मैं पेशे से इंजीनियर हूँ और शौकिया कवितायेँ लिखती हूँ। मेरा प्रथम कविता संग्रह ‘क्षितिज’ प्रकाशित हो चूका है। अपने छोटे से योगदान से हिंदी साहित्य जगत में छोटी सी जगह बनाना चाहती हूँ।

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बड़ी हो गयी है कितनी

पीठ पे बस्ता टाँग के अपना हिला हाथ वो स्कूल चली बड़ी हो गयी है अब कितनी मेरी वो नन्हीं सी कली अभी तो आयी थी गोदी में अभी तो प... Read more