संक्षिप्त परिचय
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♦डॉ०प्रतिभा ‘माही’
(ग़ज़लकार / गीतकार /सूफ़ी कवयित्री)
♦जन्म तिथि—08/11/1970
♦पिता का नाम—श्री हरिबाबू गुप्ता, एटा (UP)
♦माता का नाम—स्व०श्री प्रेमवती देवी, एटा (UP)
♦पति का नाम—  डॉ०मनोज कुमार गुप्ता (पशु चिकित्सक)
♦नियुक्ति—- सहायक (कार्यालय ) उप निर्देशक ( पशु पालन एवं डेरी विभाग ) पंचकूला, हरियाणा।
♦निवास स्थान— पंचकूला (हरियाणा)
♦योग्यता— डबल एम०ए ( राजनीति शास्त्र व समाज शास्त्र ) पी०एच०डी० / डी०लिट०(मानद)
♦सृजन— गीत / ग़ज़ल / रुबाई / मुक्तक / छन्द / दोहे / कवित्त / भजन / छन्दमय कविताएँ / हाइकु / ताँका / क्षणिकाएँ / छन्द मुक्त कविताएँ / लेख / संस्मरण / लघुकथा/ साक्षात्कार व कहानी इत्यादि अर्थात (गद्य व पद्य साहित्य की सभी विधाओं में सृजन)।
♦कार्य कुशलता —-रेखांकन /मंच संचालन/ फ़ोटो एडिटिंग/ पेंटिंग व आर्ट एण्ड क्राफ्ट इत्यादि।
♦प्रकाशित कृतियाँ—
👉 ‘इश्क़ मेरा सूफ़ियाना’ (ग़ज़ल संग्रह) 2012 में (प्रथम संकलन) व 2018 (द्वितीय संकलन ) ” अनुराधा प्रकाशन दिल्ली ” द्वारा प्रकाशित।
👉 ‘चंदामामा आओ ना’ (बाल साहित्य) 9/2014 में “हरियाणा साहित्य अकादमी पंचकुला” द्वारा प्रकाशित।
👉 ‘इश्क़-ऐ-माही’ ( ग़ज़ल संग्रह ) 2018 में (साहित्य कलश पब्लिकेशन. पटियाला द्वारा प्रकाशित।
♦उपलब्धियाँ — 
👉निदेशक, एम०के० साहित्य अकादमी ( रजि०ट्रस्ट ) पंचकूला
👉विभिन्न राज्यों की ( लगभग 150-200 ) पत्र पत्रिकाओं में रचनायें प्रकाशित होने का सिलसिला जारी है।
👉आकाशवाणी / दूरदर्शन के विभिन्न दिल्ली, रोहतक,हिसार,नोएडा, गुरुग्राम व चड़ीगढ़ इत्यादि चैनलों से गीत व ग़ज़लों का प्रस्तुतिकरण।
👉 वर्ष 2004-2015 से अब तक लगभग 3-4 दर्जन राष्ट्रीय  विराट कवि सम्मेलन व भव्य सम्मान समारोह का आयोजन दिल्ली / गुरुग्राम / पंचकूला व चंडीगढ़ में करा चुकी हैं।
♦ उपाधियाँ—
●विद्यावाचस्पति (Ph.D.) मानद उपाधि -2012 ( विक्रमशिला विद्यापीठ विश्वविद्यालय, भागलपुर, बिहार) उज्जैन, मध्यप्रदेश
👉विधासागर (D.Lit.) मानद उपाधि -2014
( विक्रमशिला विद्यापीठ विश्वविद्यालय, भागलपुर, बिहार)
उज्जैन, मध्यप्रदेश।

♦सम्मान व पुरस्कार—

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है ग़ज़लों की मलिका-औ- गीतों की रानी-- इश्क-ए-माही

ग़ज़ल-- 05 है ग़ज़लों की मलिका-औ- गीतों की रानी है उसकी अदा में अज़ब इक कहानी न जाने कहाँ से है उतरी धरा पर लगे नूर उसका हो जैसे ... Read more

ठहरे पानी में आई रवानी ख़ुदा--- इश्क-ए-माही

ग़ज़ल -- 04 ठहरे पानी में आई रवानी ख़ुदा ज़िन्दगी को मिली ज़िन्दगानी ख़ुदा वक्त रंगत बदलता रहा हर घड़ी दास्ताँ क्या लिखी है सुहानी ... Read more

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सभी यादें दफ़न कर हम नया मन्ज़र सजा देंगे -- इश्क़-ए-माही

ग़ज़ल---03 ********* सभी यादें दफ़न कर हम नया मन्ज़र सजा देंगे फरिश्तों को बना अपना रुहानी दर दिखा देंगे चले अँगार पर जब जब, हुए... Read more

मुस्कुराती है सदा दिलदार के लिए --- इश्क़-ए-माही

ग़ज़ल -- 02 ********** मुस्कुराती है सदा दिलदार के लिए हर ख़ुशी कुर्बान उसकी प्यार के लिए बनके बदली झूमती सावन में हर घड़ी ह... Read more

जिंदगी की सहेली - (हरी बाबू गुप्ता 'हरि' , डॉ० प्रतिभा माही के पिता)

*जिंदगी की सहेली* ***************** जिंदगी.....! एक पहेली है.... उसकी भी एक सहेली है...! दोस्ताना दोनों का इतना पक्का है...... Read more

राधा कृष्ण की होली

गीत●●खेल रहे सब होली ******************* आगे आगे राधा मोहन, पीछे सबकी टोली... ! इंद्रधनुष के, प्रीत रंगों से, खेल रहे सब होली... Read more

दोहे --- बेटी करे गुहार

बैठी माँ के गर्भ में , बेटी करे गुहार जग वाले सुन लो ज़रा, मेरी करुन पुकार नारी का अस्तित्व है , अदभुद अनन्त अपार मर्दों के संसा... Read more

गर्भ में पल रही एक बेटी की गुहार

गीत कम नहीं तेरे बेटों से बेटी तेरी नाम ऊँचा तेरा जग में कर जाऊँगी तू बुलाले अपने चमन में मुझे तेरा दामन मैं ख़ुशियों से भर जा... Read more

शिव स्तुति:-- सुनलो शिवजी मेरी पुकार

सुनलो शिवजी मेरी पुकार, आयी भिक्षा लेने द्वार पूरी करो कामना मेरी , मिले हमेशा सबका प्यार सुनलो भगवन मेरी पुकार....! जन्म दिया ... Read more

कुछ तो बोलो मोदी जी...!

कुछ तो बोलो मोदी जी ●●●●●●●●●●●●● करता भारत शीश झुकाकर , शत शत नमन शहीदों को अश्क़ स्वरूपी सुमन चढ़ाकर, शत शत नमन शहीदों को पु... Read more

माँ की सीख----!

माँ की सीख ********** बचपन में माँ ने एक बात कही थी कि अति हर चीज की बुरी होती है। चाहे वो कुछ भी हो....दोस्ती हो या... Read more

गद्दारों की बात न कर......!

गीत ***** गद्दारों की बात न कर वो तो हर घर में रहते हैं बिन पेंदी के हैं वो लोटे सदा लुढ़कते रहते हैं आस्तीन का साँप बने है... Read more

दिल से निकली अनौखी सदा देखिये... ('इश्क़-ए-माही' पुस्तक ग़ज़ल संग्रह से)

ग़ज़ल -- 01 ********** दिल से निकली अनौखी सदा देखिये कैसी अदभुत है उसकी कला देखिये वक्त का हर ये लम्हां पुकारे उसे करती फ़रिया... Read more

मिटाकर नफ़रतें मन से..... ('इश्क़-ए-माही' पुस्तक ग़ज़ल संग्रह से)

मिटाकर नफ़रतें मन से अज़ब इक बीज बोया है जिसे कहते हो तुम उल्फ़त उसे दिल में संजोया है वही हमको लगे प्यारी उसी के तो हैं हम शागिर्द... Read more

जब से ख़ुदको पढ़ना सीखा ('इश्क़-ए-माही' पुस्तक ग़ज़ल संग्रह से )

ग़ज़ल-- 54 जब से ख़ुदको पढ़ना सीखा बस तुझ ही में ढलना सीखा रुह से रुह का कैसा पर्दा रुह ने रुह में बसना सीखा क्या ख़ुशियाँ क... Read more

नन्हा बालक

सोच रहा है बैठा बैठा क्या क्या सपने गढ़ता है। बगिया में इक नन्हा बालक खुद से बातें करता है। उड़ता जाऊँ नील गगन में सुंदर से पर ... Read more

आज़ादी

आज़ादी हम ले आये हैं आज़ादी का मान करो। भारत माता का प्यारो अब तुम सब मिलकर ध्यान धरो। आज़ादी की ख़ातिर हमने क्या क्या पापड़ बे... Read more

इश्क़ में क्या रक्खा है...?

इश्क़ क्या है...? ************ ये न पूँछो कि ... इश्क़ क्या है...? और... इश्क़ में क्या रक्खा है...? 1)- बेवज़ह लोग डर... Read more

निगाहें

निगाहें बोलतीं यारो दिलों को जोड़तीं यारो हुआ है जो भी जीवन में छुपाया जो भी है मन में खुलासा हो ही जाता है नज़र सब साफ आता ह... Read more