गुरुवंदना..

गुरुवंदना का कोई नही है नियत काल गुरु से बढ़कर इस जग में दूजा नही महान।। बार बार तव वंदन,प्रणम्य अभिनंदन इस अबोध बालक का नित करते ... Read more

राष्ट्ररक्षक-हिन्द सेना।

"#करगिलविजयोत्सव पर समर्पित एक स्वरचित रचना" ओ सीमा के #प्रहरियों, बार बार तव #अभिनंदन. तुमसे आन बान सम्मान तुम बिन है राष्ट्र ... Read more

माँ...

'माँ' यह वो अलौकिक शब्द है, जिसके स्मरण मात्र से ही रोम−रोम पुलकित हो उठता है, हृदय में भावनाओं का अनहद ज्वार स्वतः उमड़ पड़ता है और... Read more

मातृ-रचना

#मात्रप्रेमियों को समर्पित एक #रचना। मातृ दिवस है अभी अधूरा... घर आँगन क्यों है अभी सूना... प्रसव-वेदना सहकर ,नौ माह गर्भ में पाल... Read more

चकिया-जीवन।।

चकिया चलती है ऐसे। जीवन चलता है जैसे।। ऊपर नीचे चलती ऐसे। जीवन चलता है जैसे।। सुख दुःख के ये पहिये। हैं आते जाते रहते।। जीवन र... Read more

राष्ट्रवन्दना।

सभी राष्ट्रवासियों,राष्ट्रप्रेमिओं को समर्पित एक रचना.. १.अमर राष्ट्र है वंदन करो। पुनीत राष्ट्र है वंदन करो। २.माँ के अंचल पर... Read more