Purdil Shiddharth

Bhilai

Joined April 2019

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मुक्तक

मुहब्बत रेजगारी है क्या, जो खर्च हो जाय मुहब्बत तो रुह में बसी खुशी है जो जितनी खर्च हो सूद उतना ही बढ़ता जाय ! ...पुर्दिल २. ... Read more

कविता

क्या तुम धुप बनोगे तुम... ? एक रात के लिए और बरस जाना... सुबह तक... मेरा गिलाफ सूखने तक... तब तक, रात और सुबह को मुट्ठी में थ... Read more

मुक्तक

१. दिल मेरा दिल से बफादार था थोड़ा दूसरों के दुखों से बेज़ार था कश्मकश में जो कट रही थी जिंदगी बस इस लिए ख़ुद से ख़ुद का गद्दार ... Read more

मुक्तक

वो इश्क को भी बीमार कर देगा जो हसरतों के नक़्शे खींचा करता है तुम ख़्वाबों से भरा दिल लेकर दूर रहो दिल फ़रियादी होकर लाचार करता... Read more

मुक्तक

१. श्राप लगा था उसे, पत्थरों में दबी रही थी सदियों प्रेम की हवा लगी वो निखर आई रूहानी सुन्दर होकर... ...पुर्दिल Read more

मुक्तक

१. हमने लिबास समझ कर तुम्हें पहना ही नही था कफ़न थे हमारे रूह का, वो भी तुम तो नोच चले ! ...पुर्दिल *** मेरी चाहत की स... Read more

मुक्तक

१. तूने पलट कर एक नजर देखा ही नही, बैठी थी मैं किस आस में तू गुजर गया हवा बन कर, अब दिल मेरा खौफ़ के आगोश में है ! ...पुर्दिल ... Read more

मुक्तक

१. तुम तड़पो हमें हरगिज नही मंजूर मगर तुम्हें तड़प का पता कैसे चले ! ...पुर्दिल २. तुम्हारी यादों ने बेचैनियों के सिवा मु... Read more

मुक्तक

जब भी वो सफ़हा कोई नया सा पलटता होगा मेरे जानिब से यादों के साये में घिर जाता होगा। तमाम मसरूफ़ियतों को खुद से करके दरकिनार ... Read more

मुक्तक

जब धुप की चाँदी जम कर सर पे बरसेगी साया भी अपने दामन से लिपटने को तरसेगी / खिली धुप में तुम पुर्दिल सबनम सा मोती रख देना मोत... Read more

मुक्तक

मरीज़-ए-इश्क हूँ बेकरार और बेज़ार हूँ अपने यार से मिलने की बस तलबग़ार हूँ ! ** हर रात मेरे तकिए पे करवट बदलते मिलते हो मुझे हर ... Read more

मुक्तक !

हटो व्योम के बादल तुम, प्रीतम से मिलने हम जाते हैं बर्फीली वादी में प्यार की उष्णता लेकर हम जाते है, शरहद के ठंढी सीमा... Read more

मुक्तक

मुहब्बत कर के देख लो... इश्क न सही... अश्क मिल ही जाएगा... / जो कोई दर्द ही न रहा पुर्दिल ... हमदर्द मिल न पायेगा... एक हमदर्द... Read more

मुक्तक !

मैं मधुशाला बन जाऊँ, तुम बनना मेरा साक़ी तुम प्रेम प्याला छलका देना, मैं अधरों पे बांकी ! रोज जरा सा मुझ से मिल जाना तुम साक़ी अध... Read more

मुक्तक !

शब्द अगर मायने में न रहे तो चुप रहना अच्छा, तुम साथी अच्छे हो, तुम से जबर्दस्ती नहीं अच्छा ! / मुझे सादगी पसंद थी, दुनियां बड़ी र... Read more

मुक्तक !

यादों ने जम के बारिश की है हम ने थम के किस्से सुने हैं... / कुछ तुम्हारे कुछ हमारे... हसीन लम्हों को चोरी से चुने हैं ... *... Read more

मुक्तक !

होठों पे मुस्कान आंखो में उम्मीद को जिन्दा रखना मुग्द्धा एक हांथ में प्यार दूसरे में इंकलाब रख के चलते रहना मुग्द्धा ! / अपनी और... Read more

मैं दिया तू दिए कि बाती पूर्दिल !

घर की देहरी पे, एक दिया जलता है उजाला उचक के झांकता, भीतर तक बढ़ता चलता है. लपक-लपक के बाती हस-हस के कहे अंधेरे से मेरे... Read more

खुद को अब समझाऊंगा !

खुद को अब समझाऊंगा प्रेम नहीं आकर्षण 'सखे' और भाव, सब मेरा माया है कहने को तो कह गए हो तुम, मन को मेरे कहां समझाया है। र... Read more

तुम 'प्रेम पगा' ही रहा करो..

सौ बार कहा दिल से हमने ... तुम 'प्रेम पगा' ही रहा करो.. अपने मन को न छला करो… प्रेम के साये में ही चला कोरो... / सौ बार पलट कर... Read more

कचनार बने हो तुम !

कचनार बने हो तुम गुलनार बने हो तुम, क्यूँ ... गुलशन की बाहों में बेज़ार पड़े हो तुम... ? हांथ बढ़ाओ, साथ तो आओ क्यूँ ... दिल... Read more

मुक्तक !

तन को मन पे रखोगे या फिर मन को तन पे रखोगे मंजिल को चलोगे या संग चलते रहोगे जीबन भर... / तन की दहलीजों से परे मन संग साथ चलूंगी... Read more

मुश्किल में हैं रिश्ते ...

मुश्किल में हैं दिल के रिश्ते अपने रुठ न जाएं हमसे, अपने-सपने सब घिरे हुये हैं दुनियाँ भर के धर्मसंकट से, गिर कर टूट न जाये ... Read more

मुक्तक !

सांस लिए फिरते हो, जिनमें बस नही तेरा आश किए चलते रहते हो फिर हुआ सबेरा मैं कहता हूँ,सुनो जरा तुम मान भी जाओ अजब माया जाल ल... Read more

क्या लिखूं '...?

क्या लिखूं '...? रुदन लिखूं मौन, दुःख लिखूं या लिखूं, अपनी अंतर बेदना कि दिन कट जाता है रातें रोने लगती है बिसूरने लगती ह... Read more

मुक्तक

कहाँ मिला सबर तुझे,मुझे भी न करार आया बिछड़े हम इस कदर कि दोनों दरबदर हो गए... / वहम ही सही तुम यूँ ही कायम रहा करो तुम जहाँ... Read more

मुक्तक

आँखों की दहलीज़ पे सपने कुचल न देना तुम वक़्त की घनी शाख से लम्हें तोड़ न लेना तुम... / प्रेम पगा मन को लेकर पुर्दिल कहीं दूर न जा... Read more

मुझ से जुड़ कर क्या पाओगे ... ?

मुझ से जुड़ कर क्या पाओगे बस कुछ आँसू स्वर्णिम गालों पे और सूख के दांतों से काटोगे अपने ही मन के छालों को. चाँदी उग आये हैं बालों... Read more