मैं रामस्वरूप उपनाम प्रीतम राठौर भिनगाई S/o श्री हरीराम निवासी मो०- तिलकनगर पो०- भिनगा जनपद-श्रावस्ती। गीत कविता ग़ज़ल आदि का लेखक ।

मानव धर्म सर्वोच्च धर्म है मानवता की सेवा सबसे बड़ी सेवा है। सर्वोच्च पूजा जीवों से प्रेम करना ।
प्रीतम राठौर भिनगाई

Books:
कहकशाँ

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ग़ज़ल

ओ कुछ राग मुहब्बत का भी छेडा जाए इस तरह दौरे तनाफुर को मिटाया जाए करते पामाल जो गुलशन कली को यारों उन दरिन्दों कभी भी नहीं बख्... Read more

ग़ज़ल

-----ग़ज़ल---- 212-212-212-2 ज़िन्दगी यूँ बिताने लगा हूँ ग़म में भी मुस्कुराने लगा हूँ मौत से आशिक़ी हो गयी ह... Read more

ग़ज़ल

जल रहीं हसद की आग में ग़रीब बस्तियाँ पर अमीर क्यों रखे था बंद अपनी खिड़कियाँ रौनकें थी जिनसे मुस्कुरा रही थी हर कली अब चमन में ... Read more

ग़ज़ल

जिसकी आँखों का मर गया पानी समझो उसका उतर गया पानी याद आई जो उस सितमगर की मेरी आँखों में भर गया पानी आशियाना ड... Read more

ग़ज़ल

-------ग़ज़ल------ भूल कर ख़ुद को कभी ख़ार नहीं मानूँगा हाँ मगर साहिबे क़िरदार नहीं मानूँगा ख़ाक है ख़ाक में इक... Read more

हास्य रचना

जब से लाया हूँ मैं लुगाई को मैं तरसता हूँ पाई पाई को पूछती चाय भी नहीं वो मुझे खुद तो खाये वो रसमलाई को गल गया है ... Read more

ग़ज़ल

-----(ग़ज़ल)------ बाग में आप गर जाएँगे फूल सारे निखर जाएँगे छूके भौंरे तुम्हारा बदन खुश्बू से हो के तर जाए... Read more

दोहावली

1- उथल-पुथल सी हो रही,नैन घटा के बीच। कब होगी बरसात ये , तन मन जाए सींच।। 2- लगे सूखने बाग वन, झुलसे कलियन गात। काले मेघा आइए, ... Read more

ग़ज़ल

---ग़ज़ल----- घर न कोई मकान है प्यारे छत मेरी आसमान है प्यारे ये ज़मीं है मेरे लिए बिस्तर मेरा ये ही... Read more

बचपन की यादें

-----ग़ज़ल----- माँ का प्यार दुलार मिला दे बचपन का संसार मिला दे छोटी ग़लती पर मिलती जो प्यार भरा फटकार ... Read more

ग़ज़ल

"माँ को समर्पित" ---------------------- ------ग़ज़ल------ माँ तो ममता की खान है प्यारे माँ ही हर घर की शान है प्यारे ग़म ... Read more

ग़ज़ल

. ----ग़ज़ल---- ग़मों से जो भी लड़ना जानता है वही क़िस्मत बदलना जानता है जो सागर में उतरना जानता है रुख़े तूफ़ां बदलना ... Read more

ग़ज़ल

ज़ख़्म दिल के बहुत ही गहरे हैं हाँ मगर ये बड़े सुनहरे हैं ये निशानी हैं मेरे दिलबर की साँस बन कर जो मुझमें ठहरे हैं... Read more

ग़ज़ल

------ग़ज़ल---- सबके दिल में खिली है कली ईद की जिस तरफ़ देखो है रौशनी ईद की चाँद निकला फ़लक से ढली शाम जब नूर बिखरा रही... Read more

ग़ज़ल

---ग़ज़ल---- गर दुआ का शजर नहीं होता कोई आसां सफ़र नहीं होता किस तरह जाता तू बुलंदी पर गर दुआ में असर नहीं नह... Read more

ग़ज़ल

-------- ग़ज़ल ------ कुछ ग़रीबों को भी दो ख़ुशी ईद में उनको मिल जाएगी ज़िन्दगी ईद में फ़र्क छोटे बड़े का न हो दरमि... Read more

माँ

--------ग़ज़ल------ माँ के आँचल में था जब जब भी छुपाया ख़ुद को ऐसा लगता था कि ज़न्नत में ले आया खु़द को याद आता है मुझे जब भी... Read more

ग़ज़ल

--------ग़ज़ल------ न कोई शहर में अपना दिखाई देता है हरेक शख़्स पराया दिखाई देता है करूँ तो किससे ये ज़िन्दादिली की ये बातें ... Read more

ग़ज़ल

---------ग़ज़ल------- शिकायत न कोई न लब पर गिले हों मिले हम हमेशा न अब फासले हों तुम्हारी हँसी से गुमां होता अक्सर चमन में हज... Read more

ग़ज़ल

-------ग़ज़ल------ हमनें अपना जिसे बनाया है उसने हमको किया पराया है भूल जाऊँ उसे भी मैं लेकिन मेरी रग रग में वो समाया है ... Read more

मुक्तक

क़ता तेरा चेहरा गुलाब हो जैसे एक शायर का ख़्वाब हो जैसे इस तरह मदभरी है आँख तेरी इक पुरानी शराब हो जैसे प्... Read more

मुक्तक

उस ख़ुदा की सदा बंदगी कीजिए नाम उसके ही ये ज़िन्दगी कीजिए छोड़ दो लड़कियों पर यूँ मरना सभी मादरे हिन्द से आशिक़ी कीजिए प... Read more

मुक्तक

तीर नज़रों के चलाने आ गये मुझको दीवाना बनाने आ गये हो गयी उल्फ़त उन्हें हमसे यही वो सरे महफ़िल बताने आ गये प्रीतम राठ... Read more

मुक्तक

जब कली कोई मुस्कुराई है दुनिया भौंरों की जगमगाई है इश्क़ करते नहीं हैं ये बुड्ढे किसने अफ़वाह ये उड़ाई है प्रीतम राठौर भिनगाई Read more

मुक्तक

गर किसी से नज़र लड़ाओगे एक पल को न चैन पाओगे राते काटोगे तारे गिनकर तुम और बिस्तर पे छटपटाओगे प्रीतम राठौर भिनगाई Read more

ग़ज़ल

------ग़ज़ल---- तेरा चेहरा गुलाब हो जैसे एक शायर का ख़्वाब हो जैसे इस तरह मदभरी है आँख तेरी इक पुरा... Read more

मुक्तक

देश पर जान ये लुटाना है इसका सम्मान यूँ बढ़ाना है इसकी सेवा ही है मेरी पूजा लेके माटी तिलक लगाना है प्रीत... Read more

शेर

212-212-212-212 छोड़ दो तुम नशा ज़िन्दगी के लिए दूध और घी बने आदमी के लिए मुद्दतों से जो छाया अँधेरा यहाँ अब जला दो श... Read more

ग़ज़ल

1- --------ग़ज़ल----- आदमी की ये बची पहचान है शक़्ल इंसां की मगर हैवान है रख के ये इंसानियत को ताख़ पर आज कितना ... Read more

ग़ज़ल

--------ग़ज़ल------ मेरी शायरी को पढ़ा क्या करोगे ग़ज़ल जो सुनाऊँ सुना क्या करोगे सितम करने वाले तुझे जानता हूँ... Read more

ग़ज़ल

-------ग़ज़ल------ मुहब्बत का नग्मा सुनाया तुम्हें रुलाया है ख़ुद को हँसाया तुम्हें सितम भूल कर हम तुम्हारे सनम जो रू... Read more

ग़ज़ल

------- ग़ज़ल ------- जहां में क्यों कोई हँसता नहीं है दिलों में प्यार का दरिया नहीं है वफ़ा के क्यों बुझे दीपक हैं दि... Read more

ग़ज़ल

-----ग़ज़ल ----- हर सवालों का आज हल देंगे नित ख़ुशी के नये ही पल देंगे बे-वफ़ाई ही मिलती उल्फ़त में इस रिवायत को हम बदल देंगे ... Read more

ग़ज़ल

-------ग़ज़ल------- मेरा रब शायद मुझे भूला हुआ या किसी ग़लती पे है रूठा हुआ सोचा था दुनिया को दूँगा र... Read more

दोहे

नेता फिर करने लगे, वादों की बौछार। जनता सारी कर रही, मेंघों की जयकार।। राजनीति के ढोल में, बहुत बडा है पोल। मुहर... Read more

ग़ज़ल

-------ग़ज़ल----- हो जिसका बागबां दुश्मन वो हर बागान ख़तरे में कली की कमसिनी फूलों की है मुस्कान ख़तरे में भला बरसेंगी कैसे र... Read more

ग़ज़ल

++++++ग़ज़ल+++++++ दर्द सीने में दबाना सीखिए ग़म को सहकर मुस्कुराना सीखिए हाथ तो मिलते हैं लेकिन दोस्तों ... Read more

मुक्तक

प्रेम का सूर्य फिर से उगेगा यहाँ धुँध घृणा का इक दिन छँटेगा यहाँ एक दीपक जो मिल कर जला दें सभी ये अँधेरा न हरगिज़ रहेगा यहा... Read more

ग़ज़ल

-----ग़ज़ल---- तुम्हारे झूठ का तख़्ता पलटने वाला है वतन में सच का ये सूरज निकलने वाला है यक़ीं नहीं है मुझे अब तुम्हारे वादों... Read more

ग़ज़ल

-------ग़ज़ल------ दिल को आता है क्यों क़रार नहीं और क्यों ख़ुद पे इख़्तियार नहीं यह तो नादाँ है कितना समझाऊँ बे-वफ़ा है ... Read more

कुण्डलियाँ

------कुण्डलियाँ---- चौसर बिछी चुनाव की, लगी सियासी दाँव। प्यादे चौकन्ने हुए, कोई न खींचे पाँव।। प्यादे खींचे पाँव, करें सब च... Read more

ग़ज़ल

--------ग़ज़ल------- वो है ख़ुदा जो जहां में चला रहा है मुझे नहीं तो सारा ज़माना मिटा रहा है मुझे किसी के काम न आई ... Read more

ग़ज़ल

-------- ग़ज़ल -------- पता नहीं था ये दिन ज़िन्दगी दिखाएगी हमारे अपनों से ही दूर लेके जाएगी सियासी दाँव भ... Read more

ग़ज़ल

------ग़ज़ल------ दिल को अब तार तार कौन करे यार पत्थर से प्यार कौन करे ये मुहब्बत है घाटे का सौदा इसका अब रोज़गार क... Read more

ग़ज़ल

---------ग़ज़ल------- दर्द से होके तू बेख़बर यूँ न जा मान जा मेरी जाने जिगर यूँ न जा आख़िरी हो न ये शाम मेरी कहीं एक पल ... Read more

छंदमुक्त रचना

हमारी सोच में केवल इतना अन्तर है तुम्हारी नज़र में इश्क़ एक एहसास है और मेरे लिए सिर्फ़ सर्वनाश फिर भी चाहता था तुम्हे अपनी जान ... Read more

ग़ज़ल

-------ग़ज़ल----- माँ तेरे प्यार की ज़रूरत है तेरी ममता ही मेरी नेमत है बस तू ही तो जहां में है सच्ची बाक़ी रि... Read more

ग़ज़ल

सबक़ . -------ग़ज़ल----- कुछ इस तरह से आज जहां बे वफ़ा हुआ भाई ही अपने भाई का दुश्मन बना हुआ रोया था ज़ार ज़ार ये दिल... Read more

ग़ज़ल

------ग़ज़ल------ जल रहीं हसद की आग में ग़रीब बस्तियाँ पर अमीर कर रहे घरों में अपने मस्तियाँ रौनकें थी जिनसे मुस्कुरा रही थी हर... Read more

ग़ज़ल

------ग़ज़ल----- भाई का हक़ छीन के खाना मेरे बस की बात नहीं बेइमानों में नाम लिखाना मेरे बस की बात नहीं रब ने जितना दिया है म... Read more