Pintu Kumar

Sikandrabad

Joined March 2017

I am a software engineer. I love reading and writing poems, sher o shayari and computer programming blogs.

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बेटियां

मैं नहीं वो कली अब, खिली हो जो मुरझाने को, अब नहीं मैं अबला नारी, बनी हो जो सताने को. नहीं बनना है अब मुझे, परिहास इस जमाने म... Read more

उस का ये गुलाब

उठी है आज कलम फिर, कुछ लिखने का मन चाह रहा है, आज फिर मुझे उस का, दामन याद आ रहा है, दोस्त कहते है भूल जा उस को, पर कैसे भूल जा... Read more