Senior consultant incharge blood bank distt hospital sitapur.born1july1961 .intersts in litrature.science.social works&pathologyµbiology.

Books:
Katha Anjali,(kathasangrah).

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पूज्य पिता की स्मृति में

मेरे पिता श्री श्री प्रेमचंद प्रसाद वर्मा हमेशा मेरे साथ इस स्मृतियों में रहते हैं उनका साथ आप विश्वास सामर्थ व प्रेरणा बनकर मेरे सं... Read more

चिकित्सा व्यवसाय एक उत्कृष्ट उदाहरण

चिकित्सा व्यवसाय एक उत्कृष्ट उदाहरण। मित्रों, मै स्व चिंतन के द्वारा स्व अनुभव से इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं ,कि, चिकित्सा कार्य ए... Read more

जलवायु प्रदूषण

जल वायु प्रदूषण का मुख्य कारण खनिज ईंधन के द्वारा प्रदूषण फैला जाना है । खेती की पराली जलाए जाने से सामूहिक रुप से धूम्र प्रदूषण... Read more

समीक्षा, चश्मे का नम्बर बदल गया है, कविता, संदीप सरस

🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴 【गीत-चश्में का नम्बर बदल गया】 सुनो! आज अखबार मुझे दिखता है धुंधला, सम्भवतः चश्मे का नंबर बदल गया है। संबंधों... Read more

मानवाधिकार दिवस

आज राष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस मनाया जा रहा है ।हम भारतीय अपने मानवाधिकार को जानते और समझते हैं किंतु मानते नहीं ।सर्वप्रथम शिक्षा ह... Read more

समीक्षा, डिफाल्टर कहानी ,डा.प्रवीण कुमार श्रीवास्तव

[22/01, 08:06] Amberish Srivastava: सुप्रभात सम्मानित साथियों, आज बुधवार है। आज के स्तंभ सृजन विविध के अंतर्गत *डॉ0 मनोज दीक्षित के ... Read more

समीक्षा, कुकुरमुत्ता, कविवर सूर्य कान्त त्रिपाठी, "निराला"

मित्रों, आज की साहित्यिक विचार गोष्ठी में प्रस्तुत है आदरणीय श्री सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी की प्रसिद्ध कविता "कुकुरमुत्ता "।आप स... Read more

समीक्षा ,आचार्य शिव प्रकाश अवस्थी

आचार्य शिव प्रकाश अवस्थी जी बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। संगीत, साहित्य ,कला, धर्म, आध्यात्म, दर्शन ,मनोविज्ञान, कर्मकांड ,पूजन ज्योत... Read more

समीक्षा -कविवर गोपाल दास

मित्रों, आदरणीय गोपाल दास नीरज हायकु सम्राट हैं ।उनका दर्शन हायकु में परिलक्षित हो रहा है । जैसे, जन्म मरण। समय की गति के । ... Read more

मैकू रिक्शा चला रहा, कवि संदीप मिश्रा "सरस"

मित्रों, आदरणीय सरस जी की कविता , यथार्थ वाद व साम्यवाद से प्रभावित है। कविता में एक ऐसे किसान का वर्णन है ,वह अपने सपनों को भुलाकर... Read more

समीक्षा ,कवि देवेंद्र कश्यप निडर।

आदरणीय देवेंद्र कश्यप निडर जी की रचनाएं कुंडलिया,मुक्तक आदि समसामयिक व व्याकरण की दृष्टि से निर्दोष रचनायें हैं। कृषकों की पीड़ा को ... Read more

धर्म और विज्ञान एक दूसरे के पूरक

आदरणीय मित्रों आज की धर्म चर्चा में विज्ञान और अध्यात्म के समन्वय के विषय में विचार विमर्श चल रहा है ।एक समय था, जब हम सब मानते थे, ... Read more

कवि दुष्यंत कुमार, समीक्षा आज के परिप्रेक्ष्य में।

शाहकार श्री दुष्यंत कुमार जी समाज के विद्रोही कवियों के प्रतिनिधि हैं। उनकी रचना इसका प्रमाण है । हो गई है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहि... Read more

समीक्षा कवि कमलेश चन्द्र मौर्य "मृदु"

आदरणीय कमलेश मृदु जी राष्ट्रवादी कवियों में प्रमुख हस्ताक्षर हैं ।उनकी कविता में राष्ट्रप्रेम के दर्शन होते हैं, साथ में एक वियोगी ... Read more

समीक्षा- कवि केदारनाथ शुक्ल

आदरणीय कविवर केदारनाथ शुक्ला कि रचना धर्मिता अमर है। एवं सराहनीय है । विश्व को रंगमंच मानकर और उसमें पात्रों को कलाकार मानकर शुक्ल ... Read more

नारी, लावणी छंद

कितना सुंदर रूप तुम्हारा, कितनी सुंदर काया है । मां ममता का रूप तुम्हारा, कितनी सुंदर माया है । नारी बनकर बेटी अपनी ,आस्था का है... Read more

लावणी छंद

यह कैसी वासना दृगों में, लखन देखकर घबराये। बेचारी उर्मिला भवन में, कैसी होगी कुम्हलाये। शूर्पणखा सुंदरी अनूठी, छल से माया रच लायी।... Read more

क्षितिज रश्मियाँ

क्षितिज रश्मियाँ सागर तट से, प्रथम आगमन करती हैं। दूर कहीं ओझल होती हैं, गमन वहीं से करती हैं। दूर देश को जाने वाले, कर्ज चुका... Read more

अंबर क्यों पियूष कतरों को-लावणी छंद

अंबर क्यों पीयूष कतरों को, सहज भाव संजोता है । पलक झपकते नखत स्वाति में, पल भर में ही खोता है । टेर पपीहा करता है पर, प्यास न उस... Read more

दोहा गजल

हिय में करते वास हैं ,सदा अवध पति राम । पल पल तेरे साथ हैं छोड़ जगत के काम। सीता को हर ले गया ,महा दुष्ट लंकेश, जड़ जंगम स... Read more

लावणी छंद

वीर शिवाजी की गाथायें, हमको याद जुबानी है। माता जीजाबाई जी की, दीक्षा बहुत पुरानी है। गुरु समर्थ के लिए शिवा जी, दूध शेरनी का लाये... Read more

अहंकार

अहंकार, काम, क्रोध, लोभ, मोह का मूल है ।अहंकार का स्वरूप मैं का स्वरूप होता है। अर्थात कार्य करने का श्रेय व्यक्ति स्वयं ही लेता है... Read more

बुआ जी का अर्थशास्त्र

बुआ जी का अर्थशास्त्र दो मित्र, बतियाते हुए चल पड़े। थोड़ी दूर पर बुआ जी का घर था। दोनों ने निश्चय किया कि, पहले बुआ जी का हालचाल... Read more

कुण्डलिया

हरकत तुम जो कर रहे, देश विरोधी काम। पी एफ आई का हुआ ,राष्ट्र विरोधी नाम। राष्ट्र विरोधी नाम, करें फंडिंग का खेला। बाँट रहे आतंक,... Read more

हायकु

स्वप्न सुन्दरी छलावा यौवन का नयन सुखी समय गति जीवन बुलबुला अन्त या आदि सबका दुख मिले न सुख कहीं दुख में सुख अतृप्त म... Read more

कुण्डलिया

प्यारी वसुधा आ गयी, नैमिष तक है साथ । मैया का दर्शन करके, हम सब हुए कृतार्थ । हम सब हुए कृतार्थ, जगत पालक है माता। हम बालक नादान... Read more

दोहे ,गुरु जी को समर्पित

[गुरुवर के निर्मल चरण, करते ह्रदय प्रकाश । श्रुतियों की वाणी सुना, करते विमल विकास। नयन कमल को खोल दे, गुरुवर भानु समान। ... Read more

मत्त सवैया

यदि राम कृपा हो हम सब पर , चरणों में शीश झुकाते हैं। शुचि भक्ति भाव में हम सब भर, पुनि पुनि यह शीश नवाते हैं। शबरी के बेर कृपा क... Read more

मत्त सवैया

यदि रक्तदान का अवसर हो, स्वेच्छा से इसका दान करें। इसके बदले जीवन देकर, शुचिता से जीवन दान करें। यदि रक्तचाप मधुमेह उच्च, तो ज... Read more

दोहा गजल

अंतर्मन आहत हुआ ,दुखड़ा कहे किसान । सौभाग्य दुर्भाग्य मध्य विचलित है संसार। वायु प्रदूषण से हुआ रोगीये संसार । कब आए सौभाग्य से, ... Read more

फैसला

आज न्यायालय वकीलों से खचाखच भरा था। जज साहब अपनी कुर्सी पर विराजमान थे। सरकारी वकील ने पूछा, बाबूजी आप का बयान दर्ज होगा। आप अपना ... Read more

चौपइ छंद

रक्त दान से खुशी अपार अब सब मिल करना बारम्बार। करे रक्त कमियों को पूर। जीवन से यह है भरपूर। आओ वीरो को कर गान। देश सपूतो... Read more

संत विवेकानंद का करें, सभी गुणगान।

संत विवेकानंद का करें, सभी गुणगान। नमन आपको सब करें , कर भारत का मान। पावन बारह जनवरी ,कोलकता में जन्म, विश्वनाथ भुवनेश्वरी, पि... Read more

सदा मातु को मान,

हंसगति छंद ,सदा मातु को मान। सदा मातु को मान, आज मैं रचता। शारद से वर माँग, कार्य सब करता। कागा करे पुकार, यहाँ जो आये। करे उद... Read more

देश के तुम प्रथम प्रहरी, राष्ट्र का सम्मान हो।

देश के तुम प्रथम प्रहरी, राष्ट्र का सम्मान हो। देश के तुम सजग सैनिक ,देश की तुम आन हो । हे शहीदों राष्ट्र की तुम, नींव रखते जा ... Read more

शूरता में बोस जैसा वीर होना चाहिये

शूरता मैं बोस जैसा वीर होना चाहिये, वीरता में हिंद जैसा धीर होना चाहिये। फौज जो जापान से मिल कर फिरंगी से लड़ी, घाटियों को पार... Read more

दोहे- मित्र ,निर्भया संग हुआ,बहुत बड़ा अन्याय।

मित्र ,निर्भया संग हुआ,बहुत बड़ा अन्याय । न्यायालय सर्वोच्च ने,आज कर दिया न्याय। हाथ सुमरनी जाप कर, रोज करे पाखंड । ज्ञान ध्या... Read more

दोहा गजल

तोड़फोड़ जबरन करें ,छोड़ सहज व्यापार। गंगा जमुनी सभ्यता, हुई तार ही तार। शासन होगा रुष्ट अब, देखेगा जब कृत्य, पाई पाई जेब से ,... Read more

हायकु

1) घर गृहस्थी। आटा दाल चावल। लायें कहां से । 2) वक्त का मारा, अनपढ़ गँवार । घर का बोझ। 3) लव जेहाद। ... Read more

दोहा मुक्तक

सैनिक सीमा पर डटे ,करें देश से प्यार । आल्हा गाते जोश से सारे संकट पार। छिड़ी जंग जब बर्फ से ,सांसें अपनी थाम , हिम दानव के दाँँ... Read more

दोहा

दिल में करते वास हैं ,सदा अवध पति राम । पल पल तेरे साथ है ,छोड़ जगत के काम । छलके यौवन गागरी ,धीरज खोते नैन । चंचल चितवन से न... Read more

दोहे

पाप पुण्य की लेखनी ,लिखी कर्म से जाये। ज्ञान भक्ति के योग से, सदा पुण्य फल पाये। साथ साथ रहते सदा, सुख-दुख भाव निभाय। रक्तदा... Read more

दोहा मुक्तक

गायें महिमा गीत की, कवि स्वर, लय के साथ। रचना रचते छंद की, निज जीवन के नाथ। कहते सब कविराय हैं, धर्म मर्म का सार । गीत गजल मन भा... Read more

कह मुकरी

कह मुकरी खेलूं जिस से रंग हमजोली , घूमे जिसमें घर-घर टोली , संभले जिससे रंग हुड़दंग, क्या सखि साजन , न सखि ढंग। जिस पर ... Read more

दोहे

सिंधुज घाटी सभ्यता ,भारत मां की शान । सत्य सनातन धर्म है ,भारत मां की जान । वैज्ञानिक युग में मिला ,अब जीवन निस्सार। जंग छिड़ी... Read more

हायकु

हाइकु 1) गरीबी दाग । बदनुमा संसार। केवल आस । 2)पारिश्रमिक । नमक रोटी प्याज। बहा पसीना। 3)वाह रे भाग्य । बेमौसम ब... Read more

कह मुकरी

कह मुकरी 1)आखिर कैसे करूं उपाय, सहज भाव से रही बताये, जिससे मिलता हमको मेवा, क्या सखि पूजा, ना सखि सेवा। 2) जिसका सारा जग द... Read more

दोहे

1)संरक्षित करिए प्रकृति ,वसुधा भाग जगाय । धरती होकर पल्लवित, वसुंधरा कहलाय । 2) वायु प्रदूषण से हुआ, जन जीवन बीमार। ... Read more

ना समझे वह.अनाड़ी है।-व्यंग्य कथा

कहानी- ना समझे वह अनाड़ी है बहुत समय पहले की बात है, सोनू और मोनू दो भाई थे ।दोनों बहुत प्रतिभाशाली थे, और नौवीं कक्षा में पढ़ते थ... Read more

माँ का उपकार -व्यंग्य कथा

मां का उपकार- लघु व्यंग्य कथा एक बहुत पुरानी कहावत है, कुत्ते की दुम टेढ़ी की टेढ़ी। कुछ लोग बुरी आदतों को इतना अपना लेते हैं कि,... Read more