राजेश बन्छोर

हथखोज (भिलाई), 490024

Joined January 2017

“कुछ नया और बेहतर लिखने की चाह……”
राजेश बन्छोर “राज”
जन्मतिथि – 05 जून 1972
शिक्षा – सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा
सम्पर्क – वार्ड-2, पुरानी बस्ती
हथखोज (भिलाई),पोस्ट – सुरडूंग, जिला – दुर्ग, छत्तीसगढ़, 490024
मो. नं. – 7389577615
प्रकाशन संदर्भ – पत्र-पत्रिकाओं में समय-समय पर कविता, कहानी प्रकाशित

Awards:
: (1) वक्ता मंच एवं छत्तीसगढ़ हिन्दी साहित्य मंड़ल रायपुर द्वारा आयोजित कविता
लेखन प्रतियोगिता में “प्रदेश स्तरीय नवोदित रचनाकार सम्मान” – वर्ष 2003
(2) महिमा प्रकाशन एवं छत्तीसगढ़ शिक्षक साहित्यकार मंच दुर्ग द्वारा प्रकाशित
साहित्यिक कृति में कविता लेखन के लिए “वतन के राही कविरत्न सम्मान” –
वर्ष 2005
(3) आदि एक्सप्रेस मासिक पत्रिका भिलाई द्वारा आयोजित काव्य प्रतियोगिता में
कविता लेखन में प्रथम पुरस्कार से सम्मानित – वर्ष 2015
(4) सतनामी कल्याण समिति कोहका- भिलाई द्वारा आयोजित कविता पाठन
प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार से सम्मानित – वर्ष 2015
(5) हिन्दी साहित्यपीडिया नोएडा (दिल्ली एन सी आर) द्वारा आयोजित काव्य प्रतियोगिता में प्रतिभागिता एवं सराहनीय कार्य हेतु प्रशस्ति पत्र से सम्मानित – वर्ष 2018

Copy link to share

अमन-राष्ट्र

गुजरता साल देखकर दिल कर रहा है ! क्यों हर घड़ी लहू बह रहा है !! इस बरस भी खून-खराबा अपहरण, आगजनी ! बम-विस्फोट, बलात्कार बरसों... Read more

माँ

गर्म तवे से हाथ जला जब तुमने अपना फर्ज निभाई स्तन से बूंदे टपकाकर मेरे जख्मों पर लेप लगाई कैसे भूलूं तेरा उपकार कैसे दूध का कर्... Read more

स्वच्छ भारत अभियान

स्वच्छ तन, स्वच्छ मन फिर मैला क्यों अपना आंगन ठान ले ऐसा हम अगर स्वच्छ रखेंगे डगर-डगर गली, मोहल्ला, चौक, चौराहा अब नहीं होगा ये... Read more

माँ

गर्म तवे से हाथ जला जब तुमने अपना फर्ज निभाई स्तन से बूंदे टपकाकर मेरे जख्मों पर लेप लगाई कैसे भूलूं तेरा उपकार कैसे दूध का कर्... Read more

सच्चे प्रेम पत्र

प्रिय पूजा बहुत कुछ कहना है और कह पाना मुश्किल सा है. शायद यही कारण है कि अभिव्यक्ति के लिए कागज-कलम से बेहतर साधन नहीं ख... Read more

कैसे बताऊं मैं

कैसे बताऊं मैं, कैसे समझाऊं मैं मेरे लिए तुम कौन हो, क्या हो सुनहरी धूप हो, श्रावणी घटा हो मचलती नदी या बहती हवा हो तुम प्रीत हो... Read more

ओ गोरिया

ओ गोरिया, आँखों से तू मदहोश है जिसे देखूं मुझको लागे दिल में चोट रे जब-जब तुझको देखूं, हलचल होती है दिल में जब न देखूं तुझको, मैं... Read more

किस्तों में

कभी किया दीदार था हमने आज सुबह इजहार हुआ बीत गये बरसों बरस हमने किस्तों में प्यार किया पहली किस्त की बारी आई बीच सड़क वो आ टकरा... Read more

मेरी ख्वाहिश-मेरी तमन्ना

मेरी ख्वाहिश मेरी तमन्ना मेरी उम्मीदों का सपना हर पल, हर क्षण यही चाहूं मैं पूनर्जन्म में मेरी बनना घर समाज के ढ़ेरों बंधन इस ज... Read more

सपने में आती हो

सपने में आती हो मुझे बहुत सताती हो जब भी पूछा तुमसे दोस्ती करोगी मुझसे ? थोड़ा मुस्काना, फिर पलकें झुकाना सचमुच गजब ढाती हो सप... Read more

याद-ए-हमसफर

नागपुर से मेरी ट्रेन रफ्ता-रफ्ता आगे की ओर बढ़ने लगी. मेरे बगल में एक लड़की भी सफर कर रही थी. वह अपने मामा के घर जा रही थी. ... Read more

खूनी गीत

************************* जब भी मैंने कलम उठाया ! लिखने को कोई गीत नया !! कलम मेरे रूक जाते हैं ! विचार लुप्त हो जाते हैं !! क्... Read more

एक संदेश आपके नाम

********************* जन्मदिवस के रूप में यह दिन सुहाना आया है हर दिल पर रंगी रौनक है आंखों में मस्ती छाया है भगवान करे, दस्... Read more

" साथी चल "

********************* साथी चल कुछ कर दिखलाएँ अमन-चैन के गीत सुनाएँ शोषण, घुसखोरी, गद्दारी अन्याय, अनाचार, भ्रष्टाचारी गली-गली न... Read more

"मजदूर"

अपनी सांसों में उर्जा भरकर निर्माण जो करता नवयुग का औरों को सुख-सुविधा देकर करे सामना हर दुख का जो रूके अगर, रूक जाए दुनिया सार... Read more

एका त्योहार

दीवाली सा हर दिन लगे और दशहरे सी रात ! होली जैसी दोपहरी हो रोज खुशी की बात !! पर आज दीया जले आगजनी सा राम राज में रावण पलता ! ... Read more

"अमर शहीद"

अन्याय हुआ शोले उठे अब सभी शोर रूक जाएँगे ! सात दशक आजादी के जैसे फिर बहार चमन में आएँगे !! शहीद हुए जो मातृभूमि पर यही शब्द रह... Read more

"कारगिल"

ललकार हमें न ए जालिम अब हमें नहीं सहना है ! खबरदार ए सरहदपार कश्मीर हमारा अपना है !! मत दोहरा इतिहास भूल से इतिहास नया बनाके दे... Read more

"नन्हा फूल"

फूल खिलते रहेंगे यह सोचकर खुश था मगर दुख इस बात का, कि रौंदी जा रही मासूम कलियाँ Read more

बेटियाँ : ऐसा क्यों

बढ़ रहे बलात्कारी ! चीख रही भारत की नारी !! आज के मायावी राक्षसों से भगवान भी घबराता है ! इसलिए द्रोपदी की लाज बचाने कोई कृष्ण ... Read more