ईश्वर दयाल गोस्वामी

सागर , मध्यप्रदेश

Joined November 2016

-ईश्वर दयाल गोस्वामी कवि एवं शिक्षक , भागवत कथा वाचक
जन्म-तिथि – 05 – 02 – 1971
जन्म-स्थान – रहली
स्थायी पता- ग्राम पोस्ट-छिरारी,तहसील-. रहली जिला-सागर (मध्य-प्रदेश) पिन-कोड- 470-227
मोवा.नंबर-08463884927
हिन्दीबुंदेली मे गत 25वर्ष से काव्य रचना ।
कविताएँ समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में प्रकाशित ।
रुचियाँ-काव्य रचना,अभिनय,चित्रकला ।
पुरस्कार – समकालीन कविता के लिए राज्य शिक्षा केन्द्र भोपाल द्वारा 2013 में राज्य स्तरीय पुरस्कार । नेशनल बुक ट्रस्ट नई दिल्ली द्वारा रमेशदत्त दुबे युवा कवि सम्मान 2015 ।

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प्यार तेरा न आया है (नवगीत)

इस घर की चौखट पर अब-तक प्यार तेरा न आया है । चींटीं आईं , चींटे आए ; छिपकलियों की गश़्त भीत पर । दीमक लगते, बिच्छू ... Read more

फिर देखो ! उठने लगी नफ़रत बाली हूक ( सामयिक ग़ज़ल )

फिर देखो ! उठने लगी, नफ़रत बाली हूक । कुर्सी बाले कर रहे यहाँ चूक पर चूक ।। उल्लू भी बेख़ौफ़ निकलते उजियारे में । ज़ुग... Read more

मन अभी उलझा हुआ है

मन अभी उलझा हुआ है । गीत का मुखड़ा हुआ है ।। रात अब तपने लगी है , दिन बहुत ठंडा हुआ है ।। फूट की बुनियाद गहरी , लूट ... Read more

फूल, पत्ते जो डाली लगे

फूल-पत्ते जो डाली लगे । ठंड उनको भी भारी लगे ।। ग़र सच्ची जो अरज़ी लगे । समझो उसकी ही मरज़ी लगे ।। कोई कंबल उड़ा दो इन्हें । ब... Read more

घटा-सी छा रही थी

घटा-सी छा रही थी, छा गई क्या ? बरस जाएगी ये बदली नई , क्या ? चाँद छिपने के लिए तैयार बैठा ; घटा की आँख में आई ,नमी क्या ? ... Read more

कजा से जो हमेशा ही लड़ा है

कजा से जो हमेशा ही लड़ा है । उसी में फूल जीवन का खिला है ।। चलो,अमराई की ठंडक मिलेगी , नदी के पार कच्चा रास्ता है ।। हवा ... Read more

साल जाते हैं, तो आते भी हैं ।

साल जाते हैं, तो आते भी हैं । ग़र ये रोते हैं, तो गाते भी हैं ।। ग़म के सागर में डुबोया इनने, किन्तु अपने हैं, तो भाते भी हैं ।। ... Read more

त्रासदी

(युवा मित्र के अकस्मात दुखद निधन पर अर्पित काव्य-श्रद्धांजलि ) त्रासदी/ उस क्षण कैसा लगता है ? जब वृक्ष बनने से पहले ह... Read more

मित्रता

कभी-कभी, ऐंसा लगता है; फुदक-फुदक कर, चहक-चहक कर, उड़ जाऊँ, गौरैया जैसा । गुनगुनाऊँ, गीत गाऊँ, आम्र की शाखा पर बैठी कोयल ... Read more

ज्ञान का भ्रम

जो अज्ञानी व्यक्ति है वह ज्ञानवान व्यक्ति का शत्रु नहीं हो सकता बल्कि जो ज्ञान होने का दिखावा करता है कि मै ज्ञानी हूँ उसका यह भ्रम ... Read more

आव बैठ ले मजले कक्का (बुंदेली कविता)

आव बैठ ले मजले कक्का हते कहाँ तुम ? तुमसें मिलें जमानों हो गव । ऊँसई सूके कुआ बाबरी , ऊँसई नदिया नारे । बिखरे हैं रसगुल्ला जले... Read more

श्रद्धांजलि

आखिर! दाग ही दिए ग्रेनेड जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने सेना के शिविर में सोते हुए जवानों पर । 14 जवान ज़िन्दा जले 20 हुए... Read more

फिर से बचपन आ जाता

गीत जाने क्यों लगता है मुझको ? फिर से बचपन आ जाता । खोई हुई ख़ुशी जीवन की और प्यार मैं पा जाता । रोज़ बनाना नये घरौंदे और ... Read more

सफ़र तीखा हुआ .(ग़ज़ल)

सफ़र तीखा हुआ, मिर्ची मिले नींबू की तरह । दर्द़ घुलने लगा , इमली मिले काजू की तरह । ज़िन्दगी तैरती जाती है, हवाओं में यहाँ ; जैसे... Read more

रानगिर की हवा में शामिल हैं दक्षकन्या की स्मृतियाँ

दिव्य-कन्या बन गई पाषाण-प्रतिमा- तीन रूपों में होते हैं हरसिद्धि के दर्शन रानगिर की फ़िज़ा में घुली हुई हैं दक्षकन्या सती की स्मृत... Read more

उठ मेरी बेटी

बकरियाँ मिनमिनाती हुई जाने लगीं ज़ंगल की ओर ; रोज़ की तरह समझाती हुईं समय की पाबंदी का अर्थ । बजने लगे पहट से लौटती ... Read more

यह नगरी है (५)

यह नगरी है , नेताओं की , आकाओं की । बस-स्टेंड इनके पापा का , जिसे बनाया इनने दफ़्तर । लंबी ऊंची पहुंच बताकर , ख़ुद ही ख़ुद को क... Read more

यह नगरी है (४)

यह नगरी है , भक्तों की , परम विरक्तों की । बगुले जैसा ध्यान लगाते​ । फिर भी मछली पकड़ न पाते । यज्ञ कराते भजन कराते । रामायण का... Read more

यह नगरी है (३)

यह नगरी है , संतों की , परम महंतों की । जटा-जूट लम्बे-चौड़े हैं । पर विचार इनके भौंड़े हैं । तिलक है लम्बा चिंतन छोटा । धर्म-कर... Read more

यह नगरी है (२)

यह नगरी है , सिद्धों की, परम प्रसिद्धों की । कान खड़े रहते हैं जिनके , परनिंदा हरक्षण सुनने को । नाक सदा जो पेंनी रखते , गंध घृ... Read more

यह नगरी है (१)

यह नगरी है , बुद्धों की , परम प्रबुद्धों की । मुर्गे की जो टांग खींचते , सदा सत्य से आंख मींचते । वियर- बार में मंजन करते , कट... Read more

सापेक्षता (समकालीन कविता)

तुम, आधे-अधूरे नहीं, परिपूर्ण हो, सम्पूर्ण हो । क्योंकि- तुम्हारे पास हाथ हैं , पांव हैं , नाक है, कान हैं, आंखें हैं । ... Read more

लिख दूं (ग़ज़ल)

आज मन की बात लिख दूं । दोस्तों का घात लिख दूं ।। दिन मेरे हो गये ठण्डे , गर्म होती रात लिख दूं ।। उमड़-घुमड़ कर आंख से... Read more

बाल उमंग ( बाल कविता)

आज गेंद-सा , मैं उछलूंगा । आगे बढ़ने को दौड़ूंगा । बड़ी खाईंयां , मैं लांघूंगा । जीवन को अब, मैं जानूंगा । पापा से यह , ... Read more

नहीं हुआ स्पर्श धूप का

गीत नहीं हुआ स्पर्श धूप का , मेरे घर और आंगन में । किया न चुंबन रवि किरणों ने , झड़ती इन पंखुड़ियों का । अज़ब निराशा में है,... Read more

आंगन को भी जरा लीप दो

बिटिया ! रांगोली रचकर तुम , आंगन को भी जरा लीप दो । मुद्दत से उखड़ा-उखड़ा ये , वर्षों से उजड़ा-उजड़ा ये ; आंगन तुम्हें निहार र... Read more

एम.ए.पास न होता (गीत)

दिन भर करता काम-काज मैं, रात नींद भर सोता । कितना अच्छा होता जो मैं एम.ए. पास न होता ।। गांव छोड़कर क्यों मैं रहता इस शहरी... Read more

नवरात्रि के आगमन पर

आ रही हैं कल से मैया । प्यारी मैया , सबकी मैया । कल से होंगे रतजगे । भगतें होंगी , भजन भी होंगे । दारू बाले दारू छोड़ेंगे ... Read more

पीड़ा

पीड़ा जब भी आई है , नहीं किसी को भाई है । हर्षित होकर कोई न उठता , अतिथि पीड़ा के स्वागत में , फिर भी पीड़ा करती रहती , हरदम सब... Read more

ग़ज़ल

मिले कहीं पर बात हो जो लाज़मी ले जाईये । खोजकर कोई भीड़ में से आदमी ले जाईये । श्याम-पट पर उकेरे जो अक्षरों-सा चमकता हो , ज़िंदग़... Read more

शायद ! तुमने मुस्काया है. (नवगीत)

स्वच्छंद गगन , सुरभित है चमन, शायद ! तुमने मुस्काया है । झरने का कल-कल,छल-छल ; जैसे- लहराता हो आँचल । ये झंकृत होता मंद पवन... Read more

गीतिका

अगर चाहता है तू खुशियाँ ,दुख तुझको सहना होगा । बैठे-बैठे कुछ न होगा , जतन तुझे करना होगा । । वज्राघात भले हो जाए , गिरे... Read more

भजन (ग़ज़ल)

""""""" ग़ज़ल """''"""'" तुम्हारा प्यार प्यारा है,जो मेरे दिल को भाता है । उसी के ही सहारे से, ग़ुजरता वक्त जाता है । । दिल-ए-नाद... Read more

तन्हाईयां (ग़ज़ल)

ज़िन्द़गी का हौस़ला , तनहाईयाँ । काव्य की सुंदर कला, तनहाईयाँ । उलझ जाता ज़िन्द़गी की भीड़ में, सुलझातीं वह मामला तनह... Read more

राष्ट्र-भक्ति गीतिका

शस्य-श्यामला इस धरती को , बारम्बार प्रणाम है । हरे-भरे-से इन खेतों को । मरुस्थलों की भी रेतों को । पर्वत,सागरऔर नदियों को। बी... Read more

ग़ज़ल

ज़मानें ये जब भी ज़मानें न होंगे । तराऩें ये तब भी पुरानें न होंगे ।। अभी से न रोको क़लम का सफ़र तुम दिलक़श ये आगे बहानें न होंगे... Read more

वक्त आ गया है जबाव का

वक्त आ गया है, जब़ाब का । हुए बहुत दिन घिसते-पिसते , वेईमानी का जीवन जीते । अब यह ढर्रा नहीं चलेगा , सही माल ही यहाँ गलेगा ।... Read more

ग़ज़ल

एक नेता ने कहा है, आएंगे अब दिन अच्छे । प्यार के गीत ही गाएंगे, अब दिन अच्छे ।। अब न खाएगा कोई दर-ब-दर की ठोकर , ठांव सबके ही बना... Read more

फाग गीत

आओ मिलकर गाएं फाग । छेड़ें समरसता का राग । । हुए बहुत दिन लड़ते-लड़ते , बात-बात पर खूब झगड़ते । लेकिन बात बनी न अब तक, फिर ... Read more

वसंत का स्पर्श

वसंत का स्पर्श अब आनंद नहीं है आदमी की आँखों में । 'जले पर छिड़का गया नमक है ।' कोई आशा बाकी नहीं है आदमी के भीतर सोये आदमी क... Read more

अपने बेटे के लिए ( समकालीन कविता )

बेटे ! मेरी रफ़्तार के लिए तब्दील होते थे दुनियाँ की तमाम रफ़्तारों में मेरे पिता । कई बार सुख का तमाम आनंद महसूस करने के बाब... Read more

बेटियाँ

दो नदियों का मेल कराती हैं बेटियाँ । प्यार की धारा ही बहाती हैं बेटियाँ । संजीदगी से करती हैं कठनाईयों को पार सहयोग का दस्तूर चला... Read more

ग़ुजरा साल पुराना

नई-नई सौगातें देकर, ग़ुजरा साल पुराना । नोटों को भी बंद करा कर , बाजारों को मंद करा कर । नयी व्यवस्था की कोशिश में, तुगलकी फ़... Read more

आदमी (नवगीत)

नवगीत श्याम-पट पर अक्षरों-सा नहीं चमकता आदमी । अक्षरों पर श्याम-पट-सा काला दिखता । ज़हर ज़माने का काग़ज पर है यह ल... Read more

हवा

बह रही अंदर हवा है । चल रही बाहर हवा है । वक्त के द्वारा जो चलतीं, आँधियों का डर हवा है । एक हवा से दूसरी तक, दिख रहा मंज़र हवा... Read more

नोट-बंदी

हर तरह से हर गति अब आज मंदी हो गई । जब से मेरे देश में ये , नोट-बंदी हो गई । मिट्टी के भाव से बिकता है किसानों का अनाज , निर्धन... Read more

नवगीत

शिशिर अब, रोमांस नहीं , गुनगुनाती धूप में । आँख की गहराई में आँसुओं का जलधि है । ज्वार- जैसा उछल जाना सदा इसकी. नियति है । ... Read more

ज़िंदग़ी सिगरेट का धुआँ (नवगीत)

ज़िंदग़ी सिगरेट का धुआँ । कहीं खाई, कहीं कुआँ । ज़रदे जैसी यह ज़हरीली , लाल - हरी और नीली-पीली । बढ़ती देख सदा जलती है... Read more

कचरे का ढेर

कमाया , ठीक कमाया और बहुत कमाया ; नाम भी , धन भी । अपनी कला से किया लोगों का मनोरंजन भी । नगर-नगर गलियों-गलियो मे... Read more

जंगली और पालतू कुत्ते की मित्रता (व्यंग्य- कविता)

जंगल से इक आया कुत्ता । बूटी मुँह में दाबे कुत्ता । उसे देखकर भौंका कुत्ता । जंगल के फिर उस कुत्ते को, इस कुत्ते ने मित्र बनाया ... Read more