शोधार्थी, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झाँसी(उ0प्र0)
साहित्य पशुता को दूर कर मनुष्य में मानवीय संवेदनाओ का संचय करता है एवं मानवीय संवेदनाओ के प्रकट होने से समाज का कल्याण संभव हो जाता है । इसलिए मैं केवल समाज के कल्याण के लिए साहित्यिक हिस्सा बनकर एक मात्र पहल कर रहा हूँ ।

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आरएसएस नंगा नाच रहा ।

लोकतंत्र पर देखो भाई आरएसएस नंगा नाच रहा अपनी बात को रखने पर खुले में पिटवा रहा रोहित ऊना की घटनाओं को नित्य रोज दोहरा रहा सहार... Read more

विनाश कर लिया

विकास की राहों में सड़कों का निर्माण पर पेड़ो की कटान को हर पल देखा कानपुर से झाँसी के लाखों पेड़ एक साथ ढहा दिए गए बिगड़ गया संतुलन ... Read more

कब्रिस्तान न बन जाएं

मानवीय संवेदनाओं का मानव से ह्रास हो रहा है लूट का तांडव मजहब का बवंडर दर-दर भटकती मानवता सुन रहा हूँ हर दिन की चीख पुकार मह... Read more