Sardanand Rajli

Hisar

Joined February 2019

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डर में

डर में जब हम अपने, लक्ष्य से, भटक जाते हैं। हमारी जिंदगी, बारूद के ढे़र की तरह, हो जाती है। हर पल डर में ही, बीतने लगती है... Read more

कविता- जमीं के चांद -सरदानन्द राजली

🌒 *ज़मीं के चांद*🌒 ------------------------------ ऐ-चांद आज खुद पर गुरूर मत करना। आज गली-गली नहीं, घर-घर चांद निकलने वाले हैं। ... Read more