“तू हँसी अधर रुख़सार का तिल,मैं थके नयन का लोर प्रिये।”
ग्राम+पोस्ट-मुर्तजीपुर
जिला-गाजीपुर(उ.प्र.)
संपर्क सूत्र-मो.नं.-९४५२०७५००७

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हिदायत

"मयस्सर जो कुर्सी है उसका अब तो वाजिब इस्तेमाल कर लो ऐ साहिब-ए-सद्र, शाम सियासत की बदसलूक न हो अंधेरी रात हुई गर तो ढल जाएग... Read more

चलते-चलते

छोड़ गये सफर में हमसफर,गुमराह हो गये तिनके का सहारा ही सही सहारा तो था। आवारगी के चर्चे मशहूर जब हुए, दिल कह उठा कम से कम... Read more

एक अहम सवाल...?

​मर जाती है भूख से वो जब बाजार गर्म न हो, गर बिक जाए सौदा क्यूँ सुकूँ से खा न पाती वो। मयस्सर चाँदनी लेकिन अँधेरा जिन्दगी मे... Read more

आवाज

​उसकी रुसवाई ही थी जो कलम ने सचबयानी को मजबूर कर दिया। मस्तमलंग फिरता रहा अब लेकिन खुद पर खुद को मगरूर कर दिया। चोट दी ह... Read more

आइना

​सब चेहरे बेचेहरे हो गये जब, आईना समाज से रूठा और टूट गया। पाशविक प्रवृत्ति चरमोत्कर्ष पर पहुँची, इंसाँ का अपने अक्श से जब ... Read more

चेतावनी

कब तलक जियोगे गुमनाम रहकर जिन्दगी जाया हो जाएगी। रात भी मुँह मोड़ अँधेरे से सुबह में उजाले का साया हो जाएगी। तोड़ जंजीरें झूठे... Read more

गरीब की खुशी

दुखों के ढेर से खुशी माँ के आँचल में छानता हूँ। मयस्सर इक औरत जिन्दगी में,खूबसूरत उपहार मानता हूँ। चाहत नही खुशी के लिए मिले स... Read more

शायरी

१. आज चाँदनी सहमी सहमी सा क्यूँ है, शमा फिजा की ठहरी ठहरी सी क्यूँ है, नया यार मिला तुझे जो अजीज मेरा था ऐ रक़ीब, शायद पलक... Read more

दास्तान-ए-सफ़र-ए-ज़िन्दगानी

‘ऋतु’आ चुकी कब की ,‘शीत’अब आयी है। सोचकर समझकर बहुत डरकर भी,लिखने को कलम उठायी है।। अश्क सूख गये चुभन तीखी धुंधला गये धुंध म... Read more

लहू को उबलने तो दो

​मौत का गर बुलावा भी आए तो क्या, फिर न कहना कभी भी संभलने तो दो। जंग-ए-मैदान मे बाँध सर पे कफन, पाँव सीमा तरफ अब निकलने... Read more

बस यूँ ही

तुम रात चाँद की चाँदनी हो,मैं सुबह से पहले भोर प्रिये! मीठी धुन हो संगीत की तुम,मैं धड़कते दिल का शोर प्रिये! तू बरसते सावन की ... Read more

वाकया

खुले केश अधरों पर लाली/शोभित बिंदी माथे पर, बंजर जमीं पर मुद्दतों बाद/बारिश आयी हो जैसे! पीली साड़ी श्वेत बदन का/कर रहे बखूबी... Read more

बेवफा

इश्क के दरिया मे/डुबोया हूँ खुद को खुद ही, तन्हाई मे भी रो सकूँ/मिले ऐसे हालात नही! थी वफा जब तक/खुद को जुगनू ही समझा किए ... Read more

माँ

ये ओस की बूँदे पत्तों पर,गिर-गिर कर जब ली अंगड़ाई। पलकें जो खुली ख्वाबों के बाद,ऐ माँ बस तू ही याद आई।। पेड़ों की डलिया सिसक... Read more