमान हि... Read more

ये ‌‌‌युग (वर्ण पिरामिड)

ये युग बदल रहा है रे प्रगतिशील परिवर्तन है संकट तो आवेगे। जो लोग चाहते सुविधाएं सरलता से उन्हें पराक्रम अपनाने ही होगें... Read more

शालीनता (वर्ण पिरामिड, कविता)

ये पप्पू क्या किया सारा देश शर्मशार है मुखिया बनना रहा न आसान है। तू कब समझा तेरे लिए मां कुर्बान तेरी खातिर सहती रहती... Read more

क्यों हम पीछे हैं (कविता)

क्यों हम पीछे हैं (कविता) विकास की गति बहुत तेज, फिर भी क्यों हम पीछे हैं। दशकों से दौड़ रहे सब, फिर आगे क्योंनहीं बढते हैं। सी... Read more

कह कर बदलना (कविता)

कह कर बदलना, आम बात है जी। जनसाधारण ही नहीं, राजनीति में खास है जी। जो जितना बदलता, चर्चा में बनता है जी। झूठ बोलने का चलन, ब... Read more

चलन मेरे देश का

कैसा है यह‌ चलन , मेरे भारत देश का। दोषी की जमानत पर, माहोल बनता जश्न का‌। आतिशबाजी हर तरफ, जयकार ढ़ोल मृदंग का। लगता विजयश्... Read more

शुभकामना नवसंवत्सर की (कविता)

नवसंवत्सर आ गया अब, खुशियों का त्यौहार। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि, सृष्टि सृजन आधार। सृष्टिकर्ता ब्रह्मा जी दीना, संयोगों का उप... Read more

योद्धा नहीं सिर्फ वो (कविता)

योद्धा नहीं सिर्फ वो, जो रणभूमि को जाते। समाज में रहने वाले कब, उनसे कम आंके जाते। ना देखा युद्ध क्षेत्र कभी, ना तलवार गही हा... Read more

योद्धा नहीं सिर्फ वो (कविता)

योद्धा नहीं सिर्फ वो, जो रणभूमि को जाते। समाज में रहने वाले कब, उनसे कम आंके जाते। ना देखा युद्ध क्षेत्र कभी, ना तलवार गही हा... Read more

भूलें नहीं नववर्ष

भूलें नहीं नववर्ष हमारा, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को आता है। सृष्टि का यह जन्म दिवस, सत्य ,सनातन , शाश्वत है। वह असीम संस्कृति हमार... Read more

नववर्ष पर सूर्य संदेश

नववर्ष पर भेजा सूर्यदेव ने, प्रथम किरण के साथ संदेश। चुनौतियों से भरा वर्ष है, सम्हलो, छोड़ो राग द्वेष। बीते वर्षों से भी सीखों,... Read more

युग सृजेता सम्मेलन

युग सृजेता सम्मेलन गूंज रही है दसों दिशाएं, शंखनाद अब व्याप्त है। युवा क्रांति की हलचल से, युग परिवर्तन की आश है। उत्तर-दक्षि... Read more

अभिव्यक्ति (कविता)

अभिव्यक्ति की आज़ादी है, जो चाहो ‌सो बोलो। पर वाणी की भी मर्यादा है, जहर न उसमें घोलो। मीठी भाषा में कह सकते, अच्छे हो या बुरे ... Read more

भर्ती(व्यंग्य कविता)

पटवारी की भर्ती पर, अभी नहीं कोई भरोसा। यू टर्न कब हो जावे, रखना सदा अंदेशा। अतिथि बनने फार्म भरे, लगभग माह जुलाई में। दिसंबर ... Read more

गीता बोध

जगद्गुरु भगवानश्री कृष्ण से, शिष्य अर्जुन सुनता गीता है। मानव प्रतिनिधि अर्जुन संग, संवाद वाणी ही श्री गीता है। शब्द-अक्षर के ही... Read more

कानून तोड़ना (व्यंग्य)

‌‌‌‌‌‌‌गुलामी में तोड़ा था कानून, आज भी पढ़ते इतिहास में। सराहा जाता है उन्हें हरदम, सम्मिलित जो नमक कानून में। आज आजादी के बाद ... Read more

हमारी संस्कृति

हमारी संस्कृति ‌शश्ववत है, सनातन है मानवता ‌वाही है। न‌ जाति की‌ न‌ सम्प्रदाय की, प्रकृति पोषक ‌सत्य स्वीकार ‌है। पर वर्तमान‌ मे... Read more

दीपपर्व की सीख

दीपावली आती हैं , लाती है संदेश। साफ सफाई करने से, स्वच्छ होगा सारा देश। जो भी हो धार्मिक व‌ सांस्कृतिक, मान्यता त्योहार की। प... Read more

रावण का साक्षात्कार(व्यंग्य)

रावण का साक्षात्कार?? दशहरा पर मिल गया, रावण मैदान में। डरते हुए पूछा मैने, कैसा लग रहा इस हाल में। रावण बोला पश्चाताप है मुझे,... Read more