Teacher and Poet

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ग़ज़ल : चले भी आओ मेरे यार

🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 गज़ल ***** चले भी आओ मेरे यार दिल बुलाता है यूँ रूठकर भी भला अपना कोई जाता है//1 सज़ा भी दे दो मुझे अब मेरे गुना... Read more

ग़ज़ल ( छू कर वो मेरी रूह को शीतल बना दिए )

221, 2121, 1221, 212 ग़ज़ल ***** उनकी नज़र ने मेरे सभी ग़म भुला दिए पत्थर था दिल उसी में वो गुंचे खिला दिए//१ जैसे छुआ हो अब्र ... Read more

ग़ज़ल- क़ानून की सिफ़त है बची सिर्फ नाम की

221-2121-1221-212 ग़ज़ल ***** धज्जी उड़ी हुई है सभी इन्तज़ाम की क़ानून की सिफ़त है बची सिर्फ नाम की//१ तुम थे हवा हवाई बचा के नज़र ग... Read more

ग़ज़ल -- यूँ न बस दूर से सलाम करें

2122 1212 22/112 तरही ग़ज़ल **** ***** पास में भी ज़रा मुक़ाम करें यूँ न बस दूर से सलाम करें यूँ हुआ है चिराग़ कब रौश... Read more

कविता -- लाडली

हरिगीतिका छंद लाडली ****** यह लाडली है देश की आकाश को छूने चली सब तोड़कर बाधा बढ़ी है आज वह हक़ की गली जग सोचता था है बड़ी म... Read more

कविता -- निडर बेटियाँ

शक्ति छंद निडर बेटीयाँ ********** सदा से जिसे था झुकाए रखा बिना दाँव खेले विजय को चखा चलेगा नहीं अब दमन का असर सभी बेटियाँ... Read more

हास्य कविता -- कवि-पत्नी की व्यथा

कवि-पत्नी की व्यथा ***************** पत्नी जी अति प्रेम में विह्वल कह गईं दिल की बात। हे प्रिय! क्या तुम दोगे मुझको कविता की सौ... Read more

ग़ज़ल -- सच्चा प्रेमी संगी होगा अंतिम पत्थर आने तक

22 22 22 22 22 22 22 2 बच्चे रस्ता देखा करते पंछी के घर आने तक पंछी दाना देता रहता बच्चों के पर आने तक। सोना जगना गिरना उठन... Read more

ग़ज़ल -- तेरा ख़त जब मैं कलेजे से लगा लेता हूँ

2122 1122 1122 22 तेरे दिल को मैं निगाहों में बसा लेता हूँ। तेरा ख़त जब मैं कलेजे से लगा लेता हूँ तेरी यादों में छलकती हैं ... Read more

ग़ज़ल -- सब परिंदे लड़ रहे हैं, आसमां भी कम है' क्या

2122 2122 2122 212 सब परिंदे लड़ रहे हैं, आसमां भी कम है' क्या इन सभी के हाथ में अब मज़हबी परचम है' क्या //१ क्यूँ सभी के अ... Read more

ग़ज़ल -- ज़िन्दगी का फ़लसफ़ा बस एक पल में आ गया

2122 2122 2122 212 ज़िन्दगी का फ़लसफ़ा बस एक पल में आ गया, नाम तेरा इक महक बन साँस में जब छा गया उम्र भर भटका किये, इ... Read more

ग़ज़ल -- मह्रबां बन कर वो मेरी ज़िंदगी में आ गए

2122 2122 2122 212 ग़ज़ल **** दोपहर की धूप में बादल के जैसे छा गए ज़िन्दगी जीते रहे हम दुश्मनों की भीड़ में रहबरों के संग ... Read more

कविता-- साथी सो न, कर कुछ बात

साथी सो न, कर कुछ बात। यौवन में मतवाली रात, करती है चंदा संग बात, तारें छुप-छुप देख रहे हैं, उनकी ये मुलाकात।... Read more

ग़ज़ल -राम हारे रावणों के अब दशहरे हो गए

2122 2122 2122 212 ग़ज़ल ***** चल गया जादू सभी अंधे औ बहरे हो गए ज़ालिमों के ज़ुल्म के दिन अब सुनहरे हो गए //१ था किया वा... Read more

ग़ज़ल - अज़ब ये तरक़्क़ी अज़ब है ज़माना)

122 122 122 122 ग़ज़ल ***** हक़ीक़त न बोले बनाये फ़साना अज़ब ये तरक्की अज़ब है ज़माना //१ नहीं आज उसमें ज़रा सी भी शफ़क़त ग़रीबों... Read more

माँ (ग़ज़ल)

2122 1212 22/112 ग़ज़ल *************** माँ *** माँ जिधर भी नज़र उठाती है वो ज़म... Read more