Dr.Priya Soni Khare

प्रयागराज

Joined January 2018

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रुपान्तरण

जीवन की संचित ऊर्जा अपने सूक्ष्मतम रूप में अणु से परमाणु तक क्रोध से प्रेम तक खाद से पुष्प तक कण से पर्वत तक नित्य परिवर्तित... Read more

रुपान्तरण

जीवन की संचित ऊर्जा अपने सूक्ष्मतम रूप में अणु से परमाणु तक क्रोध से प्रेम तक खाद से पुष्प तक कण से पर्वत तक नित्य परिवर्तित... Read more

संबंध

कारण संबंध है, जिसमें घुले मिले शब्द ---- जीत लेना चाहते, हैं ,दुनिया---- परन्तु,कारण ही समाप्त हो जाय, तब संबंध ----- पुकार... Read more

मां का आर्शीवाद

नही है मेरी माँ भोली, उसने सिखाया है,मुझे-लड़ना, जीवन संघर्षों में आगे बढ़ना, दिल दुःखे, तो क्या है करना, मेरी माँ ने बताया है----... Read more

माँ

मेरे शरीर के भार को वहन करने वाली मुझे गुरूत्वाकषॆण के विरूद्ध खडा करने वाली धरती माँ को नमन 🙏 मेरी भावनाओं को सशक्त कर मे... Read more

मां

कैसे कैसे दर्द लिए फिरती हूँ मैं, रोज एक तिनका नीड़ का बुनती हूँ मैं, कभी उड़ती हूँ,आसमान को छूने.... कभी धरती पर बिखरे दाने ,चुन... Read more

विकास

शीर्षक-विकास हर तरफ शोर है,विकास चहुँओर है। कँही स्वछ भारत अभियान है, कँही बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ का गान है, कोई मेट्रो से विकास को... Read more

सीता देवी

लंका विजय के बाद राम तुम्हे लेने नहीं आये, तुम मौन क्यो थी? अयोध्या की जनता तो साधारण थी उसके प्रश्नों का जवाब उसी समय क्... Read more

परिवार

माता-पिता है पूजनीय,करो इनका सम्मान, जिससे इनका दिल दुःखे, मत कर ऐसे काम। सब रिश्ते अनमोल है,समझो दिल की बात, छोटी-छोटी बात पर,क्... Read more

करोना योद्धा

चिकित्सक बने,करोना योद्धा, शत् शत्,उनका अभिनन्दन, संकट में भी निर्भय होकर, डटे रहे तुम,तुमको वंदन| नगर रक्षक भी,करोना योद्धा, म... Read more

बेटी

बहुत पढ़ा ली बेटी अबतो, बेटों पर भी ध्यान दो। मानवता का पाठ पढ़ाओ, उन्हें भी संस्कार दो। ताण्डव शिव का जग प्रसिद्ध है, माँ काली का... Read more

जीत

हम जीतेगे हर वो जंग जो इंसानियत के खिलाफ हो, वो जंगल जीतेगा, जिसमें आग लगी थी, वो इमारत भी जीतेगी जिसे बम से उड़ाने की स... Read more

मानव शक्ति

एक नया अध्याय नया इतिहास रचेंगे हम, ज्ञान,कर्म और योग का संधान करेंगे हम, प्रकृति का यह तांडव जीवन का है,अंश धैर्य हमारा स... Read more

बचपन

न कोई सेल्फी ,न अपडेट, फिर भी बचपन अप टू डेट। थोड़ी पढ़ाई,थोड़ा ड्रामा, सूरज दादा, चंदा मामा। दौड़े भागे मस्ती की रेल, सबका था आपस ... Read more

रूपान्तरण

बो दो जीवन को अन्तर्मन के धरातल पर प्रेम की मिट्टी में प्रेरणा,उत्साह संकल्प की खाद से पोषित करो सत्यता का निर्मल जल और श्... Read more

नारी

गिलहरी सी कूदती,चिड़िया सी चहचहाती, कभी आसमां पर उड़ती ,कभी जमीं पर उतर आती, मदमस्त सी चाल, उसका बेबाक़ है अन्दाज़, मगर ज़िन्दगी ने छु... Read more

अर्द्धनारीश्वर

.थोड़ा सा पुरुष मेरे भीतर जगने दो, थोड़ी स्त्री तुम बन जाओ, अर्द्धनारीश्वर से हम ,अपनी सम्पूर्णता अपने भीतर ही पा ले| चलो,आ... Read more

अपनापन

दिखते नहीं हैं पर,दिल महसूस करता है, कुछ हालात होते है,कुछ जज़्बात होते है, जिनके होने की कीमत को,केवल मन समझता है| जिनसे दिल के ... Read more

हिन्दी

जब हिन्दी की बात हो, बोली में मिठास हो, व्यक्त करे जब भावों को, हिन्दी सबसे पास हो, जब-जब मन की पींग बढ़े, हिन्दी की बरसात हो... Read more

शिक्षक

गुरुकृपा सौभाग्य है,गुरु ज्ञान ब्रह्मास्त्र, गुरु की महिमा कैसे कहूँ, अल्प शब्द का ज्ञान। प्रथम पाठ माँ से पढ़।,पिता ज्ञान की खान, ... Read more

परिवार

माता-पिता है पूजनीय,करो इनका सम्मान, जिससे इनका दिल दुःखे, मत कर ऐसे काम। सब रिश्ते अनमोल है,समझो दिल की बात, छोटी-छोटी बात पर,क्... Read more

यथार्थ

मुख्य पटल शीर्षक-यथार्थ त्रुटियों पर निंदा मिली,उत्तम पर सब मौन। यथार्थ यही है आज का,मन पढ़े अब ... Read more

यथार्थ

कितना चीखोगे, कितना चिल्लाओगे, झूठ के रूप अनेक है,सत्य पकड़ न पाओगे। दुःख की गठरी साथ है,सुख की मंजिल दूर, दुविधा यदि मन में रहे,आ... Read more

तुम्हारा इंतज़ार

जब तुम नहीं थे ... तब भी जिंदगी चलती थी.... जब तुम आये, जिंदगी ने करवट बदली, ... Read more

बरसों का इंतजार

धड़कने थम गई, साँसे धौकनी सी चलने लगी...... रोम - रोम सिहर उठा........ आँखे तो बह चली......... चट्टान हुए मन के पहाड़ को ... Read more

इंतेज़ार

मशीन होती जिंदगी को,धड़कनों का इंतजार है। घड़ी की सुईयों पर नाचती जिंदगी को, समय का इंतजार है। वो आज भी चूल्हे पर रोटी बनाती है, एक... Read more

जल संरक्षण

नदियाँ सिकुड़ गयी, झरने सूख गए, पोखर पाट दिए, तालाब रेतीले हो गए, कुँए बंद हो गए, समुन्द्र सुनामी हो गए, एक एक करके ----हमने, ... Read more

कश्ती

अपने ही सवालों में,उलझी हैं जिंदगी मेरी, मन के समँदर में,फँस गयी है कश्ती मेरी। बन के पतवार तूने,हौसला बढ़ाया था, बिन तेरे कैसे आग... Read more

अभी तक बाकी है

जब जब चीख़ें गूँजी है, तब मौन अस्मिता जागी है। चारदीवारी के भीतर , आग अभी तक बाकी है। कंही देवी है,कंही रानी है, नारी के नारी ... Read more