राहुल कु० विद्यार्थी

तारापुर (बिहार)

Joined February 2017

राहुल कु विद्यार्थी
मुंगेर (बिहार)
7739000556
विशेष विधा:- श्रृंगार एवं हास्य रस

Books:
“अर्पण” साझा काव्य संग्रह

Awards:
राष्ट्रीय काव्यदंगल पुरस्कार

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कमरा नं० ५२

कमरा नंबर बयालीस ****************** बारहवीं के छात्र डेविड ने अभी-अभी एक बड़े शहर के नामी संस्थान में अपना दाख... Read more

मुक्तक

अपने जो हुए पराये दिल में दर्द बहुत ही होता है मेरी बुद्धिमानी पर आज शक मुझको ही होता है करता था भरोसा अब तक किसी भी अंजाने पर ... Read more

परदेशी पुत्र

आज वर्षों बाद रामु अपने गाँव वापस आ रहा था | ज्योँहि वो रिक्सा से उतरा गाँव के बूढ़े,बच्चे,औरतें सभी की नजरें उन पर ही टिकने लगी | र... Read more

इश्क-ए-वफा

तू पाले थी नफरत दिल में मैंने तो था पाला प्यार तेरी नफरत सच्ची थी पर झूठा न था मेरा प्यार तेरा नफरत जीत गया है हारा है आज मे... Read more

मुह्ब्ब्त

मुहब्बत भरे रिश्ते यूँ ही भुलाये नही जाते औरों की खुशियों में आँसू बहाये नही जाते दिल से दिल की डोर बाँधे रख ऐ मेरे दोस्त मुहब... Read more

**प्यारा बछड़ा**

आज वर्षों बाद गौशाला में मेरे ,छाई है खुशियां क्योंकि सुन्दर सा बछड़ा जो दी, मेरी भोली-भाली गईया, मन मेरा भी हो गया उतावला, सो... Read more

*बचपन की यारी*

लव कुश दो संतानें हूँ मैं, अपने माँ-बाप का, खेल-कूद कर बचपन बिता दी, जीवन के अभिन्न अंग का सच पूछो तो यारों, बह... Read more

मुक्तक

मेरे दिल ने बीते दिनों की दो बात क्या कह दी, लोग मुझे कवि समझ बैठे....... मेरा हाल तो किसी ने नहीं पूछा, पर अर्थ जरुर पूछ बैठे...... Read more

**प्रेम का दूपहिया**

तुम भी चलो, मैं भी चलूँ चलती रहे ये ज़िन्दगी तुम भी गुनगुनाओ, मैं भी गुनगुनाऊँ, गुनगुनाती रहे ये जिन्दगी, थोड़ा तुम मधुर हो जाओ,... Read more

मेरी यादगार यात्रा

आज चढ़ा था, मैं बस के ऊपर, बस के ऊपर, मतलब उसकी, छत के ऊपर, थी वो खटहरा, ढ़न-ढन करती, बस की दिवारें, खटर-खटर थी, उसकी आवाजें,... Read more