Prem Singh Kashyap Rajgarh, Sirmour HP
D.O.B. 03/12/1970
MA{History/English}
मैं शिक्षा विभाग मे 1995 से अध्यापक के पद पर कार्यरत हूँ। कविता पढ़ना औऱ लिखना मुझे शुरू से ही अच्छा लगता था।लेकिन कभी कोई मौका नही मिला अब मुझे ये मंच मिला है आप सब का आशीर्वाद व प्रोत्साहन चाहुंगा।

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बसंत आया है।

फूलों की महक पत्तों की चहक कलियों ने भी गाया है अरे बसंत आया है । भौंरो की चहल पहल से सारा जग गुनगुनाया है अरे बसंत आया है। बा... Read more

मैं पैसा हुँ।

मैं काला हुँ मैं सफेद हुँ तेरे मन का भेद हुँ मैं ऐसा हुँ मैं वैसा हुँ अरे मैं पैसा हुँ। काम औऱ मेहनत का मेल हुँ हाथ के पसीने ... Read more

मन की लगाम।

चल इधर आ बैठ सुन उधर मत देख यहाँ मुझ से बात कर कभी दुसरों की बात नही सुनते कभी दुसरों को बुरा नही कहते वो देख हरे भरे खेत बाग ब... Read more

माँ ये प्यार कहाँ से लाती होगी।

माँ तू कितने कष्ट सहती होगी हर पल सीने से लगाए रखती वो अथाह स्नेह औऱ प्यार तू कहाँ से लाती होगी। वो पालने की नींद सुलाना वो म... Read more

गुणात्मक शिक्षा मे अभिभावकों का योगदान।

आधुनिक शिक्षा व्यवस्था विशेषकर सरकारी पाठशालाओं मे दी जाने वाली शिक्षा आजकल बहुत सारे प्रयोगों से गुजर रही है।अभी तक पुरी तरह सभी शि... Read more

यादें।

पूछना उन दरख्तों औऱ झीलों झरनों से गुजरोंगें जब तुम उस राहों से तेरी यादों के वहीं निशान बाकी हैं। हमारी सिसकियों से वो भी सहमे थ... Read more

वतन पर मिटने को चल पड़े हैं।

छोड़ हसरतें पीछे निकल मां तेरे चरणों मे हम मुस्तैद खड़े हैं खा कर कसम माटी की दुश्मनों का सर कलम करने पर अड़े हैं आज हम अपने व... Read more

मैं कितना दूर आ चुका हूँ।

वो झरने की झर झर नदियों की कल कल झील औऱ सागर की लहरें वो बारिश की रिमझिम खेत खलियानों की किलकारियां बागों में वो बहारें फूल ... Read more