Madhusudan Dixit

फतेहपुर उत्तर प्रदेश

Joined November 2018

साहित्यकार

Copy link to share

मुक्तक

गीत कैसे मधुर गुनगुनाने लगे प्रीति की रीति जग को बतान लगे वो प्रफुल्लित सदा पुष्प की गंध से बाटिकामे भ्रमर अब तो आने लगे ।। ... Read more

मनुज जन्म साकार होगया

मुझको यह एतबार होगया मुझको तमसे प्यार होगया मुस्कानें मुखड़े पर आयीं पीड़ाओं से पार होगया तेरी कृपा कटाक्... Read more

यदि चाह रहा जीवन सुखकर

यह सारा जग ही है नश्वर फिर क्यों करता है आडम्बर पूरे कर कर्म सभी अपने निष्काम कर्म मे रत रहकर सबकुछ माया परमेश्वर ... Read more

भारत माँ का गान चाहिए

गीतिका मुझे न अपना मान चाहिए भारत माँ का गान चाहिए अस्ताचलगामी न बनें बस उदयाचल का ध्यान चाहिए कभी न जो खटके आँख... Read more

गीतिका

बने विश्व मे भारत सक्षम बने स्वयं के सम्बल भी हम नहीं दैन्यता रहे कभी भी बढ़ते जायें आगे हरदम राम कृष्ण आदर्श ... Read more

ज्ञान

धर्म ग्रंथ कोई पढ़ो गीता या कूरान, बदलेगा कुछ भी नहीं यदि न मिटा अभिमान, ईश्वर से परिपूर्ण है यह सारा ब्रह्... Read more

कुण्डलियाँ

आतंकित इस विश्व का राजा हो या रंक। करता लहू-लुहान है सबको यह आतंक।। सबको यह आतंक मिटाएं सब मिलकर हम। इन आतंकवादियों से ज्यादा ह... Read more

राष्ट्रवाद की गंगा

चार साल मे पता चला हम कहाँ गये, दुनिया मे सम्मान मिला हम जहाँ गये, गंगोत्री जैसा निर्मल अपना. नेता, राष्ट्रवाद. ... Read more

लूट की छूट

जिन लोगों ने देश को लूटा सत्तर साल, हित चिंतक बन देश के ठोक रहे हैं ताल, सत्ता फिर से मिल गई फिर से होगी लूट, मिली लूट... Read more

अम्मा याद बहुत आती है

अम्मा याद बहुत आती है बचपन की वह प्रीति मनोहर मेरा अंतस सहलाती है अम्मा या द बहुत आती है मल मल कर नितप्रति नहलाना लोरी गाकर न... Read more