रचनाकार- संतोष बरमैया”जय”,
पिताश्री – श्री कौशल किशोर बरमैया,
कोदाझिरी,कुरई, सिवनी,म.प्र.।
शिक्षा-बी.एस.सी.,एम ए, डी.ऐड,।
पद- अध्यापक ।
साझा काव्य संग्रह – 1.गुलजार 2.मधुबन, 3.साहित्य उदय, 4.अभिव्यक्ति, 5. अर्पण, 6. काव्य किरण, 7.पत्रिका मछुआ संदेश, तथा वर्तमान मे साहित्य-नवभारत अखबार में प्रकाशित होती रहती है। मेरी कलम अधिकांश समय प्रेरणा गीत तथा गजल लिखती है। मेरी पसंदीदा रचना “नमन बेटियों” ।

Awards:
“कानन साहित्य सम्मान”पेंच लिटरेचर साहित्य सम्मेलन मप्र.।
“काव्य सागर सम्मान” राष्ट्रीयसाहित्यिक मंच साहित्य सागर दिल्ली।
“दस्तक” राष्ट्रीय साहित्य संगम संस्थान तिरोड़ी मप्र.।

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लालच का असर

लच लच लच रहा , लालच की ओर सदा। लालच के आगे आज, मानव भी सो गया। लूट, लूट, लूट, लूट, लूट ही मचाये सदा। दानवी प्रवृत्तियों में, ... Read more

##### माता-पिता#####

उठाओ कलम अब, कलम चलाओ तुम। चरणों में मात-पिता, नमन कराओ तुम।। खोलो भाग्य द्वार अब, खोओ अवसर नही, आओ ले आशीष ज्ञान चक्षु खोल जाओ त... Read more