राहुल कु विद्यार्थी
मुंगेर (बिहार)
7739000556
शिक्षा- स्नातक (अंग्रेजी), B.Ed(अध्ययनरत)
पेशा- अध्ययन और अध्यापन
शौक- किताबें पढ़ना, कविता/कहानी लिखना
लेखन विषय- समसामयिकी,सामाजिक व शृंगारिक
विशेष विधा- मुक्त कविता व वर्णिक छंद
विशेष रस:- श्रृंगार एवं हास्य रस

Books:
“अर्पण” साझा काव्य संग्रह
“क्षितिज की ओर” साझा काव्य संग्रह

Awards:
काव्य मेघ सम्मान, मेधा सम्मान

Copy link to share

तुम्हारे आ जाने से खुशी मिल गई है

तुम्हारे आ जाने से, खुशी मिल गई है ना जाने क्यूँ दिल में भी,प्रीत जग उठी है हसीं मेरे होठों की,बनी अब रहेगी सातों जन्म जो तुम,स... Read more

अधरों से अधरों का मिलन

प्रिये! याद मुझे उस पुण्य पथ का जिस पथ चले थे दोनों ही अधरों से अधरों का मिलन हुआ था जहाँ.... तपे थे दोनों ही जिस्म नही, बस... Read more

एक चुंबन भर

अधरों का वो प्रेम मिलन खूब मुझे तड़पाता है जब होता हूँ मौन कभी मैं याद वही पल आता है जब अधरों को तेरे मेरे अधर ने छूआ था थोड़े... Read more

कुछ लम्हे साथ गुजर पाए

~~~~~~~~~~~~~~ किसी की साजिश का कहर है या फ़िजाओं में घुला जहर है या कह दो न कि यह ठंडी हवा की लहर है आजकल जो व्यस्त रहन... Read more

हे कविवर! अब तुम लिखो

हे कविवर! अब तुम लिखो देश की खातिर लेखन को देश हमारा मांग रहा है स्याही के कुछ बूंदों को देश हम... Read more

नैना हैं अभिराम तुम्हारे

शृंगार रस......😊😊 नैना हैं अभिराम तुम्हारे, जुल्फें नागिन जैसी है चांद गगन में जैसे चमके, तू धरा पर वैसी है तू है प्रिये! चन्द्... Read more

तोड़ो मत

मैं पौध हूँ नन्हा सा अभी बढ़ा नहीं हूँ विकसित नहीं हुआ है तन मेरा | मुझे तोड़ो नहीं उन हाथों से ही जिन हाथों से स... Read more

हास्य व्यंग्य

रोज-रोज का चिक-चिक झिक-झिक, अब मुझको नही सुहाता है कसम बस तेरे प्यार की, यह मुझसे सहा न जाता हुई है प्याज मंहगी तो क्या, तुम प्य... Read more

पीना हो तो पी, आंखों से शराब

इश्क की, बातें, वो क्या जाने ज़नाब जिसे पसंद हो, जिन्दे जिस्म का क़बाब चुभता रहा हो जो, खुद में, शूल की तरह वो, क्या जाने भला,... Read more

बेटियों ! अब तुम जागो

न क्रोध न संवेदना बस केवल घृणा....... अब तो आँसू भी सूख गए आँखों से| संवेदना भी शांत हो गई हृदय से | आखिर क्या करे? रोज-रोज सुबह... Read more

व्यंग्यात्मक दोहे

1. अच्छी कविता कौन है, समझ नहीं खुद आय | लेखन से फुरसत कहाँ, पढ़ि-पढ़ि ज्ञान अघाय || 2. कविता दिल की बात है, लिख जितना लिख पाय... Read more

कमरा नं० ५२

कमरा नंबर बयालीस ****************** बारहवीं के छात्र डेविड ने अभी-अभी एक बड़े शहर के नामी संस्थान में अपना दाख... Read more

परदेशी पुत्र

आज वर्षों बाद रामु अपने गाँव वापस आ रहा था | ज्योँहि वो रिक्सा से उतरा गाँव के बूढ़े,बच्चे,औरतें सभी की नजरें उन पर ही टिकने लगी | र... Read more

इश्क-ए-वफा

तू पाले थी नफरत दिल में मैंने तो था पाला प्यार तेरी नफरत सच्ची थी पर झूठा न था मेरा प्यार तेरा नफरत जीत गया है हारा है आज मे... Read more

मुह्ब्ब्त

मुहब्बत भरे रिश्ते यूँ ही भुलाये नही जाते औरों की खुशियों में आँसू बहाये नही जाते दिल से दिल की डोर बाँधे रख ऐ मेरे दोस्त मुहब... Read more

**प्यारा बछड़ा**

आज वर्षों बाद गौशाला में मेरे ,छाई है खुशियां क्योंकि सुन्दर सा बछड़ा जो दी, मेरी भोली-भाली गईया, मन मेरा भी हो गया उतावला, सो... Read more

*बचपन की यारी*

लव कुश दो संतानें हूँ मैं, अपने माँ-बाप का, खेल-कूद कर बचपन बिता दी, जीवन के अभिन्न अंग का सच पूछो तो यारों, बह... Read more

**प्रेम का दूपहिया**

तुम भी चलो, मैं भी चलूँ चलती रहे ये ज़िन्दगी तुम भी गुनगुनाओ, मैं भी गुनगुनाऊँ, गुनगुनाती रहे ये जिन्दगी, थोड़ा तुम मधुर हो जाओ,... Read more

मेरी यादगार यात्रा

आज चढ़ा था, मैं बस के ऊपर, बस के ऊपर, मतलब उसकी, छत के ऊपर, थी वो खटहरा, ढ़न-ढन करती, बस की दिवारें, खटर-खटर थी, उसकी आवाजें,... Read more