PUNIT TRIPATHI

GORKHPUR

Joined February 2019

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मुक्तक

जाति-पाति के भेद की ऐसी है दीवार, इसे तोड़ने में स्वयं प्रेम गया है हार । किन्तु मानूंगा नहीं मेरा ये है विचार , इसे हराने के लिए... Read more

प्रिय ! तुम्हारी याद में

क्या लिखूं, कैसे लिखूं, कैसा हमारा , हाल है ? प्रिय! तुम्हारी याद में , यह मन बड़ा बेहाल हैं । जाने क्या घटना घटी, यह मन तुम्ह... Read more

गांधी- विचार के आदर्श जीवन को फिर राजनीतिक रूप से सक्रिय होने की आवश्यकता हैं..

महात्मा गांधी समय की कसौटी पर जितना खरा उतरते जा रहें हैं, वैसी मिसाल मिलना मुश्किल है । उनकी 150 वीं जयंती पर उनका स्मरण करते हुए य... Read more

होली पर बिशेष

जिसका स्मरण करते ही कण-कण में बिजली का स्पन्दन हो जाता है,नस-नस में लालसा की लहर दौड़ जाती है,मन प्राणों पर भावों का सम्मोहक इन्द्रध... Read more

मेरी ख्वाहिश है !

मेरी ख्वाहिश है! सूरज की पहली किरण,आकर बिखरे मेरे आँगन मे झूमते हुए बादलों से,चुपके से कुछ कहे धरती इंद्रधनुष के रंगो जैसा हो सब... Read more