पूनम झा

कोटा, राजस्थान

Joined November 2016

मैं पूनम झा कोटा,राजस्थान (जन्मस्थान: मधुबनी,बिहार) से । सामने दिखती हुई सच्चाई के प्रति मेरे मन में जो भाव आते हैं उसे शब्दों में पिरोती हूँ और यही शब्दों की माला रचना के कई रूपों में उभर कर आती है। मैं ब्लॉग भी लिखती हूँ | इसका श्रेय मेरी प्यारी बेटी ‘दिव्या प्रियम झा’ ( साॅफ्टवेयर इंजीनियर ) को जाता है । उसी ने मुझे ब्लॉग लिखने के लिए उत्प्रेरित किया। कुछ काव्य संग्रह और लघुकथा संग्रह प्रकाशित हो चुकी है | 100 से अधिक रचनाएँ डेढ़ वर्ष के अंतर्गत पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी है |
ब्लॉग-
1. mannkibhasha.blogspot.com
2. astitwa1.blogspot.com
कार्य :- डेढ वर्ष तक H for Hindi के संपादक
mob- 9414875654

Books:
प्रकाशित पुस्तक :- 1. बेवफा हो तुम ( ई बुक )
2. चौंक क्यों गए ( लघुकथा संग्रह )

प्रकाशित साँझा संकलन –
1 . अमृत काव्य ( काव्य संग्रह )
2 नारी सागर ( काव्य संग्रह )
3. कुञ्ज निनाद ( काव्य संग्रह )
4. भारत के युवा कवि एवं कवयित्रियाँ (काव्य संग्रह )
5. वूमेन आवाज “ नारी से नारी तक “
6. “दृष्टि” महिला लघुकथाकार अंक ( लघुकथाएँ )
7. बेटियाँ’, साहित्यपीडिया (काव्य संग्रह )
8. परिंदों के दरमियान ( लघुकथाएँ )
9. काव्य कलश ( ई बुक )
10. साहित्य ऋचा, ( काव्य संग्रह )
11. शब्द कलश
प्रकाशन विवरण :- दैनिक भास्कर , दैनिक नव ज्योति, नव एक्सप्रेस, लोकजंग, अंतरा शब्द शक्ति , ब्रज उपहार, संतुष्टि सेवा, साहित्य लोक, अमृत काव्य, हिंदी साहित्य सागर, नारी काव्य, भारत के युवा कवि एवं कवयित्रियाँ, अमर उजाला, दैनिक वर्तमान अंकुर, पूर्वाञ्चल प्रहरी, साहित्य धरोहर इत्यादि अखबार, पत्र – पत्रिकाओं मे प्रकाशित होती रहती है |

Awards:
सम्मान विवरण : –
1. अमृत काव्य सम्मान,
2. विश्व हिंदी श्रेष्ठ रचनाकार सम्मान,
3. नारी सागर सम्मान ,
4. श्रेष्ठ शब्द शिल्पी सम्मान ,
5. साहित्यपीडिया काव्य सम्मान
6. मुक्तक लोक भूषण सम्मान
7. साहित्य सागर सम्मान
8. वूमेन आवाज सम्मान एवं फेसबुक समूहों पर कई सम्मान प्राप्त हुए हैं |
9. शीर्षक साहित्य परिषद द्वारा ( शब्द कलश )

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अधिक बरसात आफत या फिर .......

" कहा था न रवि कि बरसात का समय है अनजान रास्ते से मत चलो । लो अब क्या करोगे ? गाड़ी भी बंद हो गई यहाँ कहाँ से मेकैनिक आयेगा । "-- झ... Read more

"पिता"

घर के मजबूत स्तम्भ होते हैं पिता, बच्चों की ताकत हैं पिता, भविष्य की उम्मीद हैं पिता, संघर्ष की धूप में छत्रछाया हैं पिता, ... Read more

शूल

हर किसी से इतना अपनापन न जताया करो। हर राज उसे अपना समझकर न बताया करो। कौन कब दिल में शूल चुभाकर जख्म दे जाए- ऐ दिल खुद को कमजोर ... Read more

गजल

बात सच थी मगर झूठ बताना पड़ा । वो दुःखी थी इसीलिए हंसाना पड़ा ।। प्यार दिल से होती है बातों से नहीं , दिल में जगा नहीं पर निभान... Read more

माँ

"माँ" बहुत देर से माँ तुमको मैं लिखना चाहूँ, मगर क्या-क्या लिखूँ, ये समझ न पाऊँ । कुछ शब्दों में माँ को बांधे, ये कलम को मैं... Read more

दीपक

"दीपक" आज दीपक अपनी व्यथा सुना रहा है दिवाली में कभी घरों की छतों पर जगमगाता था, अपनी किस्मत पर वो इतराता था, घर-आंगन... Read more

"राखी का त्यौहार"

राखी का त्यौहार जब भी आता है, भाई-बहन को बचपन याद दिलाता है, इन कच्चे धागों में अटूट स्नेह समाया है, चाहे दूर हो या हो पास... Read more

परमात्मा

ऊपर वाले को ढ़ूंढ़ते मंदिर-मस्जिद में, जबकि बैठा है वो अपने ही दिल में । प्रेम-भाव से ही ईश्वर का नाता है, क्यों फिर मानव आडंब... Read more

"कुछ भी कह जाते हैं"..........

जिसने कभी आंधी देखी नहीं , वे तूफान से लड़ने का हौसला सिखा जाते हैं । जो छोटी से छोटी तकलीफ में भी हाय-तौबा मचा देते हैं, वे द... Read more

"मुक्तक"

शून्य में ताकना कभी-कभी अच्छा लगता है । अतीत में छांकना कभी-कभी अच्छा लगता है । सूख चुके मन के घाव को कुरेद कर सहलाना- आंसुओं से ... Read more

सोशल मीडिया एवं सांस्कृतिक अस्मिता

सोशल मीडिया एवं सांस्कृतिक अस्मिता हमारा देश प्रगति के मार्ग पर है । अब समय डिजिटल का हो गया है। आज हर काम इंटरनेट से जुड़ गया ... Read more

सोशल मीडिया एवं सांस्कृतिक अस्मिता

सोशल मीडिया एवं सांस्कृतिक अस्मिता हमारा देश प्रगति के मार्ग पर है । अब समय डिजिटल का हो गया है। आज हर काम इंटरनेट से जुड़ गया ... Read more

"बसंत"

पीत-पीत खेत खलिहान पीत वर्ण में शोभित उद्यान पीत चुनर वसुधा लहराये पीत वर्ण उसका परिधान । कलियों पर भौंरे मंडराए पुष्पों स... Read more

**लघुकथा**-

बहुत देर से वो गुनगुनाए जा रहा था । सामने वाली सीट पर दीन दयाल जी चुपचाप बैठे हुए थे । दीन दयाल जी काफी बुजुर्ग थे और वो नव युवक था ... Read more

**आकर्षण**

बस खुलने वाली थी । रवि अपनी किताब ( उपन्यास ) निकाल लिया । "पढते हुए सफर आराम से कट जाएगा"--रवि मन ही मन । तभी एक भीनी सी खुशबू आय... Read more

"भूख और स्वाभिमान"

"अरे जा रे घुनिया ऊ कार रुकल हई । देख देख कुछ तो मिल जावेगा ।" कटनी बोली "ऊंss हम नाही जाएब, तू जा रे ठल्ली ।" "ऐ बाबूजी, कुछ पैसा... Read more

लहरें

दुनियां रूपी समुंदर लहरें खूब उठाती है, संकटों के भेष में आकर ये खूब डराती है, रखो आत्मविश्वास डगमगाने मत दो नैया- थम जाएगा तूफां... Read more

"विदाई"

एक जन्म से विदा होकर मानव माँ के कोख में आता है, माँ का कोख छोड़ फिर दुनिया में कदम रखता है । * फिर कहीं आगमन तो कहीं विदाई यह... Read more

" भूख और बादाम "

"अरे मुनिया चल । यहाँ क्यों खड़ी है ?"--झुनकी बोली । मुनिया --"सेठ कुछ बांट रहा है । शायद कोई खुशी की बात होगी ।" दुकान के सामने हथ... Read more

" रेगिस्तान "

" सबके गहने और साड़ियाँ फीकी पर जाती है किटी में रोमा के सामने "----रितु ने कहा । सभी ने एक साथ हामी भरी । आखिर होता भी क्यों नहीं उ... Read more

कब आओगे मोहन

कब आओगे मोहन सुन मेरे प्यारे कृष्णा। तेरे बिना सूना सूना वृंदावन तुझे पुकारे गोपी तेरी राह निहारे सब बनी अब जोगन कब आओगे मोहन... Read more

" बदल गए "

" नीतिन तुम ये क्या कर रहे हो ? उलटे-सीधे काम कर रहे हो । कभी बिना मौजे के जूते पहन रहे हो तो कभी आंखों पे चश्मा होने के बावजूद चश्म... Read more

" बदल गए "

" नीतिन तुम ये क्या कर रहे हो ? उलटे-सीधे काम कर रहे हो । कभी बिना मौजे के जूते पहन रहे हो तो कभी आंखों पे चश्मा होने के बावजूद चश्म... Read more

** गजल **

आज कुछ शब्द बेनाम लिखूँ । अंतर्मन में उठते संग्राम लिखूँ । * शब्दों से उलझन सुलझाकर, सत्य अविरल अविराम लिखूँ । * कर के पैनी धा... Read more

** गजल **

बहते थे अश्क जो तेरा प्यार पाने के लिए । रोक दिया उसे लबों को मुस्कुराने के लिए । * समन्दर तो अभी भी है तूफान समेटे हुए पर हिद... Read more

** गजल **

लेखनी का सिर्फ सच आधार है। सच नहीं तो लिखना निराधार है। * लिखना तो माँ शारदे की कृपा है गरिमा छोड़ दें तो सब बेकार है। * जबान ... Read more

** गजल **

चलो प्रकृति के नजदीक चल के देखते हैं। सुबह के सुहाने मौसम में टहल के देखते हैं। * दोस्त बदले रिश्ते बदले जमाना बदल गया चलो अब हम... Read more

** मुक्तक **

रिश्ते एक तरफा, निभाये नहीं जा सकते। फिर भी कुछ रिश्ते, मिटाये नहीं जा सकते। खून के रिश्ते या दिल के,जताना जरूरी है प्यार जताए बि... Read more

** गजल **

कहते थे अपना पर, कहो क्यूं अब मैं बेगानी हो गई। जो कसमें खायी थी तुमने, वो सारी बेमानी हो गई । * बड़ी सिद्दत से निभायी है , जिस रि... Read more

**गजल**

तुम तो जीते हो अपनी खुशी के लिए। हम खुश हो लेते,तुम्हारी हँसी के लिए। * कभी-कभी तरस खाती है ये जिंदगी अपनी मजबूरी और इस बेबसी के... Read more

** गीतिका **

हे सूर्य, क्यों अपनी उष्णता बढ़ा रहे हो। धीरे-धीरे अपना उग्र रूप दिखा रहे हो। * माना की घटना-बढ़ना तुम्हारी प्रवृत्ति है, जन-जीवन ... Read more

** गीतिका **

भवन सुंदर लगता दिखने में । अच्छा लगता उसमें रहने में । * हमारी पूरी उम्र लग जाती है, एक मकान को घर बनने में । * हर खुशी दफन कर... Read more

** गीतिका **

जिंदगी लगती कभी सीधी तो,कभी आरी है। पूरी जिन्दगी इस गुत्थी को समझना भारी है। * डुबकी लगाना ही पड़ता है इस ऊहापोह में, साथ हमारे ... Read more

** गीतिका **

जिंदगी लगती कभी सीधी तो,कभी आरी है। पूरी जिन्दगी इस गुत्थी को समझना भारी है। * डुबकी लगाना ही पड़ता है इस ऊहापोह में, साथ हमारे ... Read more

नारी तुम अपनी पहचान करो ।

नारी तुम अपनी पहचान करो । उठकर अपना सम्मान करो । अबला नहीं तुम तो सबला हो शक्ति हो तुम ये तो ध्यान करो। नारी तुम अपनी पहचान करो।... Read more

** जिंदगानी **

जिन्दगी की तो अपनी ही कहानी है। कहा सबने पर किसने इसे मानी है। . कभी कोई हंसता हुआ है दिखता, पर आँखों के पीछे दर्द का पानी है। ... Read more

"आओ अधरामृत पान करें ।"

मैं छल प्रपंच न जानूँ प्रिये, उर प्रीत को ही मानूँ प्रिये, प्रणय अधर पर है लहराई मिलकर इसका सम्मान करें, आओ अधरामृत पान करें । ... Read more

*** गीतिका ***

उपवन में पुष्प खिले-खिले, सब महकने के लिये । गगन में घुमड़ते बादल, अब बरसने के लिये। * मन को भी महका मानव, उमड़ो बादल बनकर मानव हो... Read more

" वेलेंटाइन डे "

" वेलेनटाइन डे " ------ प्रेम के मायने जानता नहीं, वैलेनटाइन डे में डूब रहा शहर। . माँ की ममता है प्रेम, पिता की फिक्र है ... Read more

** मुक्तक **

साथ चलने वाले भी दिल से साथ नहीं होते हैं चेहरे पर मुस्कान, पर दिल में नफरत होते हैं खा ही जाते हैं धोखा, संभलकर चलने वाले भी सच्... Read more

वसंत ऋतु............

वसंत ऋतु ---- वसंत ऋतु जब आये पुष्प पुष्प मुस्काये पीतांबरी में वसुंधरा देख गगन भी हर्षाये ये ॠतु मधुमास कहाये। * आम में मंजर... Read more

जय माँ सरस्वती

हे वीणावादिनी, हे हंसवाहिनी, हे ब्रह्मचारिणी, हे वागीश्वरी, हे बुद्धिधात्री, हे वरदायनी, हे माँ शारदे, कुछ ऐसा कर दे, इस लेख... Read more

जय हिन्द जय भारत

" वन्दे मातरम " ---------------- तिरंगा ऊंचा रखना धर्म हमारा है। तिरंगे की रक्षा करना कर्म हमारा है। नमन उन वीरों को मातृभू... Read more

" खेल शब्दों का "

शब्द से मिले गर मान सम्मान , तो कहीं शब्द करा दे अपमान । शब्द बिगाड़े कहीं काज , तो शब्द बना दे कहीं बिगड़े काज । कोई शब्द... Read more

दिल से तुझे जाने न दिया। *

वक्त को भी बीच में आने न दिया। देख लो दिल से तुझे जाने न दिया। * जिस शहर में तेरी रूह बसी देखो वहीं बसकर पराया कहाने न दिया। * ... Read more

" बेटियां ".............

" बेटियाँ " ------------ ये पूछो मत मुझसे क्या होती है बेटी न शब्द न परिभाषा में बंधती है बेटी। * चिड़िया नहीं, ममता से भरी मानव... Read more

**मुक्तक **

लेनी-देनी ----------- साथ तो यहाँ से कुछ न जानी करते फिर भी सब बेईमानी रहते लिप्त लेनी-देनी में यहाँ नेता क्या,बड़े गुणी और ज्... Read more

** क्या से क्या हो गई ?**

क्या से क्या हो गई ? ------------------- छोटी थी, किसी की लाडली थी । हँसती थी, खिलखिलाती थी , क्यूं में बड़ी हो गई ? * आँखों... Read more

क्यूँ ऐसी हूँ ---------

क्यूँ ऐसी हूँ -------- * उफ्फ: थक गई सबका मन रखते रखते। खुद को भी भूल गई सबको खुश करते करते। * जाऊँ तो जाऊँ कहाँ ठौर भी तो य... Read more

जीवन पथ ........

दे हाथों में हाथ संग तेरे चलती ही चली गयी जीवन पथ पर संग तेरे बढ़ती ही चली गयी । * पत्थरों और कंटकों भरे हैं जीवन के ये रास्ते सा... Read more