Rajesh Kumar Kaurav

गाडरवारा

Joined January 2017

उच्च श्रेणी शिक्षक के पद पर कार्यरत,गणित विषय में स्नातकोत्तर, शास उ मा वि बारहा बड़ा, जिला नरसिंहपुर म प्र । विद्यार्थी काल से ही गीत, कविता, कहानी,लेख आदि लिखने का शौक, विभिन्न क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय समाचार पत्रों में रचनाएं प्रकाशित।

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स्थानीय, जिला स्तरीय

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श्रीमद्भगवद्गीता ?

अद्भुत ग्रंथ है श्रीमद्भगवद्गीता। प्रभू की अमृतवाणी है गीता। प्रिय सखा की सलाह है गीता। ऋषियों की सिद्धि है गीता। गुरु का उपदे... Read more

भाव, शब्द

भाव शब्द शब्द पुष्प है भाव मूल है, बिन मूल के शब्द शूल है। भाव की है अभिव्यक्ति, बिन भाव शब्द निर्मूल है। परमात्मा की भाव शक्ति... Read more

भाव, शब्द

भाव शब्द शब्द पुष्प है भाव मूल है, बिन मूल के शब्द शूल है। भाव की है अभिव्यक्ति, बिन भाव शब्द निर्मूल है। परमात्मा की भाव शक्ति... Read more

पारसमणी मंत्र है मां

मेरी तेरी सबकी मां, विविध रूप पर एक है मां। अभिव्यक्ति की प्रथम किरण, सृष्टि की आधार है मां। सुबह ‌है ऊषा शाम की संध्या, चढ़त द... Read more

पारसमणी मंत्र है मां

"मां" मेरी तेरी सबकी मां, विविध रूप पर एक है मां। अभिव्यक्ति की प्रथम किरण, सृष्टि की आधार है मां। सुबह ‌है ऊषा शाम की संध्या, ... Read more

अटूट बंधन (वर्ण पिरामिड कविता)

अटूट बंधन (वर्ण पिरामिड कविता) क्यों रही सदा से भारत में दाम्पत्य जोड़ी सफल जीने में गौरवमयी पद्धति। थी सारी दुनिया अनजान... Read more

मतदान (कविता)

मतदान प्रजातंत्र में पर्व बड़ा यह, मतदान राष्ट्र की पूजा है। ऊच नीच व जाति भेद का, स्थान नहीं कोई दूजा है। सबको अवसर सबकी इच्छा... Read more

अटल अटल (कविता)

बिषम परिस्थितियों से टकराना, जीवन जिसका लक्ष्य रहा था। कभी न हारा कभी न टूटा, संघर्ष भरा जिसका जीवन था। हिंद देश के स्वाभिमान हि... Read more

ये ‌‌‌युग (वर्ण पिरामिड)

ये युग बदल रहा है रे प्रगतिशील परिवर्तन है संकट तो आवेगे। जो लोग चाहते सुविधाएं सरलता से उन्हें पराक्रम अपनाने ही होगें... Read more

शालीनता (वर्ण पिरामिड, कविता)

ये पप्पू क्या किया सारा देश शर्मशार है मुखिया बनना रहा न आसान है। तू कब समझा तेरे लिए मां कुर्बान तेरी खातिर सहती रहती... Read more

क्यों हम पीछे हैं (कविता)

क्यों हम पीछे हैं (कविता) विकास की गति बहुत तेज, फिर भी क्यों हम पीछे हैं। दशकों से दौड़ रहे सब, फिर आगे क्योंनहीं बढते हैं। सी... Read more

कह कर बदलना (कविता)

कह कर बदलना, आम बात है जी। जनसाधारण ही नहीं, राजनीति में खास है जी। जो जितना बदलता, चर्चा में बनता है जी। झूठ बोलने का चलन, ब... Read more

चलन मेरे देश का

कैसा है यह‌ चलन , मेरे भारत देश का। दोषी की जमानत पर, माहोल बनता जश्न का‌। आतिशबाजी हर तरफ, जयकार ढ़ोल मृदंग का। लगता विजयश्... Read more

शुभकामना नवसंवत्सर की (कविता)

नवसंवत्सर आ गया अब, खुशियों का त्यौहार। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि, सृष्टि सृजन आधार। सृष्टिकर्ता ब्रह्मा जी दीना, संयोगों का उप... Read more

योद्धा नहीं सिर्फ वो (कविता)

योद्धा नहीं सिर्फ वो, जो रणभूमि को जाते। समाज में रहने वाले कब, उनसे कम आंके जाते। ना देखा युद्ध क्षेत्र कभी, ना तलवार गही हा... Read more

योद्धा नहीं सिर्फ वो (कविता)

योद्धा नहीं सिर्फ वो, जो रणभूमि को जाते। समाज में रहने वाले कब, उनसे कम आंके जाते। ना देखा युद्ध क्षेत्र कभी, ना तलवार गही हा... Read more

भूलें नहीं नववर्ष

भूलें नहीं नववर्ष हमारा, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को आता है। सृष्टि का यह जन्म दिवस, सत्य ,सनातन , शाश्वत है। वह असीम संस्कृति हमार... Read more

नववर्ष पर सूर्य संदेश

नववर्ष पर भेजा सूर्यदेव ने, प्रथम किरण के साथ संदेश। चुनौतियों से भरा वर्ष है, सम्हलो, छोड़ो राग द्वेष। बीते वर्षों से भी सीखों,... Read more

युग सृजेता सम्मेलन

युग सृजेता सम्मेलन गूंज रही है दसों दिशाएं, शंखनाद अब व्याप्त है। युवा क्रांति की हलचल से, युग परिवर्तन की आश है। उत्तर-दक्षि... Read more

अभिव्यक्ति (कविता)

अभिव्यक्ति की आज़ादी है, जो चाहो ‌सो बोलो। पर वाणी की भी मर्यादा है, जहर न उसमें घोलो। मीठी भाषा में कह सकते, अच्छे हो या बुरे ... Read more

भर्ती(व्यंग्य कविता)

पटवारी की भर्ती पर, अभी नहीं कोई भरोसा। यू टर्न कब हो जावे, रखना सदा अंदेशा। अतिथि बनने फार्म भरे, लगभग माह जुलाई में। दिसंबर ... Read more

गीता बोध

जगद्गुरु भगवानश्री कृष्ण से, शिष्य अर्जुन सुनता गीता है। मानव प्रतिनिधि अर्जुन संग, संवाद वाणी ही श्री गीता है। शब्द-अक्षर के ही... Read more

कानून तोड़ना (व्यंग्य)

‌‌‌‌‌‌‌गुलामी में तोड़ा था कानून, आज भी पढ़ते इतिहास में। सराहा जाता है उन्हें हरदम, सम्मिलित जो नमक कानून में। आज आजादी के बाद ... Read more

हमारी संस्कृति

हमारी संस्कृति ‌शश्ववत है, सनातन है मानवता ‌वाही है। न‌ जाति की‌ न‌ सम्प्रदाय की, प्रकृति पोषक ‌सत्य स्वीकार ‌है। पर वर्तमान‌ मे... Read more

दीपपर्व की सीख

दीपावली आती हैं , लाती है संदेश। साफ सफाई करने से, स्वच्छ होगा सारा देश। जो भी हो धार्मिक व‌ सांस्कृतिक, मान्यता त्योहार की। प... Read more

रावण का साक्षात्कार(व्यंग्य)

रावण का साक्षात्कार?? दशहरा पर मिल गया, रावण मैदान में। डरते हुए पूछा मैने, कैसा लग रहा इस हाल में। रावण बोला पश्चाताप है मुझे,... Read more

नवदुर्गाओं के औषधिय रूप

दैत़्य रूपी रोगे से लडती, दुर्गा औषधि रूप में । 'हरड़' रूप धर शैलपुत्री, लडती उदर विकार में।। ब्रह्मचारिणी है ब्राह्मी 'में, ब... Read more

हिन्दी की आत्म कथा

हिन्दी की आत्मकथा मैं हिन्दी हूँ, देव भाषा संस्कृत से मेरा प्रादर्भाव हुआ है। मेरे जन्म काल का वास्तविक पता न तो मुझे है न ही इतिह... Read more

मैं हिन्दी हूँ । (हिन्दी दिवस पर)

मैं हिन्दी हूँ, भारत की राजभाषा । सात दशक से खड़ी, लेकर मन में एक अभिलाषा। राष्ट्रभाषा का सपना, पूरा होगा एक दिन । स्वतंत्रता... Read more

गजानन मत-जाना

मत जाना भगवान गजानन मत जाना । राह राह झगड़े होते है, चक्का जाम अांदोलन होते है, जानता करें पुकार गजानन मत-जाना । रोड़ टूट रहे,रे... Read more

शिक्षक संकल्प

शिक्षक दिवस दिया है हमको, उनको शत शत कोटि प्रणाम । वरन शिक्षक कि मिट जाति, पूछ परख सिर्फ बचता नाम। शिक्षक भी गौरव को भूला, किया... Read more

शिक्षक संकल्प

शिक्षक दिवस दिया है हमको, उनको शत शत कोटि प्रणाम । वरन शिक्षक कि मिट जाति, पूछ परख सिर्फ बचता नाम। शिक्षक भी गौरव को भूला, किया... Read more

रक्षाबंधन की शुभकामना

रक्षाबंधन के अवसर पर, कोटि कोटि शुभकामना । विजयी हो मेरा भाई, हर बहिन करती कामना ।। न पूजा किसी देवी देव की, न आरती न किसी की प... Read more

शिक्षा की हालत

आज भी एकलव्य, मिट्टी के पुतले से शिक्षा पाता है। पहले राजवंश था, अब गरीबी से नहीं पढ़ पाता है।। लिखाता है नाम, सरकारी स्कूल भी ... Read more

विश्व रिकार्ड(व्यंग्य)

विश्व रिकार्ड बनाने की, लग रही भारत में हो़ड़। गिनीज बुक में नाम हो, कर रहे सब जोड-तोड।। देश काल और परिस्थिति से, हट रहा अब सब... Read more

मन की बात

मन मन की सब कोई कहे, दिल की कहे ना कोई। जो कोई दिल की कहे, उसे सुनता नही है कोई। मन पापी मन चोर है, कहते चतुर सुजान। दिल को आश... Read more

दुर्गावती की अमर कहानी

गढ़ मंडला राज्य की रानी, नाम दुर्गावती वीर मर्दानी। निर्भीक बहादुर वीरांगना थी, जबलपुर था उसकी राजधानी।। बॉदा नरेश कीर्तिसिंह चं... Read more

झॉसी वाली रानी (बलिदान दिवस )

नाम लक्ष्मी पर दुर्गा थी, मूरत थी स्वाभिमान की।। आज जरूरत फिर भारत में, झॉसी वाली रानी की।। जैसा देश बटा था पहले, राजाओं के अधि... Read more

साहित्य की भूमिका

साहित्य देता रहा सदा से, दिशा देश अौर समाज को । साहित्यकार बदल देता है, चिन्तन ,चरित्र,व्यवहार को।। राष्ट्र को मिलती रही चेतना, ... Read more

सच्चा सुख

सुख पाने की चाह में, भटक रहा इन्सान। विरले ही पाते इसे, बहुतेरे है अनजान। बढ़ती सुविधा सामग्रियॉ, इन्द्रिय भोग विलास। इन्हें ह... Read more

प्रथम स्वाधीनता समर

प्रथम स्वाधीनता समर अाज भी, घर घर मुँह जवानी है। दस मई सन सन्तावन की गाथा, गौरव पूर्ण कहानी है। सन्तावन के पूर्व भी लडे़ पर, कह... Read more

कहाँ है वो भारत

कहाँ है वो भारत सोने की चिडि़या। कहाँ वो संस्कृति ललायत थी दुनिया। कहाँ वो देव भूमि राम और कृष्ण की कहाँ वो राजनीत सेवा व धर्... Read more

कर्म का योग

कर्म रहित जीवन नहीं, जी न सकता कोय। कर्म बन्धन के कारण, जीवन - मरण गति होय।। कर्म से दुःख होत हैं, कर्म से मुक्ति होय ।। कर्म ... Read more

आभार नारी का

नारी है सृष्टा की शक्ति, सृष्टि निर्माण की सहभागी। नारी के हैविविध कलेवर, सारी सृष्टि आभारी। माता बन पोषण करती है, संरक्षण अभि... Read more

सृष्टि

[29/03, 10:49 AM] A S: मना रही सृष्टि अपना जन्म दिन, सृष्टिकर्ता की चेतनशक्ति को नमन। ज्ञात और अज्ञात सब वही है, एक से अनेक का ही... Read more

ज्ञान ?

सदियों से भटक रहा, ज्ञान की खोज में इंसान। पर मिलता कहाँ संसार में, चैतन्य स्फुरण ही पहचान। वेद क़ो ही कहते ज्ञान, ज्ञान का ही व... Read more

नवरात्र साधना पर्व

आ गया पर्व साधना का, नवरात्रि के नाम से। शक्ति उपासना करके सुधारे, जीवन लक्ष्य सत्कार्य से। पेट प्रजनन आवास ही, जीवन उद्देश्य न... Read more

यह हिन्दुस्तान हैं बेटा

नदी किनारे बैठा, खीचता मिटाता रकील। निराशा से भरा मन, बैचेनी का बन प्रतीक। सहसा किसी ने टोका, क्या सोच रहे हो नव जवान। वैसक है... Read more

जीता कौन

नाच और गान में, होली का रंग था। कबीर की वाणी हुर्यारों का संग था। चुनाव सी हलचल हार जीत का प्रशन था। कौन जीता कौन हारा, उलझन ... Read more

विजयश्री

विजयश्री के जश्न में, बजते ढ़लोक और मृदंग । नृत्य गान रंग गुलाल से , बदल गये सबके रंगढंग। मिला श्रेय जो सौभाग्य है, करने को प्रभ... Read more