परिचय
पवन चिंतामणि तिवारी
जन्म-अम्बेडकरनगर ,उत्तर प्रदेश, शिक्षा – स्नातक एवं हिन्दी में ”साहित्यरत्न”.गत 19 वर्षों से मुंबई में निवास.12 वर्ष की उम्र से लेखन , तमाम पत्र- पत्रिकाओं का सम्पादन किया. आकाशवाणी से अनेक कार्यक्रम प्रसारित, एक उपन्यास ,एक कहानी संग्रह ,प्रकाशित, लेखक ,पत्रकार, वक्ता, शोध कर्ता,हिन्दी सेवी

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प्यार किये हैं कहते हैं तो मान भी लेते हैं

पर्वत की चोटी पे फतह इतनी भी आसान नहीं फतह तो ठीक सलामत आना इतना भी आसान नहीं वो चाहें और हो जाए वो कोई भगवान नहीं इंसा भगव... Read more

गद्य था मैं तुम मिली तो पद्य आया

दुःख था इतना मृत्यु के मंजर दिखे तुमको सोंचा जीने के फिर घर दिखे जब उदासी घेर लेती है मुझे मुझे बुलाते तब तुम्हारे कर दिखे प्... Read more

हिन्दी

मस्तक का चन्दन है हिन्दी . माथे की बिंदी है हिन्दी. पहचान हिन्द की है हिन्दी. आम-आदमी की भाषा भी है हिन्दी. भारत की संस्कृति... Read more