Priya Maithil

Bhopal

Joined August 2018

I’m afflicted with Awesome. There’s no curing it.

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दुर्बल तुम केवल मन से हो..

दुर्बल तुम केवल मन से हो _____________________ दुख का अपने कर के विलाप, मत हालातों को गाली दो। अपने आहत रीते मन को, मत व्यर्थ द... Read more

जिस ओर उठी अंगुली जगकी..

जिस ओर उठी अंगुली जगकी उस ओर मुड़ी गति भी पग की जग के आंचल से बंधा हुआ, खिंचता आया तो क्या आया। जो टूट पड़े दुख आंगन में जो छ... Read more

विश्वाश की अंधी दौड़.

विश्वास की अंधी दौड़ दौड़ता है आदमी जोड़ता है कुछ सपने,कुछ उम्मीदें उसके अपनों से मरोड़ता है तकलीफ की आंधी को मन ही मन टूटने... Read more

मै देख रही हूं..

मै देख रही हूं, कुछ नामों को अपने अंत: स्थल से मिटते हुए.. ये नाम यहां मैंने कभी नहीं लिखे थे, किसने लिखे.. कैसे लिखे.. न... Read more

हिन्दी सूर्य हमारा है

अलंकार और रस से सज्जित, प्यारी भाषा हिंदी है। भाव अनेक समाहित जिसमें, विस्मयकारी हिंदी है। संस्कृत से उत्पन्न हुई है, कालजयी ... Read more

कविता झूठ नहीं होती

तुम जो लिखती हो वह झूठ है वृक्ष - सा दिखता महज एक ठूंठ है, किन्तु झूठ लिखा नहीं जा सकता,_" कहा मैने!" सागर गागर में समा सकता है... Read more

मेरी आंखो का तारा

नाजों से पाला था जिसको.. छूने भी नहीं दिया गम को.. हर खुशी लुटाई थी जिस पर. जीवन का एक एक पल चुनकर.. अब वो मेरा ही राजकुंवर... ... Read more

करना है जो वो कर ही चले...

करना है जो वो कर ही चलें, बातों से मन बहलाये क्यों... छोटी - छोटी भूले भूलें, इनको बेकार बढ़ाएं क्यों... कुछ घर मिट्टी ही रहने द... Read more

चुनना केवल तुमको है

"चुनना केवल तुमको है"" है टूट रहे नित- नियम अनेकों, उनका तुम यलगार करो.. क्षण- क्षण को बटोरो जीवन में, या खुल कर तुम बर्बाद कर... Read more

सच्चा प्यार

किसी को कैद कर लेना मोहब्बत की सलाखों में उसे ये ताड़ना देना, कि तुम हो मेरी चाहो में परखना उसकी हर एक बात में गुम हो कहीं ,तुम... Read more

निर्णय

कुछ शाखॆ टूट जाएगी मुरझा जाएंगी कुछ कलियां पत्तों का रंग बदल जाएगा मन भी शायद विद्रोह को मचल जाएगा सब कुछ निर्भर करता है "निर... Read more

मैं कविता नहीं लिखती

मैं कविता नहीं लिखती ये तो कुछ और है गहरे दरिया का छोर है अपने भीतर के दावानल को मिटाने के लिए चीखती खामोशियों का शोर है मैं क... Read more

निर्णय

कुछ शाखॆ टूट जाएगी मुरझा जाएंगी कुछ कलियां पत्तों का रंग बदल जाएगा मन भी शायद विद्रोह को मचल जाएगा सब कुछ निर्भर करता है "निर... Read more

मेरा क्या मुझमें बतलाना?

जो दिया तुम्हीं से था पाया.. कब खुदको ऊंचा दिखलाया.. कब तोड़ के डोरी "मर्यादा" मन मेरा खुद पे भरमाया... मैंने तो इन अवसादों से..... Read more

रे फिर बापू मर जाते हैं!!

स्वारथ की पोथी को पढ़कर, लोलुपता नभ पर चढ़कर , अपनी -अपनी ढोली ढपकर, प्रेम दया सब कुछ तजकर, जब हम निज मुख देख दरप में, तनिक नह... Read more

किसान

उड़ाते है मखौल बुजदिली का मेरी... ये जो तमाशबीन बने बैठे है सियासत में तेरी.. कायर तो नहीं हूं...पर मजबूरियों से थक चुका हूं... अ... Read more

जटिलता

हृदय बड़ा उद्विग्न है.. सना हुआ है विघ्न में.. बड़ी विकट पड़ी घड़ी.. हूं तक रही खडी खड़ी.. है आज मौन खुद "धरा".. है किस जगह मेर... Read more

भारतीय लोकतान्त्रिक चुनाव प्रणाली में युवाओं की भूमिका

भारतीय लोकतान्त्रिक चुनाव प्रणाली अर्थात जनता का ,जनता द्वारा, जनता के लिए शासन!! किन्तु आज हमारे जनप्रतिनिधि अपने "मन के प्रतिनिधि"... Read more

आरक्षण

बहुत हो चुका हो हल्ला अब तो मन की गांठें खोलो.. सब में ही गुण है प्रतिभा है.. इन्हें आरक्षण से मत तौलो इन भारत बन्द के खटको ... Read more

सच्ची श्रद्धांजलि

अक्टूबर २०१८ #प्रिया मैथिल हाथ में लाठी, तन पे लंगोटी...दुबला -पतला शरीर, साधारण कद - काठी .....किन्तु कोई कल्पना भी नहीं कर सकत... Read more

क्यों राह कोई आसान चुनूं

मंजिल खुद अश्रु - सिक्त हुई .. और शीतलता भी तिक्त हुई .. फिर क्यों मैं मधुसम गान सुनूं क्यों राह कोई आसान चुनूं?? पूजा था जिस... Read more

गोरा रंग

गोरे रंग रूप पे मिटी हुई - सी सारी दुनियादारी है....!! ये कैसी आधुनिकता है...?!! ये कैसी समझदारी है....?!! माना कि प्राचीनक... Read more

फूल नहीं प्यारे मुझको केवल कांटे ही भाते हैं

रक्त से जीवन रंजित कर ... जो तीक्ष्ण व्यथा दे जाते हैं... है फूल नहीं प्यारे मुझको... केवल कांटे ही भाते हैं!! जो दिखा मुझे मन... Read more

राष्ट्रीय हिंदी दिवस

१४ सितंबर २०१८. राष्ट्रीय हिन्दी दिवस कुछ समय पहले की बात है जब मैने # यंग थिंकर्स कॉन्क्लेव २०१८ में हिस्सा लिया, जो कि मध्यप्रदे... Read more

शर्मिंदा हूं मैं

हां सांसे थोड़ी कम- सी हैं .... हां आंखें थोड़ी नम- सी है... थोड़ी सी टूटी -टूटी हूं... खुद से जो रूठी -रूठी हूं ... मरे -मरे इ... Read more

मन के पन्नों में उलझी में जीवन पन्ने सुलझाती हूं.!

मन के पन्नों में उलझी में... जीवन पन्ने सुलझाती हूं.. खुद को समझने में निष्फल .. मैं औरों को समझाती हूं.. फिर कलह हुआ लो जं... Read more

देश की #धड़कन

अपने जीवन को दांव लगा, हर पल आहुति देते हैं! अपनी खुशियों की बलि चढ़ा, ना जाने क्या-क्या सहते हैं! है उनके दिल में भारत मां ... ... Read more