Prabhat Indora

Joined January 2017

हैं जो राज वो कह दूं दिल से, इन खामोशियों को कलम ने लब दिए हैं।
शुक्रगुजार हर शख्स का, जिसने इन लफ्जों को मोहब्बत के रंग दिए हैं।।
चौ. देवीलाल विश्वविद्वालय सिरसा में पत्रकारिता एवं जनसंचार का शौधार्थी हूं, अपने गुरुओं के आशीर्वाद से कुछ शब्दों को लिखने की कोशिश कर लेता हूं। जब दिल करता है कभी तो कुछ कहने की कोशिश कर लेता हूं।

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चलो कुछ ख्वाब बुनतें हैं

बहुत सुन ली जमाने की। करो अब जिद कुछ पाने की। बहुत जिए बिना मकसद। चलो अब दिल की सुनतें हैं, चलो कुछ ख्वाब बुनतें हैं।। हसरतें ... Read more